💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 51 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐कर्त्तव्य💐💐*
https://chat.whatsapp.com/EzRzIWi91ymAnTygyjApft
एक गांव में एक संत निवास करते थे। संत का व्यवहार बहुत ही सरल ज्ञानी कर्तव्यनिष्ठ शांत रहता था। संत के इस व्यवहार से बच्चे बहुत ज्यादा खिल्ली उड़ाते रहते थे, लेकिन कभी संत बुरा नही माने।
अपने इस व्यवहार के कारण संत का स्वभाव आसपास में मशहूर था। गांव के लोव अपनी समस्या भी संत के पास लेकर आते और उचित मार्गदर्शन से संतुष्ट भी होते थे।इन सभी व्यवहार के कारण बच्चे बूढ़े, सभी के लिए चहेते भी थे।
एक बार बच्चों को कुछ शैतानी सूझी बच्चों ने संत के साध्वी को जाकर भड़काया की संत बाबा को आज बहुत सारा गन्ना मिला है,पर पता नही आपके पास आते आते आपके लिए बचा पाएंगे कि नही ,सभी को रास्ते मे बांटते आ रहे है।
संत की साध्वी थोड़ा झगड़ालू व चिड़चिड़ा प्रवृत्ति की थी, तब तक संत अपने कुटिया की ओर पहुँच गए। बच्चे शीघ्रता से छिप गए।
परंतु साध्वी संत के हाथों में मात्र एक ही गन्ना देखकर गुस्सा से आगबबूला हो गये और गुस्से से बोली कि मात्र एक ही गन्ना लेकर आये हो,(गन्ना छीनकर) जाओ इसे भी किसी को बांट दो कहकर फेक देती जिससे गन्ना दो टुकड़ा हो जाता है। संत जी ये देखकर शांति से बोलते है कि तुम्हारा भी कोई जवाब नही कितना सुंदर बराबर दो भाग में टुकड़ा किये हो। चलो मैं स्नान कर के आता हूं फिर गन्ना खाएंगे।
इस प्रकार संत के स्वभाव से साध्वी का गुस्सा शांत हो जाता है।और बच्चे अपने शरारती स्वभाव पर लज्जित हो भाग जाते है।
उधर संत जी नदी में स्नान कर रहे होते है तो क्या देखते है कि एक बिच्छू का बच्चा पानी मे बह रहा है,संत जी बिच्छु के बच्चे को बाहर निकलने की कोशिश करते है परंतु बिच्छू के बच्चा स्वभाव वश संत को डंक मरता है और जल में पुनः हाथ से गिर जाता है यह प्रक्रिया तीन चार बार होते देख पास में स्नान कर रहे ग्रामीण, संत से बोलते है कि बाबा आप को बिच्छू का बच्चा डंक पे डंक मार रहा है और आप उसे बचाने पर तुले है।
संत बड़ी ही सरलता से बोलते है कि यह बिच्छू का बच्चा होते हुए भी अपना स्वभाव नही छोड़ रहा है तो हम मनुष्यों का स्वभाव क्यो छोड़े।
हमें तो किसी असहाय प्राणियों की रक्षा करनी ही चाहिए और फिर कमंडल में पकड़ कर बिच्छू के बच्चे को बाहर निकल ही लेते है।
*💐💐शिक्षा💐💐*
इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि विषम परिस्थितियों में भी हमें अपना धैर्य नही खोकर कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए msg करें-👇*
8058708000
https://t.me/Hindishayriya
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 52 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐चिड़िया की परेशानी 💐💐*
https://chat.whatsapp.com/EzRzIWi91ymAnTygyjApft
कैसोवैरी चिड़िया को बचपन से ही बाकी चिड़ियों के बच्चे चिढाते थे।
कोई कहता, ” जब तू उड़ नहीं सकती तो चिड़िया किस काम की।”, तो कोई उसे ऊपर पेड़ की डाल पर बैठ कर चिढाता कि,” अरे कभी हमारे पास भी आ जाया करो…जब देखो जानवरों की तरह नीचे चरती रहती हो…”
और ऐसा बोलकर सब के सब खूब हँसते!
कैसोवैरी चिड़िया शुरू-शुरू में इन बातों का बुरा नहीं मानती थी लेकिन किसी भी चीज की एक सीमा होती है।
बार-बार चिढाये जाने से उसका दिल टूट गया! वह उदास बैठ गयी और आसमान की तरफ देखते हुए बोली,
“हे ईश्वर, तुमने मुझे चिड़िया क्यों बनाया…और बनया तो मुझे उड़ने की काबिलियत क्यों नहीं दी… देखो सब मुझे कितना चिढ़ाते हैं… अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रह सकती, मैं इस जंगल को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ कर जा रही हूँ!”
और ऐसा कहते हुए कैसोवैरी चिड़िया आगे बढ़ गयी।
अभी वो कुछ ही दूर गयी थी कि पीछे से एक भारी-भरकम आवाज़ आई-
रुको कैसोवैरी! तुम कहाँ जा रही हो!
कैसोवैरी ने आश्चर्य से पीछे मुड़ कर देखा, वहां खड़ा जामुन का पेड़ उससे कुछ कह रहा था।
“कृपया तुम यहाँ से मत जाओ! हमें तुम्हारी ज़रुरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं…. वो तुम ही हो जो अपनी मजबूत चोंच से फलों को अन्दर तक खाती हो और हमारे बीजों को पूरे जंगल में बिखेरती हो…हो सकता है बाकी चिड़ियों के लिए तुम मायने ना रखती हो लेकिन हम पेड़ों के लिए तुमसे बढ़कर कोई दूसरी चिड़िया नहीं है…मत जाओ…तुम्हारी जगह कोई और नहीं ले सकता!”
पेड़ की बात सुन कर कैसोवैरी चिड़िया को जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि वो इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है, भगवान् ने उसे एक बेहद ज़रूरी काम के लिए भेजा है और सिर्फ बाकी चिड़ियों की तरह न उड़ पाना कहीं से उसे छोटा नहीं बनाता!
आज एक बार फिर कैसोवैरी चिड़िया बहुत खुश थी, वह ख़ुशी-ख़ुशी जंगल में वापस लौट गयी।
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों, कैसोवैरी चिड़िया की तरह ही कई बार हम इंसान भी औरों को देखकर कमजोर महसूस करने लगते हैं। हम सोचते हैं कि उसके पास ये है…उसके पास वो है….सब कितने भाग्यशाली हैं…and all that!
हमें कभी भी बेकार के तुलनात्मकता में नहीं पड़ना चाहिए! हर एक इंसान अपने आप में महत्वपूर्ण है…अलग है। हर किसी के अन्दर कोई न कोई बात है जो उसे ख़ास बनाती है..हाँ हो सकता है कि वो पूरी दुनिया के लिए बस एक इंसान हो लेकिन किसी एक के लिए वो पूरी दुनिया हो सकता है!
इसलिए जीवन के महत्व को समझिये और अपने इस अमूल्य जीवन को सकारात्मक विचारों का तोहफा दीजिये….यकीन जानिये सकारात्मक सोच का ये एक तोहफा आपकी पूरी लाइफ को शानदार बना देगा!
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए msg करें-👇*
8058708000
https://t.me/Hindishayriya
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 53 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐पागल हाथी💐💐*
https://chat.whatsapp.com/ES5xA6ufVqP6Vxzb8S0z5Q
एक बार की बात है। एक गुरूजी थे। उनके बहुत से शिष्य थे। उन्होंने एक दिन अपने शिष्यों को बुलाया और समझाया-
शिष्यों सभी जीवों में ईश्वर का वास होता है इसलिए हमें सबको नमस्कार करना चाहिए।
कुछ दिनों बाद गुरूजी ने एक विशाल हवन का आयोजन किया और कुछ शिष्यों को लकड़ी लेने के लिए पास के जंगल भेजा। शिष्य लकड़ियाँ चुन रहे थे कि तभी वहाँ एक पागल हाथी आ धमका। सभी शिष्य शोर मचा कर भागने लगे,” भागो….हाथी आया…पागल हाथी आया….”
लेकिन उन सबके बीच एक शिष्य ऐसा भी था जो इस खतरनाक परिस्थिति में भी शांत खड़ा था। उसे ऐसा करते देख उसके साथियों को आश्चर्य हुआ और उनमे से एक बोला, “ये तुम क्या कर रहे हो? देखते नहीं पागल हाथी इधर ही आ रहा है…भागो और अपनी जान बचाओ!”
इस पर शिष्य बोला, ” तुम लोग जाओ, मुझे इस हाथी से कोई भय नहीं है… गुरूजी ने कहा था ना कि हर जीव में नारायण का वास है इसलिए भागने कि कोई जरुरत नहीं।”
और ऐसा कह कर वह वहीं खड़ा रहा और जैसे ही हाथी पास आया वह उसे नमस्कार करने लगा।
लेकिन हाथी कहाँ रुकने वाला था, वह सामने आने वाली हर एक चीज को तबाह करते जा रहा था। और जैसे ही शिष्य उसके सामने आया हाथी ने उसे एक तरफ उठा कर फेंक दिया और आगे बढ़ गया।
शिष्य को बहुत चोट आई, और वह घायल हो कर वहीँ बेहोश हो गया।
जब उसे होश आया तो वह आश्रम में था और गुरूजी उसके सामने खड़े थे।
गुरूजी बोले, “हाथी को आते देखकर भी तुम वहाँ से हटे क्यों नहीं जबकि तुम्हे पता था कि वह तुम्हे चोट पहुंचा सकता है।”
तब शिष्य बोला, “गुरूजी आपने ही तो ये बात कही थी कि सभी जीवों में ईश्वर का वास होता है। इसी वजह से मैं नहीं भागा, मैंने नमस्कार करना उचित समझा।”
तब गुरूजी ने समझाया –
बेटा तुम मेरी आज्ञा मानते हो ये बहुत अच्छी बात है मगर मैंने ये भी तो सिखाया है कि विकट परिस्थितियों में अपना विवेक नहीं खोना चाहिए । पुत्र, हाथी नारायण आ रहे थे ये तो तुमने देखा। हाथी को तुमने नारायण समझा। मगर बाकी शिष्यों ने जब तुम्हे रोका तो तुम्हे उनमे नारायण क्यों नज़र नहीं आये। उन्होंने भो तो तुम्हे मना किया था ना। उनकी बात का तुमने विश्वास क्यों नहीं किया।उनकी बात मान लेते तो तुम्हे इतनी तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता, तुम्हारी ऐसी हालत नहीं होती।जल भी नारायण है पर किसी जल को लोग देवता पर चढ़ाते है और किसी जल से लोग नहाते धोते हैं। हमेशा देश, काल और परिस्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों, कई बार ऐसा होता है कि किसी ज्ञानवर्धक बात का असल भाव समझने की बजाये हम उस बात में कहे गए शब्दों को पकड़ कर बैठ जाते हैं। गुरूजी ने शिष्यों को प्रत्येक जीव में नारायण देखने को कहा था जिसका अर्थ था कि हमें सभी का आदर करना चाहिए और किसी को नुक्सान नहीं पहुंचना चाहिए। लेकिन वह शिष्य बस उनके शब्दों को पकड़ कर बैठ गया और उसके जान पर बन आई।
अतः इस कहनी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों कि बात का अनुसरण तो जरुर करना चाहिए मगर विशेष परिस्थिति में अपने विवेक का प्रयोग करने से नहीं चूकना चाहिए। हमें अपनी परिस्थिति के अनुसार ही निर्णय लेना चाहिए।
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए msg करें-👇*
8058708000
https://t.me/Hindishayriya
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 54 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐विश्वासघात💐💐*
https://chat.whatsapp.com/ES5xA6ufVqP6Vxzb8S0z5Q
“मॉम .!!… “मैं सोच रही थी! कि आज रात को मैं शिखा के घर पर ही रुक जाऊंगी…थोडी़ कम्बाइन्ड स्टडी करनी है, वो परसों मैथ्स का टेस्ट है ना उसी की तैयारी करनी है”। किताबें समेंटते हुए चारू बोलती जा रही थी!
“पर बेटा ..रात को ..किसी के घर रुकना मुझे तो ठीक नहीं लगता।”
“मॉम!!”, नाराज होती हुई चारू ने कहा, “देखो ना पापा मां जाने नहीं दे रहीं।।
पापा माँ पर नाराज़ होते हुए बोले, “अरे रुक जाने दो ना चारू को उसकी सहेली के घर, एक रात की ही तो बात है। अपने बच्चों पर विश्वास करना सीखो!, जाओ बेटा”! जाओ!”
चारू ने पापा को थैंक्स कहा और अपनी स्कूटी से निकल गयी।
रात का एक बजा था, फोन की घनघनाहट सुन कर वर्मा जी घबरा कर उठे, फोन पर आवाज आयी, “मि. वर्मा आप तुरन्त थाना गांधी नगर आने का कष्ट करें।”
यह सुनकर वर्मा जी की सांसें गले में अटक गयीं, डर रहे थे की कहीं कोई अनहोनी ना हुई हो…कहीं बेटी को तो कुछ……. बदहवास थाने पहुंचे,देखा दस-पंद्रह लड़के लड़कियां मुंह छिपाये बैठे थे उनमें अपनी चारू को पहचानने में जरा भी देर नहीं लगी।
“देखिये वर्मा जी!!! ये बच्चे दिल्ली के बाहर एक फार्म हाउस में ड्रग्स के साथ रेव पार्टी करते हुए पकडे़ गये हैं!
आप लोग ना जाने अपने बच्चों को कैसे संस्कार देते हैं….ना जाने इतनी रात गए घर से बाहर निकलने की परमिशन कैसे दे देते हैं आप लोग….शर्म आनी चाहिए!
वर्मा जी शर्म का सिर शर्म से झुका जा रहा था, वो बस एक ही बात सोच रहे थे….जब उन्होंने अपनी बेटी पर इतना विश्वास किया तो आखिर क्यों उनकी बेटी ने उनके साथ विश्वासघात कर दिया!
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, इस दुनिया में कोई है जो आपका सबसे अधिक ध्यान रखता है, सबसे अधिक आपका भला चाहता है…. तो वो आपके माता-पिता हैं। वो आपको ऊपर से सख्त लग सकते हैं पर उनके भीतर आपके लिए आपार प्रेम होता है और कभी भी आपको उस प्रेम का नाजायज़ फायदा नहीं उठाना चाहिए…कभी भी आपको उनके विश्वास के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए!
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए msg करें-👇*
8058708000
https://t.me/Hindishayriya
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 55 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐आरी की कीमत💐💐*
https://chat.whatsapp.com/ES5xA6ufVqP6Vxzb8S0z5Q
एक बार की बात है एक बढ़ई था। वह दूर नयासर शहर में एक सेठ के यहाँ काम करने गया। एक दिन काम करते-करते उसकी आरी टूट गयी। बिना आरी के वह काम नहीं कर सकता था, और वापस अपने गाँव लौटना भी मुश्किल था, इसलिए वह शहर से सटे भूरासर गाँव पहुंचा। इधर-उधर पूछने पर उसे लोहार का पता चल गया।
वह लोहार के पास गया और बोला-
भाई मेरी आरी टूट गयी है, तुम मेरे लिए एक अच्छी सी आरी बना दो।
लोहार बोला, “बना दूंगा, पर इसमें समय लगेगा, तुम कल इसी वक़्त आकर मुझसे आरी ले सकते हो।”
बढ़ई को तो जल्दी थी सो उसने कहा, ” भाई कुछ पैसे अधिक ले लो पर मुझे अभी आरी बना कर दे दो!”
“बात पैसे की नहीं है भाई…अगर मैं इतनी जल्दबाजी में औजार बनाऊंगा तो मुझे खुद उससे संतुष्टि नहीं होगी, मैं औजार बनाने में कभी भी अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता!”, लोहार ने समझाया।
बढ़ई तैयार हो गया, और अगले दिन आकर अपनी आरी ले गया।
आरी बहुत अच्छी बनी थी। बढ़ई पहले की अपेक्षा आसानी से और पहले से बेहतर काम कर पा रहा था।
बढ़ई ने ख़ुशी से ये बात अपने सेठ को भी बताई और लोहार की खूब प्रसंशा की।
सेठ ने भी आरी को करीब से देखा!
“इसके कितने पैसे लिए उस लोहार ने?”, सेठ ने बढ़ई से पूछा।
“दस रुपये!”
सेठ ने मन ही मन सोचा कि शहर में इतनी अच्छी आरी के तो कोई भी तीस रुपये देने को तैयार हो जाएगा। क्यों न उस लोहार से ऐसी दर्जनों आरियाँ बनवा कर शहर में बेचा जाये!
अगले दिन सेठ लोहार के पास पहुंचा और बोला, “मैं तुमसे ढेर सारी आरियाँ बनवाऊंगा और हर आरी के दस रुपये दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है… आज के बाद तुम सिर्फ मेरे लिए काम करोगे। किसी और को आरी बनाकर नहीं बेचोगे।”
“मैं आपकी शर्त नहीं मान सकता!” लोहार बोला।
सेठ ने सोचा कि लोहार को और अधिक पैसे चाहिए। वह बोला, “ठीक है मैं तुम्हे हर आरी के पन्द्रह रूपए दूंगा….अब तो मेरी शर्त मंजूर है।”
लोहार ने कहा, “नहीं मैं अभी भी आपकी शर्त नहीं मान सकता। मैं अपनी मेहनत का मूल्य खुद निर्धारित करूँगा। मैं आपके लिए काम नहीं कर सकता। मैं इस दाम से संतुष्ट हूँ इससे ज्यादा दाम मुझे नहीं चाहिए।”
“बड़े अजीब आदमी हो…भला कोई आती हुई लक्ष्मी को मना करता है?”, व्यापारी ने आश्चर्य से बोला।
लोहार बोला, “आप मुझसे आरी लेंगे फिर उसे दुगने दाम में गरीब खरीदारों को बेचेंगे। लेकिन मैं किसी गरीब के शोषण का माध्यम नहीं बन सकता। अगर मैं लालच करूँगा तो उसका भुगतान कई लोगों को करना पड़ेगा, इसलिए आपका ये प्रस्ताव मैं स्वीकार नहीं कर सकता।”
सेठ समझ गया कि एक सच्चे और ईमानदार व्यक्ति को दुनिया की कोई दौलत नहीं खरीद सकती। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है।
अपने हित से ऊपर उठ कर और लोगों के बारे में सोचना एक महान गुण है। लोहार चाहता तो आसानी से अच्छे पैसे कमा सकता था पर वह जानता था कि उसका जरा सा लालच बहुत से ज़रूरतमंद लोगों के लिए नुक्सानदायक साबित होगा और वह सेठ के लालच में नहीं पड़ता।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, अगर ध्यान से देखा जाए तो लोहार की तरह ही हममे से अधिकतर लोग जानते हैं कि कब हमारे स्वार्थ की वजह से बाकी लोगों को नुक्सान होता है पर ये जानते हुए भी हम अपने फायदे के लिए काम करते हैं। हमें इस व्यवहार को बदलना होगा, बाकी लोग क्या करते हैं इसकी परवाह किये बगैर हमें खुद ये फैसला करना होगा कि हम अपने फायदे के लिए ऐसा कोई काम न करें जिससे औरों को तकलीफ पहुँचती हो।
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए msg करें-👇*
8058708000
https://t.me/Hindishayriya
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

