![]() |
| Gayatri pariwar images |
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 301 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐कर्म से बदला भाग्य💐💐*
https://chat.whatsapp.com/I56fJ4cMr8RIcXAHjOBtAU
प्रकृत्य ऋषि का रोज का नियम था कि वह नगर से दूर जंगलों में स्थित शिव मंदिर में भगवान् शिव की पूजा में लींन रहते थे. कई वर्षो से यह उनका अखंड नियम था।
उसी जंगल में एक नास्तिक डाकू अस्थिमाल का भी डेरा था. अस्थिमाल का भय आसपास के क्षेत्र में व्याप्त था. अस्थिमाल बड़ा नास्तिक था. वह मंदिरों में भी चोरी-डाका से नहीं चूकता था।
एक दिन अस्थिमाल की नजर प्रकृत्य ऋषि पर पड़ी. उसने सोचा यह ऋषि जंगल में छुपे मंदिर में पूजा करता है, हो न हो इसने मंदिर में काफी माल छुपाकर रखा होगा. आज इसे ही लूटते हैं.।
अस्थिमाल ने प्रकृत्य ऋषि से कहा कि जितना भी धन छुपाकर रखा हो चुपचाप मेरे हवाले कर दो. ऋषि उसे देखकर तनिक भी विचलित हुए बिना बोले- कैसा धन ? मैं तो यहाँ बिना किसी लोभ के पूजा को चला आता हूं।
डाकू को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ. उसने क्रोध में ऋषि प्रकृत्य को जोर से धक्का मारा. ऋषि ठोकर खाकर शिवलिंग के पास जाकर गिरे और उनका सिर फट गया. रक्त की धारा फूट पड़ी.।
इसी बीच आश्चर्य ये हुआ कि ऋषि प्रकृत्य के गिरने के फलस्वरूप शिवालय की छत से सोने की कुछ मोहरें अस्थिमाल के सामने गिरीं. अस्थिमाल अट्टहास करते हुए बोला तू ऋषि होकर झूठ बोलता है।
झूठे ब्राह्मण तू तो कहता था कि यहाँ कोई धन नहीं फिर ये सोने के सिक्के कहां से गिरे. अब अगर तूने मुझे सारे धन का पता नहीं बताया तो मैं यहीं पटक-पटकर तेरे प्राण ले लूंगा।
प्रकृत्य ऋषि करुणा में भरकर दुखी मन से बोले- हे शिवजी मैंने पूरा जीवन आपकी सेवा पूजा में समर्पित कर दिया फिर ये कैसी विपत्ति आन पड़ी ? प्रभो मेरी रक्षा करें. जब भक्त सच्चे मन से पुकारे तो भोलेनाथ क्यों न आते।
महेश्वर तत्क्षण प्रकट हुए और ऋषि को कहा कि इस होनी के पीछे का कारण मैं तुम्हें बताता हूं. यह डाकू पूर्वजन्म में एक ब्राह्मण ही था इसने कई कल्पों तक मेरी भक्ति की.।
परंतु इससे प्रदोष के दिन एक भूल हो गई. यह पूरा दिन निराहार रहकर मेरी भक्ति करता रहा. दोपहर में जब इसे प्यास लगी तो यह जल पीने के लिए पास के ही एक सरोवर तक पहुंचा।
संयोग से एक गाय का बछड़ा भी दिन भर का प्यासा वहीं पानी पीने आया. तब इसने उस बछड़े को कोहनी मारकर भगा दिया और स्वयं जल पीया. इसी कारण इस जन्म में यह डाकू हुआ।
तुम पूर्वजन्म में मछुआरे थे. उसी सरोवर से मछलियां पकड़कर उन्हें बेचकर अपना जीवन यापन करते थे. जब तुमने उस छोटे बछड़े को निर्जल परेशान देखा तो अपने पात्र में उसके लिए थोड़ा जल लेकर आए. उस पुण्य के कारण तुम्हें यह कुल प्राप्त हुआ।
पिछले जन्मों के पुण्यों के कारण इसका आज राजतिलक होने वाला था पर इसने इस जन्म में डाकू होते हुए न जाने कितने निरपराध लोगों को मारा व देवालयों में चोरियां की इस कारण इसके पुण्य सीमित हो गए और इसे सिर्फ ये कुछ मुद्रायें ही मिल पायीं।
तुमने पिछले जन्म में अनगिनत मत्स्यों का आखेट किया जिसके कारण आज का दिन तुम्हारी मृत्यु के लिए तय था पर इस जन्म में तुम्हारे संचित पुण्यों के कारण तुम्हें मृत्यु स्पर्श नहीं कर पायी और सिर्फ यह घाव देकर लौट गई...।
*💐💐शिक्षा💐💐*
ईश्वर वह नहीं करते जो हमें अच्छा लगता है, ईश्वर वह करते हैं जो हमारे लिए सचमुच अच्छा है. यदि आपके अच्छे कार्यों के परिणाम स्वरूप भी आपको कोई कष्ट प्राप्त हो रहा है तो समझिए कि इस तरह ईश्वर ने आपके बड़े कष्ट हर लिए।
हमारी दृष्टि सीमित है परंतु ईश्वर तो लोक-परलोक सब देखते हैं, सबका हिसाब रखते हैं.हमारा वर्तमान,भूत और भविष्य सभी को जोड़कर हमें वही प्रदान करते हैं जो हमारे लिए उचित है.ईश्वर की शरण में रहें..!!
*💐💐घमंडी देवर को सबक💐💐👇👇*
https://youtu.be/c-zIfffqrgE
https://youtu.be/7CJETU8RI94
ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।
ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
![]() |
| Swasthya kya hai ? |
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 302 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐मन की आस्था💐💐*
https://chat.whatsapp.com/Ez47QXkDm8o9a4zLl0fa1m
एक पंडित जी रामायण कथा सुना रहे थे। लोग आते और आनंद विभोर होकर जाते। पंडित जी का नियम था रोज कथा शुरू करने से पहले "आइए हनुमंत जी बिराजिए" कहकर हनुमान जी का आह्वान करते थे, फिर एक घण्टा प्रवचन करते थे।वकील साहब हर रोज कथा सुनने आते। वकील साहब के भक्तिभाव पर एक दिन तर्कशीलता हावी हो गई।
उन्हें लगा कि महाराज रोज "आइए हनुमंत जी बिराजिए" कहते हैं तो क्या हनुमान जी सचमुच आते होंगे!
अत: वकील साहब ने पंडित जी से पूछ ही डाला- महाराज जी, आप रामायण की कथा बहुत अच्छी कहते हैं।
हमें बड़ा रस आता है परंतु आप जो गद्दी प्रतिदिन हनुमान जी को देते हैं उसपर क्या हनुमान जी सचमुच बिराजते हैं?
पंडित जी ने कहा… हाँ यह मेरा व्यक्तिगत विश्वास है कि रामकथा हो रही हो तो हनुमान जी अवश्य पधारते हैं।
वकील ने कहा… महाराज ऐसे बात नहीं बनेगी।
हनुमान जी यहां आते हैं इसका कोई सबूत दीजिए ।
आपको साबित करके दिखाना चाहिए कि हनुमान जी आपकी कथा सुनने आते हैं।
महाराज जी ने बहुत समझाया कि भैया आस्था को किसी सबूत की कसौटी पर नहीं कसना चाहिए यह तो भक्त और भगवान के बीच का प्रेमरस है, व्यक्तिगत श्रद्घा का विषय है । आप कहो तो मैं प्रवचन करना बंद कर दूँ या आप कथा में आना छोड़ दो।
लेकिन वकील नहीं माना, वो कहता ही रहा कि आप कई दिनों से दावा करते आ रहे हैं। यह बात और स्थानों पर भी कहते होंगे,इसलिए महाराज आपको तो साबित करना होगा कि हनुमान जी कथा सुनने आते हैं।
इस तरह दोनों के बीच वाद-विवाद होता रहा।
मौखिक संघर्ष बढ़ता चला गया। हारकर पंडित जी महाराज ने कहा… हनुमान जी हैं या नहीं उसका सबूत कल दिलाऊंगा।
कल कथा शुरू हो तब प्रयोग करूंगा।
जिस गद्दी पर मैं हनुमानजी को विराजित होने को कहता हूं आप उस गद्दी को आज अपने घर ले जाना।
कल अपने साथ उस गद्दी को लेकर आना और फिर मैं कल गद्दी यहाँ रखूंगा।
मैं कथा से पहले हनुमानजी को बुलाऊंगा, फिर आप गद्दी ऊँची उठाना।
यदि आपने गद्दी ऊँची कर दी तो समझना कि हनुमान जी नहीं हैं। वकील इस कसौटी के लिए तैयार हो गया।
पंडित जी ने कहा… हम दोनों में से जो पराजित होगा वह क्या करेगा, इसका निर्णय भी कर लें ?.... यह तो सत्य की परीक्षा है।
वकील ने कहा- मैं गद्दी ऊँची न कर सका तो वकालत छोड़कर आपसे दीक्षा ले लूंगा।
आप पराजित हो गए तो क्या करोगे?
पंडित जी ने कहा… मैं कथावाचन छोड़कर आपके ऑफिस का चपरासी बन जाऊंगा।
अगले दिन कथा पंडाल में भारी भीड़ हुई जो लोग रोजाना कथा सुनने नहीं आते थे,वे भी भक्ति, प्रेम और विश्वास की परीक्षा देखने आए।
काफी भीड़ हो गई।
पंडाल भर गया।
श्रद्घा और विश्वास का प्रश्न जो था।
पंडित जी महाराज और वकील साहब कथा पंडाल में पधारे... गद्दी रखी गई।
पंडित जी ने सजल नेत्रों से मंगलाचरण किया और फिर बोले "आइए हनुमंत जी बिराजिए" ऐसा बोलते ही पंडित जी के नेत्र सजल हो उठे ।
मन ही मन पंडित जी बोले… प्रभु ! आज मेरा प्रश्न नहीं बल्कि रघुकुल रीति की पंरपरा का सवाल है।
मैं तो एक साधारण जन हूँ।
मेरी भक्ति और आस्था की लाज रखना।
फिर वकील साहब को निमंत्रण दिया गया आइए गद्दी ऊँची कीजिए।
लोगों की आँखे जम गईं ।
वकील साहब खड़े हुए।
उन्होंने गद्दी उठाने के लिए हाथ बढ़ाया पर गद्दी को स्पर्श भी न कर सके !
जो भी कारण रहा, उन्होंने तीन बार हाथ बढ़ाया, किन्तु तीनों बार असफल रहे।
पंडित जी देख रहे थे, गद्दी को पकड़ना तो दूर वकील साहब गद्दी को छू भी न सके।
तीनों बार वकील साहब पसीने से तर-बतर हो गए।
वकील साहब पंडित जी महाराज के चरणों में गिर पड़े और बोले महाराज गद्दी उठाना तो दूर, मुझे नहीं मालूम कि क्यों मेरा हाथ भी गद्दी तक नहीं पहुंच पा रहा है।
अत: मैं अपनी हार स्वीकार करता हूँ।
कहते है कि श्रद्घा और भक्ति के साथ की गई आराधना में बहुत शक्ति होती है। मानो तो देव नहीं तो पत्थर।
प्रभु की मूर्ति तो पाषाण की ही होती है लेकिन भक्त के भाव से उसमें प्राण प्रतिष्ठा होती है तो प्रभु बिराजते है।
*💐💐घमंडी देवर को सबक💐💐👇👇*
https://youtu.be/c-zIfffqrgE
https://youtu.be/7CJETU8RI94
ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।
ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 303 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐ईमानदारी का नाटक करना और ईमानदार होना इसमें जमीन- आसमान का अंतर है💐💐*
https://chat.whatsapp.com/Ez47QXkDm8o9a4zLl0fa1m
एक व्यक्ति कुछ पैसे निकलवाने के लिए बैंक गया। कैशियर ने पेमेंट किया... कस्टमर ने चुपचाप उसे अपने बैग में रखा और चल दिया। एक लाख चालीस हज़ार रुपए उसनें निकलवाए थे।
कैशियर ने ग़लती से एक लाख चालीस हज़ार रुपए के बजाय एक लाख साठ हज़ार रुपए उसे दे दिए हैं... यह उसने देख लिया था... लेकिन उसने यह आभास कराते हुए कि उसने पैसे नहीं गिने है और कैशियर की ईमानदारी पर उसे पूरा भरोसा है, चुपचाप पैसे बेग मे रख लिए।
https://youtu.be/6jB-YXWuDY4
पैसे बैग में रखते ही अतिरिक्त बीस हजार रुपयों को लेकर उसके मन में उधेड़ -बुन शुरू हो गई। एक बार उसके मन में आया कि ज्यादा रकम वापस लौटा दे...
लेकिन दूसरे ही पल उसने सोचा कि जब मैं ग़लती से किसी को अधिक पेमेंट कर देता हूँ, तो मुझे कौन लौटाने आता है.??
मन में बार-बार विचार आया कि, पैसे लौटा दे... लेकिन हर बार दिमाग पैसे ना लौटाने की कोई न कोई वजह या बहाना बता देता ।
इंसान के अन्दर सिर्फ दिल और दिमाग ही नहीं होता..!परमात्मा का प्रतिनिधित्व करती अंतरात्मा भी होती है.!!
उस आदमी की अंतरात्मा रह-रह कर उसे कचोटने लगी... अंदर से आवाज़ आ रही थी कि, तुम किसी की ग़लती से फ़ायदा उठाने से नहीं चूक रहे हो और ऊपर से बेईमान न होने का ढोंग भी कर रहे हो। क्या यही है तुम्हारी ईमानदारी.???
उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। अचानक ही उसने बैग में से बीस हज़ार रुपए निकाले और जेब में डालकर बैंक की ओर चल पड़ा। उसकी बेचैनी और तनाव घटने लगा... वह स्वयं को हल्का और स्वस्थ अनुभव करने लगा । यद्यपि वह कोई बीमार नहीं था, तथापि उसे लग रहा था जैसे उसे किसी बीमारी से मुक्ति मिल गई हो। उसके चेहरे पर किसी युद्ध को जीतने जैसी प्रसन्नता व्याप्त थी।
अपने रुपए पाकर कैशियर ने चैन की सांस ली। उसने कस्टमर को अपनी जेब से हज़ार रुपए का एक नोट निकालकर उसे देते हुए कहा - ‘‘भाई साहब ! आपका बहुत-बहुत आभार । आज मेरी तरफ से बच्चों के लिए मिठाई ले जाना। प्लीज़ मना मत करना।”
‘‘भाई ! आभारी तो मैं हूँ आपका और आज मिठाई भी मैं ही आप सबको खिलाऊँगा ।’’ - कस्टमर बोला।
कैशियर ने पूछा - ‘‘ भाई साहब ! आप किस बात का आभार प्रकट कर रहे हो और किस ख़ुशी में मिठाई खिला रहे हो ?’’
कस्टमर ने जवाब दिया - "बीस हज़ार के चक्कर ने मुझे आत्म-मूल्यांकन का अवसर प्रदान किया। अगर आपसे ये ग़लती न होती तो, न तो मैं द्वंद्व में फँसता और न ही उससे निकल कर अपनी लोभवृत्ति पर क़ाबू पाता। यह बहुत मुश्किल काम था। घंटों के द्वंद्व के बाद ही मैं जीत पाया। इस दुर्लभ अवसर के लिए आपका आभार।”
ईमानदारी का नाटक करना और ईमानदार होना इसमें जमीन- आसमान का अंतर है।
*शिक्षा:-*
इतिहास गवाह है, लालच ने हमेशा इंसान को परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया..!!
*💐💐घमंडी देवर को सबक💐💐👇👇*
https://youtu.be/c-zIfffqrgE
https://youtu.be/7CJETU8RI94
ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।
ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 304 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐सेहत का रहस्य💐💐*
https://chat.whatsapp.com/Ez47QXkDm8o9a4zLl0fa1m
बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में शंकर नाम का एक वृद्ध व्यक्ति रहता था। उसकी उम्र अस्सी साल से भी ऊपर थी पर वो चालीस साल के व्यक्ति से भी स्वस्थ लगता था। लोग बार बार उससे उसकी सेहत का रहस्य जानना चाहते पर वो कभी कुछ नहीं बोलता था । एक दिन राजा को भी उसके बारे में पता चला और वो भी उसकी सेहत का रहस्य जाने के लिए उत्सुक हो गए। राजा ने अपने गुप्तचरों से शंकर पर नज़र रखने को कहा। गुप्तचर भेष बदल कर उस पर नज़र रखने लगे।
अगले दिन उन्होंने देखा की शंकर भोर में उठ कर कहीं जा रहा है , वे भी उसके पीछे लग गए। शंकर तेजी से चलता चला जा रहा था , मीलों चलने के बाद वो एक पहाड़ी पर चढ़ने लगा और अचानक ही गुप्तचरों की नज़रों से गायब हो गया। गुप्तचर वहीँ रुक उसका इंतज़ार करने लगे। कुछ देर बाद वो लौटा , उसने मुट्ठी में कुछ छोटे-छोटे फल पकड़ रखे थे और उन्हें खाता हुआ चला जा रहा था। गुप्तचरों ने अंदाज़ा लगाया कि हो न हो , शंकर इन्ही रहस्यमयी फलों को खाकर इतना स्वस्थ है।
https://youtu.be/2BlF2SHHl7o
अगले दिन दरबार में उन्होंने राजा को सारा किस्सा कह सुनाया। राजा ने उस पहाड़ी पर जाकर उन फलों का पता लगाने का आदेश दिया , पर बहुत खोज-बीन करने के बाद भी कोई ऐसा असाधारण फल वहां नहीं दिखा। अंततः थक-हार कर राजा शंकर को दरबार में हाज़िर करने का हुक्म दिया। राजा – शंकर , इस उम्र में भी तुम्हारी इतनी अच्छी सेहत देख कर हम प्रसन्न हैं , बताओ , तुम्हारी सेहत का रहस्य क्या है ?
शंकर कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला , ” महाराज , मैं रोज पहाड़ी पर जाकर एक रहस्यमयी फल खाता हूँ , वही मेरी सेहत का रहस्य है। “ठीक है चलो हमें भी वहां ले चलो और दिखाओ वो कौन सा फल है। सभी लोग पहाड़ी की और चल दिए , वहां पहुँच कर शंकर उन्हें एक बेर के पेड़ के पास ले गया और उसके फलों को दिखाते हुए बोला, हुजूर , यही वो फल है जिसे मैं रोज खाता हूँ।
https://youtu.be/2BlF2SHHl7o
राजा क्रोधित होते हुए बोले , ” तुम हमें मूर्ख समझते हो , यह फल हर रोज हज़ारों लोग खाते हैं , पर सभी तुम्हारी तरह सेहतमंद क्यों नहीं हैं ?” शंकर विनम्रता से बोला , ” महाराज , हर रोज़ हजारों लोग जो फल खाते हैं वो बेर का फल होता है , पर मैं जो फल खाता हूँ वो सिर्फ बेर का फल नहीं होता …वो मेरी मेहनत का फल होता है। इसे खाने के लिए मैं रोज सुबह 10 मील पैदल चलता हूँ जिससे मेरे शरीर की अच्छी वर्जिश हो जाती है और सुबह की स्वच्छ हवा मेरे लिए जड़ी-बूटियों का काम करती है। बस यही मेरी सेहत का रहस्य है।
https://youtu.be/2BlF2SHHl7o
राजा शंकर की बात समझ चुके थे , उन्होंने शंकर को स्वर्ण मुद्राएं देते हुए सम्मानित किया। और अपनी प्रजा को भी शारीरिक श्रम करने की नसीहत दी।
*💐शिक्षा💐:-*
मित्रों, आज टेक्नोलॉजी ने हमारी ज़िन्दगी बिलकुल आसान बना दी है , पहले हमें छोटे -बड़े सभी कामों के लिए घर से निकलना ही पड़ता था , पर आज हम Internet के माध्यम से घर बैठे-बैठे ही सारे काम कर लेते हैं। ऐसे में जो थोड़ा बहुत Physical Activity के मौके होते थे वो भी खत्म होते जा रहे हैं , और इसका असर हमारी सेहत पर भी साफ़ देखा जा सकता है। WHO के मुताबिक , आज दुनिया में 20 साल से ऊपर के 35% लोग Overweight हैं और 11 % Obese हैं। ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि हम अपनी सेहत का ध्यान रखें और रोज़-मर्रा के जीवन में शारीरक श्रम को महत्त्व दे।।
*💐💐अनपढ़ पत्नी💐💐👇👇*
https://youtu.be/6jB-YXWuDY4
https://youtu.be/7CJETU8RI94
ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।
ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 305 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐श्रद्धा के फूल💐💐*
https://chat.whatsapp.com/Ez47QXkDm8o9a4zLl0fa1m
एक बार किसी गांव में एक बडे संत महात्मा का अपने शिष्यो सहित आगमन हुआ। सब इस होड़ में लग गये कि क्या भेंट करें। इधर गाँव में एक गरीब मोची था। उसने देखा कि मेरे घर के बाहर के तालाब में बेमौसम का एक कमल खिला है।
उसकी इच्छा हुई कि, आज नगर में महात्मा आए हैं, सब लोग तो उधर ही गए हैं, आज हमारा काम चलेगा नहीं, आज यह फूल बेचकर ही गुजारा कर लें। वह तालाब के अंदर कीचड़ में घुस गया। कमल के फूल को लेकर आया। केले के पत्ते का दोना बनाया..और उसके अंदर कमल का फूल रख दिया।
https://youtu.be/rDCaRD1g-2M
पानी की कुछ बूंदें कमल पर पड़ी हुई हैं ..और वह बहुत सुंदर दिखाई दे रहा है।
https://youtu.be/rDCaRD1g-2M
इतनी देर में एक सेठ पास आया और आते ही कहा-''क्यों फूल बेचने की इच्छा है ?'' आज हम आपको इसके दो चांदी के रूपए दे सकते हैं।
अब उसने सोचा ...कि एक-दो आने का फूल! इस के दो रुपए दिए जा रहे हैं। वह आश्चर्य में पड़ गया।
इतनी देर में नगर-सेठ आया । उसने कहा ''भई, फूल बहुत अच्छा है, यह फूल हमें दे दो'' हम इसके दस चांदी के सिक्के दे सकते हैं।
मोची ने सोचा, इतना कीमती है यह फूल। नगर सेठ ने मोची को सोच मे पड़े देख कर कहा कि अगर पैसे कम हों, तो ज्यादा दिए जा सकते हैं।
https://youtu.be/rDCaRD1g-2M
मोची ने सोचा-क्या बहुत कीमती है ये फूल?
नगर सेठ ने कहा-मेरी इच्छा है कि मैं महात्मा के चरणों में यह फूल रखूं। इसलिए इसकी कीमत लगाने लगा हूं।
इतनी देर में उस राज्य का मंत्री अपने वाहन पर बैठा हुआ पास आ गया और कहता है- क्या बात है? कैसी भीड़ लगी हुई है*?
अब लोग कुछ बताते इससे पहले ही उसका ध्यान उस फूल की तरफ गया। उसने पूछा- यह फूल बेचोगे?
हम इस के सौ सिक्के दे सकते हैं। क्योंकि महात्मा आए हुए हैं। ये सिक्के तो कोई कीमत नहीं रखते।
जब हम यह फूल लेकर जाएंगे तो सारे गांव में चर्चा तो होगी कि महात्मा ने केवल मंत्री का भेंट किया हुआ ही फूल स्वीकार किया। हमारी बहुत ज्यादा चर्चा होगी।
इसलिए हमारी इच्छा है कि यह फूल हम भेंट करें और कहते हैं कि थोड़ी देर के बाद राजा ने भीड़ को देखा, देखने के बाद वजीर ने पूछा कि बात क्या है? वजीर ने बताया कि फूल का सौदा चल रहा है।
राजा ने देखते ही कहा-इसको हमारी तरफ से एक हजार चांदी के सिक्के भेंट करना। यह फूल हम लेना चाहते हैं।
गरीब मोची ने कहा-लोगे तो तभी जब हम बेचेंगे। हम बेचना ही नहीं चाहते। अब राजा कहता है कि...बेचोगे क्यों नहीं?
उसने कहा कि जब महात्मा के चरणों में सब कुछ-न-कुछ भेंट करने के लिए पहुंच रहे हैं..तो ये फूल इस गरीब की तरफ से आज उनके चरणों में भेंट होगा।
राजा बोला-देख लो, एक हजार चांदी के सिक्कों से तुम्हारी पीढ़ियां तर सकती हैं।
गरीब मोची कहा-मैंने तो आज तक राजाओं की सम्पत्ति से किसी को तरते नहीं देखा लेकिन महान पुरुषों के आशीर्वाद से तो लोगों को जरूर तरते देखा है।
राजा मुस्कुराया और कह उठा-तेरी बात में दम है। तेरी मर्जी, तू ही भेंट कर ले।
अब राजा तो उस उद्यान में चला गया जहां महात्मा ठहरे हुए थे...और बहुत जल्दी चर्चा महात्मा के कानों तक भी पहुंच गई, कि आज कोई आदमी फूल लेकर आ रहा है..
जिसकी कीमत बहुत लगी है। वह गरीब आदमी है इसलिए फूल बेचने निकला था जिससे कि उसका गुजारा होता। जैसे ही वह गरीब मोची फूल लेकर पहुंचा, तो शिष्यों ने महात्मा से कहा कि वह व्यक्ति आ गया है।
लोग एकदम सामने से हट गए। महात्मा ने उसकी तरफ देखा। मोची फूल लेकर जैसे पहुंचा तो उसकी आंखों में से आंसू बरसने लगे। कुछ बूंदे तो पानी की कमल पर पहले से ही थी...कुछ उसके आंसुओं के रूप में ठिठक गई कमल पर।
रोते हुए इसने कहा-सब ने बहुत-बहुत कीमती चीजेें आपके चरणों में भेंट की होंगी, लेकिन इस गरीब के पास यह कमल का फूल और जन्म-जन्मान्तरों के पाप, जो पाप मैंने किए हैं उनके आंसू आंखों में भरे पड़े हैं। उनको आज आपके चरणों में चढ़ाने आया हूं। मेरा ये फूल और मेरे आंसू भी स्वीकार करो।
महात्मा के चरणों में फूल रख दिया। गरीब मोची घुटनों के बल बैठ गया।
संत महात्मा ने अपने शिष्य आनन्द को बुलाया और कहा, देख रहे हो आनन्द! हजारों साल में भी कोई राजा इतना नहीं कमा पाया जितना इस गरीब इन्सान ने आज एक पल में ही कमा लिया।
इसका समर्पण श्रेष्ठ हो गया। इसने अपने मन का भाव दे दिया।
एकमात्र ये मन का भाव ही है जिससे हम ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
उस कृपा के आगे त्रिलोकी का सामान भी कोई अहमियत नहीं रखता।
*💐💐अनपढ़ पत्नी💐💐👇👇*
https://youtu.be/6jB-YXWuDY4
https://youtu.be/7CJETU8RI94
ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।
ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1
*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏





