💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 281 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
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एक गांव में एक धनी मनुष्य रहता था | उसका नाम भैरोमल था | भैरोमल के पास बहुत खेत थे| उसने बहुत से नौकर और मजदूर रख छोड़े थे | भैरोमल बहुत सुस्त और आलसी था | वह कभी अपने खेतों को देखने नहीं जाता था | अपने मजदूर और नौकरों को भेजकर ही वह काम कराता था |
मजदूर और नौकर मनमाना काम करते थे | वे लोग खेत पर तो थोड़ी देर काम करते थे , बाकी घर बैठे रहते थे | इधर-उधर घूमते या गप्पे उड़ाया करते थे ,खेत न तो ठिकाने से जोते जाते थे | न सिंचे जाते थे और न उनमें ठीक से खाद पडती थी | खेतों में बीज भी ठिकाने से नहीं पडते थे और उनकी घास(खरपतवार) तो कोई निकालता ही नहीं था | इसका नतीजा यह हुआ कि उपज धीरे-धीरे घटने लगी | थोड़े दिनों में भैरोमल गरीब होने लगा|
उसी गांव में रामप्रसाद नामक एक दूसरा किसान था | उसके पास खेत नहीं थे | वह भैरोमल के ही कुछ खेत लेकर खेती करता था | किंतु; था ! परिश्रमी | अपने मजदूरों के साथ वह खेत पर जाता था | डटकर परिश्रम करता था उसके खेत भली प्रकार जोते और सींचे जाते थे | अच्छी खाद पडती थी, घास निकाली जाती थी और बीज भी समय पर बोए जाते थे | उसके घर के लोग भी खेत पर काम करते थे | खेत में उपज अच्छी होती थी, लगान देखकर और खर्च करके भी वह बहुत अन्न बचा लेता था | थोड़े दिनों में रामप्रसाद धनी हो गया |
जब भैरोमल बहुत गरीब हो गया | उसके ऊपर महाजनों का ऋण हो गया तो उसे अपने खेत बेचने की आवश्यकता जान पड़ी | यह समाचार पाकर रामप्रसाद उसके पास और बोला – ” मैंने सुना है! कि आप अपने खेत बेचना चाहते हैं | कृपया करके आप मेरे हाथ अपने खेत बेचे मैं दूसरों से कम मुल्य नहीं दूंगा |”
भैरोमल ने आश्चर्य से पूछा – ” भाई रामप्रसाद मेरे पास इतने खेत भी मैं ऋणी हो गया किंतु: तुम्हारे पास धन कहां से आ गया है | तुम तो मेरे थोड़े से खेत लेकर खेती करते हो उन खेतों की लगान भी तुम्हें देनी पड़ती है और घर का भी काम चलाना पड़ता है | मेरे खेत खरीदने के लिए तुम्हें किसने रुपये दिए?
रामप्रसाद ने कहा – ” मुझे रुपए किसी ने नहीं दिए! रुपए तो मैंने खेतों की उपज से ही बचा कर ही इकट्ठे किए हैं | आप की खेती और मेरी खेती में एक अंतर है | आप नौकरों मजदूरों आदि सब से काम करने के लिए जाओ-जाओ कहते हैं | आपकी संपत्ति भी चली गई | मैं मजदूरों और नौकरों से पहले काम करने को तैयार होकर उन्हें अपने साथ काम करने के लिए सदा “आओ” कह कर बुलाता हूं | इससे मेरे यहां संपत्ति आती है |”
अब भैरोमल बात समझ गया | उसने थोड़े से खेत रामप्रसाद के हाथ बेच कर अपना ऋण चुका दिया | और बाकी खेतों में परिश्रमपूर्वक खेती करने लगा | थोड़े ही दिनों में उसकी दशा सुधर गई | वह फिर सुखी और संपन्न हो गया |
*भाग द्वितीय*
https://youtu.be/1Njr7LdNqik
*भाग प्रथम*
https://youtu.be/Pan6xzCWzhw
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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
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आज मेरा बीएससी के पहले साल के इम्तिहान का नतीजा आया था। सभी छात्र पिछले 2 महीने से इस पल का इंतजार कर रहे थे। जैसा सब को यकीन था कि सुषमा क्लास में अव्वल रहेगी, नतीजा वैसा ही था।
सुषमा का नाम पहले नंबर पर था लेकिन दूसरे नंबर का नाम उतना ही ज्यादा चौंकाने वाला और उम्मीद के उलट था। यह नाम था जय का। जय ने अपने 3 साथियों के साथ, जो पिछले 2 सालों से पहले साल में ही फेल हो रहे थे, अपनी इमेज इस तरह की बना ली थी कि कालेज की कोई भी लड़की, चाहे वह सीनियर हो या क्लासमेट, उन का नाम सुन कर ही घबरा जाती थीं।
कालेज में आने के बावजूद जय और उस के वे साथी कभी भी क्लास अटैंड नहीं करते थे। हां, इतना जरूर था, प्रैक्टिकल की क्लास वे कभी मिस नहीं करते थे। वैसे, इस बार जय के तीनों साथी भी पास हो गए थे, पर वे सभी ज्यादा नंबर नहीं लाए थे।
जय का इस तरह दूसरा नंबर पाना किसी के भी गले नहीं उतर पा रहा था, जबकि हकीकत यह थी कि जय ने इस के लिए खूब मेहनत की थी। जय के पिता पास के किसी गांव में रेवैन्यू अफसर थे और वे चाहते थे कि जय को पढ़ाई के लिए बढि़या माहौल मिले जो उस के भविष्य के लिए अच्छा हो। इसी वजह से जय घरपरिवार से अलग रह कर इस छोटे से शहर में पढ़ाई कर रहा था।
जय के घर से आते समय पिता ने उसे कड़े शब्दों में चेतावनी दे रखी थी कि अगर इम्तिहान में अच्छे नंबर नहीं आए तो उसे गांव में रह कर पढ़ाई करनी होगी। जय ने अपना दैनिक कार्यक्रम इस तरह बनाया हुआ था कि वह रात में 12 बजे से 3 बजे तक एकांत में ईमानदारी से पढ़ाई करता था। यही वजह थी कि वह दिनभर आवारागर्दी करने के बाद इतने अच्छे नंबरों से पास हो गया था।
https://youtu.be/c-zIfffqrgE
चूंकि यह बात सभी छात्रों को मालूम नहीं थी, इसी वजह से न सिर्फ क्लासमेट बल्कि टीचिंग स्टाफ भी यही मान रहा था कि या तो जय का कोई रिश्तेदार यूनिवर्सिटी में रसूख वाले पद पर है जिस ने उसे फायदा पहुंचाया है या उस ने जम कर नकल की है।
जय भी इन बातों से अनजान नहीं था, पर उस ने कभी इन बातों पर बवाल नहीं किया था।
रिजल्ट अच्छा आया तो जय के ग्रुप की शरारतें भी बढ़ गईं। अब तो किसी भी लड़की पर फब्तियां कसना, घर तक पीछा करना, साइकिल की हवा निकाल देना, गाडि़यों के सीट कवर फाड़ देना जैसे काम उन के खास शगल बन गए थे।
किसी साधारण छात्र का मामला होता तो प्रिंसिपल तुरंत अपना फैसला सुना देते, पर यहां जय जैसे एक पोजीशन होल्डर का भी नाम जुड़ा हुआ था, इसलिए वे मामले की तह तक जाना चाहते थे।
प्रिंसिपल साहब ने जय समेत चारों छात्रों को मिलने का फरमान जारी कर दिया। जैसी उम्मीद थी चारों में से कोई भी मिलने नहीं पहुंचा। कड़े शब्दों के साथ दोबारा फरमान जारी हुआ। इस बार न आने की दशा में घर पर सूचना भेजने की बात लिखी गई थी।
जय के बाकी तीनों साथी तो तय समय पर प्रिंसिपल के औफिस पहुंच गए, पर जय फिर भी नहीं पहुंचा। तीनों को भविष्य में शरारत न करने की चेतावनी दे कर छोड़ दिया गया।
जय के न आने पर प्रिंसिपल साहब ने खुद तफतीश करने का फैसला लिया। टाइम टेबल के मुताबिक उस समय जय की जंतु विज्ञान की कक्षा चल रही थी। प्रिंसिपल साहब ने देखा कि वह पूरी तल्लीनता से अपने मैटीरियल की पहचान कर के अच्छी ड्राइंग के साथ अपनी कौपी पर उतार रहा था, जबकि ज्यादातर छात्र या तो अपने किसी साथी से या अपने टीचर से पूछ रहे थे।
प्रिंसिपल साहब ने उसे डिस्टर्ब करना मुनासिब नहीं समझा। वे वहीं लैबोरेटरी में बैठ कर कक्षा खत्म होने का इंतजार करने लगे। जब सभी छात्र बाहर जाने लगे तो प्रिंसिपल साहब ने जय को वहीं रोक लिया।
बाहर निकले सभी लोगों में एक ही चर्चा थी कि अब जय को कालेज से बाहर कर दिया जाएगा। लड़कियां खासतौर पर खुश थीं।
जय, मुझे अपनी प्रैक्टिकल कौपी दिखाओ,’’ प्रिंसिपल साहब कुछ कड़े व गंभीर लहजे में बोले
‘‘लीजिए सर,’’ जय कौपी बढ़ाते हुए बोला
चूंकि प्रिंसिपल साहब खुद भी इसी विषय को पढ़ चुके थे, इसलिए उन्हें समझने में जरा भी परेशानी नहीं हुई। उलटे जय की साफसुथरी ड्राइंग और खुद के बनाए नोट्स ने उन को काफी प्रभावित किया। कौपी समय पर चैक भी कराई हुई थी।
यह देख कर प्रिंसिपल साहब खुश भी हो गए, क्योंकि इस तरह के ज्यादातर छात्र साल के आखिर में अपना काम खानापूरी के लिए ही चैक कराते हैं
‘‘2-2 नोटिस देने के बाद भी तुम मिलने नहीं आए. इस का मतलब समझते हो? तुम अपनेआप को बड़ा तीसमारखां समझते हो? जानते हो, तुम्हारे इस काम के लिए तुम्हें कालेज से निकाला भी जा सकता है,’’ प्रिंसिपल साहब सपाट लहजे में बोले
‘‘जी, मैं जानता हूं कि मैंने आप के और्डर को नहीं माना. लेकिन उस के पीछे वजह सिर्फ इतनी थी कि मैं आप को अपनी असलियत का परिचय देना चाहता था,’’ जय नरम लहजे में बोला
‘‘असलियत? कैसी असलियत?’’ प्रिंसिपल साहब ने हैरानी से जय की तरफ देखते हुए पूछा
https://youtu.be/c-zIfffqrgE
‘‘सर, हर साल जन्मदिन पर पिताजी मुझे कुछ न कुछ उपहार देते आए हैं। पिछले साल मेरा 18वां जन्मदिन था। मैं कालेज में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहा था। तब पिताजी ने मुझे समझाया और बताया था कि अब मेरा बचपना खत्म हो चुका है और मुझे गंभीरता से अपने और समाज के बारे में सोचना चाहिए।
‘‘मैं तो हमेशा से ही अच्छा छात्र रहा हूं। इसी वजह से उन्हें मेरे भविष्य की चिंता ज्यादा नहीं थी पर वे चाहते थे कि मैं समाज के लिए कुछ ठोस काम करूं।
ज्यादा नहीं तो कम से कम किसी एक इनसान को तो खुशहाल जिंदगी दे सकूं।
‘‘पिताजी की इस इच्छा को मैं ने व्रत के रूप में लिया और इन 3 साथियों को, जो पिछले 2 सालों से फर्स्ट ईयर में फेल हो रहे थे, को एक मिशन के रूप में लिया।
जाहिर है कि परिवार के साथ रह कर मैं अपने मिशन में कामयाब नहीं हो सकता था, इसीलिए घर से दूर कमरा ले कर यहां रहता हूं। एक दिन में मैं इन की आदतें नहीं बदल सकता था, इसीलिए इन्हीं के रंग में रंग कर इन्हें सुधारने की कोशिशें शुरू कर दीं।
‘‘मैं ने कुछ कहावतों को अपने मिशन का आधार बनाया, जैसे अगर नाले की सफाई करनी हो तो गंदगी में उतरना ही पड़ता है या लोहे को लोहा काटता है।
नतीजा आप के सामने है।
‘‘सर, जो 3 लोग पिछले 2 सालों से फेल हो रहे थे, इस बार संतोषजनक ढंग से पास हो गए हैं। उन लोगों जैसा बनने के लिए मुझे थ्योरी की क्लासें छोड़नी पड़ती हैं। उन तीनों को यह बात मालूम नहीं है कि मैं इस तरह के किसी मिशन पर हूं।
जहां तक लड़कियों को छेड़ने या परेशान करने की बात है तो 2 साल पहले तक ये तीनों किसी भी लड़की का दुपट्टा खींच कर भाग जाने, पैन से स्याही छिड़क कर उन के कपड़े खराब करने या धक्कामुक्की करने जैसे काम कर के खुश होते थे, पर अब धीरेधीरे उन लोगों के स्वभाव में बदलाव आ रहा है।
https://youtu.be/c-zIfffqrgE
अब उन की आदतें कमैंट्स पास करने तक ही सिमट गई हैं और मुझे यकीन है कि कालेज से पास आउट होने पर वे भी दूसरे छात्रों की तरह इज्जत के साथ ही जाएंगे। तीनों की अच्छी नौकरी लग जाने तक मेरा काम पूरा नहीं होगा इसलिए इन तीनों का साथ मैं कतई नहीं छोड़ सकता"
प्रिंसिपल साहब और उन के साथ बैठे टीचरों में से किसी को भी इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी।
‘‘बहुत अच्छा जय…’’ प्रिंसिपल साहब खड़े हो कर उस का कंधा थपथपाते हुए बोले, ‘‘मुझे अपने रिटायर होने के बाद भी इस बात का गर्व रहेगा कि मैं एक ऐसे कालेज का प्रिंसिपल था जहां तालीम न सिर्फ अच्छा आदमी बनने को कहती थी, बल्कि अच्छे आदमी के जरीए अच्छा इनसान भी बनाती थी।
‘‘मैं तुम्हें और तुम्हारे पूरे ग्रुप को शुभकामनाएं देता हूं। मुझे भविष्य के नतीजे जानने की उत्सुकता रहेगी.’’
साथ बैठे दोनों टीचरों ने भी सहमति और सम्मान में सिर हिलाया
आज तकरीबन 6 साल बाद जय प्रिंसिपल साहब के घर जा रहा था। वैसे, प्रिंसिपल साहब बीचबीच में बुला कर जय से रिपोर्ट लेते रहते थे पर पिछले 4 सालों से मतलब रिटायरमैंट के बाद से उन का कोई संपर्क नहीं था
डोरबैल बजाने पर प्रिंसिपल साहब ने ही दरवाजा खोला.
‘‘सर, मैं जय,’’ कहते हुए उस ने झुक कर प्रिंसिपल साहब के पैर छू लिए
‘‘अरे, तुम्हें परिचय देने की क्या जरूरत है। क्या मैं तुम्हें पहचानता नहीं और सुनाओ, कैसे आना हुआ? और तुम्हारा मिशन कितना कामयाब हुआ?’’ प्रिंसिपल साहब ने अपनेपन से आशीर्वाद देते हुए पूछा
‘‘सर, आप के आशीर्वाद से मैं अपने मिशन में पूरी तरह से कामयाब रहा हूं। उन तीनों में से जो शारीरिक गठन में सब से अच्छा था, उसे वन विभाग में सहायक वन विस्तार अधिकारी के पद पर नौकरी मिल गई है।
दूसरा शिक्षा विभाग में मिडिल स्कूल में टीचर बन गया है और तीसरे ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना में कर्ज ले कर एक छोटी सी फैक्टरी खोल ली है और अब कुछ लोगों को रोजगार भी दे रहा है।
‘‘मैं ने खुद एमएससी अव्वल नंबर से पास की है। राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा व साक्षात्कार पास करने के बाद आज मेरा चयन डिप्टी कलक्टर के रूप में हो गया है, इसीलिए मैं आप का आशीर्वाद लेने आया हूं’’
जिंदगीभर लैक्चर देने वाले प्रिंसिपल साहब के पास आज शब्दों का अकाल पड़ गया था। वे सिर्फ गर्व के साथ जय के सिर पर हाथ फेर रहे थे।
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दुनिया के सबसे धनवान व्यक्ति बिल गेट्स से किसी ने पूछा- "क्या इस धरती पर आप से भी अधिक अमीर कोई है?" बिल गेट्स ने जवाब दिया हां एक व्यक्ति इस दुनिया में मुझसे भी अमीर है। कौन!!!!
बिल गेट्स ने बताया- जब मेरी प्रसिद्धि के दिन नहीं थे, एक सुबह न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर मैंने एक अखबार लेना चाहा पर खुले पैसे नहीं थे, लड़के ने भाप लिया और अखबार देते हुए कहा- यह मैं आपको मुफ्त में देता हूं... बात आई-गई हो गई... संयोगवश कोई तीन माह बाद उसी एयरपोर्ट पर मैं फिर उतरा और अखबार के लिए फिर मेरे पास सिक्के नहीं थे। उस लड़के ने मुझे फिर से अखबार दिया। कोई 19 साल बाद और कारोबार स्थापित हो जाने के बाद एक दिन मुझे उस लड़के की याद आई। कोई डेढ़ महीने की खोजबीन के बाद आखिरकार वह मिल गया। मैंने पूछा- क्या तुम मुझे पहचानते हो? लड़का हां आप मि. बिल गेट्स हैं। गेट्स- याद है, कभी तुमने मुझे फ्री में अखबार दिए थे? लड़का- जी हां, बिल्कुल... ऐसा दो बार हुआ था... गेट्स- मैं उनकी कीमत अदा करना चाहता हूं... बताओ, मैं तुम्हारी हर जरूरत पूरी करूंगा... लड़का- सर, लेकिन फिर भी आप मेरे काम की कीमत अदा नहीं कर पाएंगे... गेट्स- क्यूं...!!! लड़का- मैंने जब आपकी मदद की थी, मैं एक गरीब लड़का था, जो अखबार बेचता था... आज आप मेरी मदद तब कर रहे है,जब आप दुनियां के सबसे अमीर व्यक्ति हैं...फिर, आज आप मेरी मदद की बराबरी कैसे करेंगे...!!!
बिल गेट्स एक लम्हा स्तब्ध रह गए, उनकी नजर में, वह व्यक्ति दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति से भी अमीर था, क्योंकि किसी की मदद करने के लिए, उसने अपने अमीर होने का इंतजार नहीं किया था।
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हम किसी के काम आने के लिए अवसर या पुकारे जाने का रास्ता देखते हैं। या हम उस दिन का इंतजार करते रहते हैं कि जब हम बहुत अमीर हो जाएंगे और किसी के काम आएंगे। यह सोचते-देखते ही जीवन की शाम हो जाती है। बीमार धीरुभाई अंबानी का अंतिम समय चल रहा था, पत्रकारों ने पूछा आप शून्य से शिखर तक आए, किसी बात का अफसोस तो नहीं... उन्होंने जवाब दिया, हाँ मैं जीवन भर कमाने में लगा रहा, बांटना छूट गया।
हमारे रिश्तेदारों, दोस्त, कर्मचारियों में अनेक हैं जो स्वाभिमान के चलते लाख तकलीफ उठा लेते हैं, कभी जिक्र नहीं करते। हम उनके पुकारे जाने का रास्ता देखते रहते हैं। न वे मांग पाते हैं, ना हम आगे बढ़ कर देते हैं। प्रभु से यही प्रार्थना है कि हमें बिल गेट्स जितनी दौलत ना दे पर उस पेपर बेचने वाले लड़के के दिल की अमीरी जरूर दे।
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*भाग चतुर्थ*
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एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है ,परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ ,कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो ,हर तरफ निराशा और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ को पढ़ना ,उससे पहले नहीं!
राजा ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया !एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल मे गया! एक शेर का पीछा करते करते राजा अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा की सीमा मे प्रवेश कर गया,घना जंगल और सांझ का समय , तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई, राजा आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे! बहुत दूर तक भागने पर भी राजा उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया ! भूख प्यास से बेहाल राजा को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी ,उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया ! और सांस रोक कर बैठ गया , दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी ! दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा को अपना अंत नजर आने लगा ,उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे ! वो जिंदगी से निराश हो ही गया था , की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू की बात याद आ गई !उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा ! उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा “
राजा को अचानक ही जैसे घोर अन्धकार मे एक ज्योति की किरण दिखी , डूबते को जैसे कोई सहारा मिला ! उसे अचानक अपनी आत्मा मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ ! उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा ,फिर मे क्यों चिंतित होऊं ! अपने प्रभु और अपने पर विश्वासरख उसने स्वयं से कहा की हाँ ,यह भी कट जाएगा !
और हुआ भी यही ,दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज पास आते आते दूर जाने लगी ,कुछ समय बाद वहां शांति छा गई ! राजा रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया !
दोस्तों,यह सिर्फ किसी राजा की कहानी नहीं है यह हम सब की कहानी है !हम सभी परिस्थिति,काम ,तनाव के दवाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है ,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है ,कोई रास्ता ,समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता ,लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम ,है ना?
जब ऐसा हो तो २ मिनट शांति से बेठिये ,थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये ! अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये –यह भी कट जाएगा ! आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा , और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे ! आजमाया हुआ है ! बहुत कारगर है !
आशा है जैसे यह सूत्र मेरे जीवन मे मुझे प्रेरणा देता है ,आपके जीवन मे भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा !
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*भाग 5*
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एक गांव के पास एक खेत में सारस पक्षी का एक जोड़ा रहता था | वहीं उनके अंडे थे | अंडे बड़े और समय पर उनसे बच्चे निकले | लेकिन बच्चों के बड़े होकर उड़ने योग्य होने से पहले ही खेत की फसल पक गयी | सारस बड़ी चिंता में पड़े किसान खेत काटने आवे, इससे पहले ही बच्चों के साथ उसे वहां से चले जाना चाहिए और बच्चे उड़ सकते नहीं थे | सारस ने बच्चों से कहा -” हमारे न रहने पर यदि कोई खेत में आवे तो उसकी बात सुनकर याद रखना |”
एक दिन जब सारस चारा लेकर शाम को बच्चों के पास लौटा तो बच्चों ने कहा – ” आज किसान आया था | वह खेत के चारों ओर घूमता रहा एक दो स्थानों पर खड़े होकर देर तक खेत को घूरता था | वह कहता था, कि खेत अब काटने के योग्य हो गया है | आज चलकर गांव के लोगों से कहूंगा कि वह मेरा खेत कटवा दें |”
सारस ने कहा – ” तुम लोग डरो मत! खेत अभी नहीं कटेगा अभी खेत कटने में देर है |”
कई दिन बाद जब एक दिन सारस शाम को बच्चों के पास आए तो बच्चे बहुत घबराए थे- ” वे कहने लगे | अब हम लोगों को यह खेत झटपट छोड़ देना चाहिए | आज किसान फिर आया था, वह कहता था, कि गांव के लोग बड़े स्वार्थी हैं | वह मेरा खेत कटवाने का कोई प्रबंध नहीं करते | कल मैं अपने भाइयों को भेजकर खेत कटवा लूंगा |
सारस बच्चों के पास निश्चिंत होकर बैठा और बोला – ” अभी तो खेत कटता नहीं दो-चार दिन में तुम लोग ठीक-ठीक उड़ने लगोगे अभी डरने की आवश्यकता नहीं है |”
कई दिन और बीत गए सारस के बच्चे उड़ने लगे थे और निर्भय हो गए थे| एक दिन शाम को सारस से वे कहने लगे – ” यह किसान हम लोगों को झूठ-मूठ डराता है | इसका खेत तो कटेगा नहीं, वह आज भी आया था | और कहता था | कि मेरे भाई मेरी बात नहीं सुनते सब बहाना करते हैं | मेरी फसल का अन्न सुखकर झर रहा है | कल बड़े सवेरे में आऊंगा और खेत काट लूंगा |
सारस घबराकर बोला – ” चलो जल्दी करो ! अभी अंधेरा नहीं हुआ है | दूसरे स्थान पर उड़ चलो | कल खेत अवश्य कट जाएगा |
बच्चे बोले – ” क्यों ? इस बार खेत कट जाएगा यह कैसे ?”
सारस ने कहा – ” किसान जब तक गांव वालों और भाइयों के भरोसे था | खेत के कटने की आशा नहीं थी | जो दूसरों के भरोसे कोई काम छोड़ता है | उसका काम नहीं होता, लेकिन जो सवयं काम करने को तैयार होता है | उसका काम रुका नहीं रहता | किसान जब सवयं कल खेत काटने वाला है, तब तो खेत कटेगा ही |”
अपने बच्चों के साथ सारस उसी समय वहां से उड़कर दूसरे स्थान पर चला गया ।
मित्रों जो दूसरों के भरोसे कोई काम छोड़ता है ।उसका काम नहीं होता, लेकिन जो सवयं काम करने को तैयार होता है ।उसका काम रुका नहीं रहता ।
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*भाग 6*
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