*🥀१५ जुलाई २०२३ शनिवार🥀*
*❗//➖प्रथम श्रावण➖//❗*
*🌚कृष्णपक्ष त्रयोदशी २०८०🌚*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
*‼ऋषि चिंतन‼*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
*सफलता की जननी "संकल्प शक्ति"*
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
👉 *"यह मेरा संकल्प है।" इसका अर्थ है कि अब मैं इस कार्य में प्राण, मन और समग्र शक्ति के साथ संलग्न हो रहा हूँ।* इस प्रकार की विचारणा- दृढ़ता ही सफलता की जननी है। संकल्प तप का, क्रियाशक्ति का विधायक है। इसी में अनेक सिद्धियाँ और वरदान समाहित हैं।
👉 *जिन विचारों का मनोभूमि में स्थायी प्रभाव पड़ता है और जिनसे अंत:करण में अमिट छाप पड़ती है, वे पुनरावृत्ति के कारण स्वभाव के एक अंग बन जाते हैं।* ऐसे विचारों का अपना एक विशेष महत्त्व होता है। इन विचारों को क्रमबद्ध रीति से सजाने की क्रिया जिन्हें ज्ञात होती है, *वे अपना भाग्य, दृष्टिकोण और वातावरण परिवर्तित कर सकते हैं और इस परिवर्तन के फलस्वरूप जीवन में कोई विशेष दृश्य या स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं।*
👉 आवश्यकता को आविष्कार की जननी कहा जाता है। जब किसी बात की तीव्र इच्छा होती है, तो उसे पूर्ण करने के लिए साधनों की तलाश आरंभ होती है, अतः कोई-न-कोई उपाय भी
निकल ही आता है। वह इच्छा यदि प्रेरक है, उसे पूरा करने की भूख यदि भीतर से उठी है और उसके पीछे प्राण और जीवन लगा हुआ है कि *"मैं इस वस्तु को प्राप्त करके रहूँगा, चाहे कितनी ही बाधाएँ क्यों न आएँ। प्रयत्न निरंतर जारी रखूँगा, चाहे कितने ही निराश करने वाले अवसर क्यों न आएँ"* इस प्रकार के संकल्प की यदि मन में गहरी और सुदृढ़ स्थापना हो जाए तो लक्ष्य तक पहुँचना बहुत सरल हो जाता है। *दूसरे के लिए कठिन जान पड़ने वाला कार्य भी संकल्पवान के लिए सामान्य क्रिया से अधिक नहीं रह जाता।* बराबर आगे बढ़ते रहने के लिए बराबर नई शक्ति प्राप्त करते रहना भी आवश्यक है। उन्नति का क्रम टूटना नहीं चाहिए, आगे बढ़ने से रुकना या हिचकिचाना नहीं चाहिए, पर यह तभी संभव है, *जब हमारा संकल्प, हमारा उद्देश्य अटूट साहस, श्रद्धा एवं शक्ति से ओत-प्रोत हो।* आधे मन से, उदासीन होकर कार्य करने वाला फूहड़ कहा जाता है। उसे कोई विशेष सफलता मिल ही नहीं पाती।
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
*सफल जीवन की दिशा-धारा पृष्ठ-१७*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
https://youtu.be/KRW-iokdyE0
🌺 ऋषि चिंतन से 172 🌺 Rishi chintan se 172🌺
*🥀१६ जुलाई २०२३ रविवार🥀*
*❗//➖प्रथम श्रावण➖//❗*
*🌚कृष्णपक्ष चतुर्दशी २०८०🌚*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
*‼ऋषि चिंतन‼*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
*➖❗प्रबल इच्छाशक्ति❗➖*
*➖एक विलक्षण जीवन तत्त्व➖*
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
👉 *हमें आशा और उत्साह मन में रखकर सुंदर-से- भविष्य की कल्पना करनी चाहिए।* अभी से परेशानी में पड़ने की बात ही क्यों सोचें ? *नदी की तरह ही वह मनुष्य भी अपनी सफलता के लिए मार्ग निकाल ही लेता है, जिसकी "इच्छाशक्ति" दृढ़ और बलवती होती है।* उसकी इच्छा स्वयं ही उसका मार्ग प्रदर्शित करती चलती है। *सफलता का मूल मनुष्य की "इच्छाशक्ति" में सन्निहित रहता है।* मानवीय शक्तियों में उसकी इच्छाशक्ति सबसे प्रबल और प्रमुख होती है। जिन मनुष्यों की इच्छाशक्ति निर्बल होती है, वे साधन संपन्न होने पर भी कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं प्राप्त कर पाते। निर्बल इच्छाशक्ति वाले लोग मार्ग में आई एक साधारण-सी कठिनाई अथवा सामान्य विरोध को देखकर हिम्मत खो बैठते हैं।
👉 *मनुष्य की वास्तविक शक्ति उसकी "इच्छाशक्ति" ही है, क्योंकि यही जीवन के चिह्न, कर्म की विधायिका तथा प्रेरिका होती है।* जहाँ इच्छा नहीं, वहाँ कर्म नहीं और जहाँ इच्छा है, वहाँ कर्मों का होना अनिवार्य है। इच्छा की प्रेरणा से ही मनुष्य कर्मों में प्रवृत्त होता है। यदि उसमें इच्छा की स्फुरणा नहीं, उसकी प्रेरणा न हो तो मनुष्य भी जड़ बनकर पड़ा रहे। *आदिकाल से मनुष्य अब तक जो विकास और उन्नति करता आया है, वह सब "इच्छाशक्ति" का ही चमत्कार है।* इच्छाशक्ति की निर्बलता मनुष्य के समग्र जीवन की निर्बलता है। जहाँ कमजोर और कायर मन वाले लोग रहते हैं, वहाँ प्रायः भय और आशंका का वातावरण बना रहता है। वे औरों को भी निर्बल और हतोत्साह बना देते हैं।
👉 *प्रबल "इच्छाशक्ति" वाला जिस काम में हाथ डालता है, उसे तब तक नहीं छोड़ता जब तक पूरा नहीं कर लेता।* वह बाधाओं, विरोधों से साहसपूर्वक लड़ता हुआ बढ़ता रहता है। उन्नति और सफलता का इसके सिवाय और कोई उपाय नहीं है। *संसार की सारी सफलताओं का मूल मंत्र है-प्रबल "इच्छाशक्ति" ।* इसी के बल पर विद्या, संपत्ति और साधनों का उपार्जन होता है। *यही वह सम्मोहन और वशीकरण मंत्र है, जिसके बल पर एक अकेला पुरुष कोटि-कोटि जन-गण को अपना अनुयायी बना लेता है।* जीवन में उन्नति और सफलता की आकांक्षा करने से पहले अपनी इच्छाशक्ति को प्रबल तथा प्रखर बना लेने वालों को न कभी असफल होना पड़ता है और न निराश। सदिच्छावान व्यक्ति में आशा, उत्साह, साहस और सक्रियता की कमी नहीं रहती और जिसमें इन सफलतावाहक गुणों का समावेश होगा, असफलता उसके पास आ ही नहीं सकती। असद् इच्छाएँ जहाँ अपने विषैले प्रभाव से मनुष्य की शक्ति का नाश करती हैं, वहाँ सदिच्छाएँ उनमें नवीन स्फूर्ति, नया उत्साह और अभिनव आशा का संचार किया करती हैं।
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
*सफल जीवन की दिशा-धारा पृष्ठ-२३*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
https://youtu.be/KRW-iokdyE0
*🥀१७ जुलाई २०२३ सोमवार🥀*
*❗//➖प्रथम श्रावण➖//❗*
*🌚कृष्णपक्ष अमावस्या २०८०🌚*
*👉आज.................*
*🌳➖हरियाली अमावस्या➖🌳* है
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
*‼ऋषि चिंतन‼*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
*समय संपदा का सदुपयोग कीजिए*
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
👉 *मनुष्य के पास ईश्वर प्रदत्त पूँजी है - "समय"।* *"समय"* संसार की सबसे मूल्यवान संपदा है। यह वह मूल्यवान संपत्ति है, जिसकी कीमत पर संसार की कोई भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। *समय का सदुपयोग करने वाले व्यक्ति कभी भी असफल नहीं हो सकते।* कहते हैं कि परिश्रम से ही सफलता मिलती है, किंतु परिश्रम का अर्थ भी समय का सदुपयोग ही है।
👉 *मनुष्य कितना ही परिश्रमी क्यों न हो, अपने परिश्रम के साथ "समय" का सामंजस्य नहीं करेगा तो निश्चय ही उसका श्रम या तो निष्फल चला जाएगा अथवा अपेक्षित फल न दिला सकेगा।* किसान परिश्रमी है, किंतु यदि वह अपने श्रम को समय पर काम में नहीं लाता तो वह अपने परिश्रम का पूरा लाभ नहीं उठा सकता। असमय बोया हुआ बीज बेकार चला जाता है। असमय जोता खेत अपनी उर्वरता प्रकट नहीं कर पाता। असमय काटी फसल नष्ट हो जाती है। निश्चित समय पर न किया हुआ कितना भी परिश्रम काम में सफलता नहीं देता।
👉 प्रकृति का प्रत्येक कार्य एक निश्चित समय पर नियमित होता है। समय पर ग्रीष्म, समय पर वर्षा, समय पर सरदी और समय पर ही वसंत आकर वनस्पतियों को फूलों से सजा देता है। प्रकृति के इस क्रम में जरा-सा भी व्यवधान पड़ जाने से न जाने कितनी परेशानियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। *"समय-पालन" ईश्वरीय नियमों में सबसे महत्त्वपूर्ण एवं प्रमुख नियम है ।*
👉 *मनुष्य का "समय", मनोयोग एवं परिश्रमपूर्वक किसी दिशा में भी लग जाए, उसी में चमत्कार उत्पन्न हो जाएगा।* संसार के महापुरुषों की प्रधान विशेषता यही रही है कि उन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण निरंतर काम में लगाए रखा है। वह भी पूरी दिलचस्पी और श्रमशीलता के साथ। यह रीति-नीति जो आदमी अपना ले और अपने जीवन-क्रम की दिशा निर्धारित कर ले, वह हर क्षेत्र में सफलता की ऊँची मंजिल पर सहज ही पहुँच सकता है। मनुष्य की सामर्थ्य का अंत नहीं, पर कठिनाई इतनी ही है कि वह चारों तरफ बिखरी और अस्त-व्यस्त पड़ी रहती है। उसका एकीकरण, केंद्रीकरण जो व्यक्ति कर लेगा, अपनी प्रचुर शक्ति का परिचय सहज ही दे सकेगा।
👉 योजनाबद्ध कार्य-निर्धारण करने और उसका तत्परतापूर्वक निर्वाह करने से ही विज्ञजन अनेकानेक सफलताएँ अर्जित करते हैं। *"समय" ईश्वर-प्रदत्त संपदा है, उसे श्रम में मनोयोगपूर्वक नियोजित करके विभिन्न प्रकार की संपदाएँ, विभूतियाँ अर्जित की जा सकती हैं।* जो समय गँवाता है, उसे जीवन गँवाने वाला कहा जाता है। कौन कितने दिन जिया, इसका लेखा-जोखा जन्मदिन से लेकर मरणपर्यंत के दिन गिनकर नहीं, वरन इस आधार पर लगाया जाना चाहिए कि किसने अपने समय का उपयोग महत्त्वपूर्ण प्रयोजनों के लिए किया। *"समय" के सच्चे पुजारी एक क्षण भी नष्ट नहीं होने देते, अपने एक- एक क्षण को हीरे-मोतियों से तोलने लायक बनाकर उसका सदुपयोग करते हैं और सफल और श्रेयाधिकारी महामानव बनते हैं ।*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
*सफल जीवन की दिशा-धारा पृष्ठ-३१*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
https://youtu.be/1TBAMOnb2sA
*🥀१८ जुलाई २०२३ मंगलवार🥀*
*‼️〰️अधिकमास〰️‼️*
*☘️➖प्रथम श्रावण➖☘️*
*🌛शुक्लपक्ष प्रतिपदा २०८०🌜*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
*‼ऋषि चिंतन‼*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
*"समय" का नन्हा क्षण भी व्यर्थ न जाए*
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
👉 *जीवन का हर क्षण एक उज्ज्वल भविष्य लेकर आता है।* कोई भी घड़ी एक महान मोड़ का समय हो सकती है। *मनुष्य यह निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता कि जिस "समय", जिस "क्षण" और जिस "पल" को वह यों ही व्यर्थ खो रहा है, वह ही "क्षण", वह ही "समय" उसके भाग्योदय का "समय" नहीं है ?* क्या पता जिस क्षण को हम व्यर्थ समझकर बरबाद कर रहे हैं, वह ही हमारे लिए अपनी झोली में सुंदर सौभाग्य की सफलता लाया हो ।
👉 *सबके जीवन में एक परिवर्तनकारी "समय" आया करता है।* किंतु मनुष्य उसके आगमन से अनभिज्ञ रहा करता है। *इसीलिए हर बुद्धिमान मनुष्य हर "क्षण" को बहुमूल्य समझकर व्यर्थ नहीं जाने देता।* कोई भी क्षण व्यर्थ न जाने देने से निश्चय ही वह क्षण हाथ से छूटकर नहीं जा सकता जो जीवन में वांछित परिवर्तन का संदेशवाहक होगा। *आलसी अथवा दीर्घसूत्री व्यक्ति बहुधा किसी उपयुक्त अवसर की प्रतीक्षा करते-करते ही सारी जिंदगी खो देते हैं और उन्हें कभी भी उपयुक्त अवसर नहीं मिल पाता।* प्रमाद के मद में वह यह नहीं सोच पाता कि जीवन का प्रत्येक क्षण एक स्वर्ण अवसर है, जो यों ही चुपचाप आता और चला जाता है। जब तक उस क्षण का सदुपयोग करके परखा नहीं जाएगा तब तक निश्चयपूर्वक यह कैसे कहा जा सकता है कि अमुक समय उपयुक्त अवसर नहीं है।
👉 *हर मनुष्य को "समय" के छोटे-से-छोटे क्षण का मूल्य एवं महत्त्व समझना चाहिए।* जीवन का समय सीमित है और काम बहुत है। *समय की चूक पश्चात्ताप की हूक बन जाती है।* जीवन में कुछ करने की इच्छा रखने वालों को चाहिए कि वे अपने किसी भी काम को भूलकर भी कल पर न टालें। *जो आज किया जाना चाहिए, उसे आज ही करें।* आज के काम के लिए आज का ही दिन निश्चित है और कल के काम के लिए कल का दिन निर्धारित है। *आज का काम कल पर टाल देने से कल के काम का भार दो गुना हो जाएगा जो निश्चय ही कल के समय में पूरा नहीं हो सकता।* इस प्रकार आज का कल पर और कल का परसों पर ठेला हुआ काम इतना बढ़ जाएगा कि वह फिर किसी भी प्रकार पूरा नहीं किया जा सकता। जिस स्थगनशील स्वभाव तथा दीर्घसूत्री मनोवृत्ति ने आज का काम आज नहीं करने दिया, वह कल करने देगी ऐसा नहीं माना जा सकता। स्थगन-स्थगन को और क्रिया-क्रिया को प्रोत्साहित करती है। यह प्रकृति का एक निश्चित नियम है। कल के काम का दबाव काम को बेगार बना देता है, जो रो-झींककर ही पूरा होता है। ऐसा होने से अभ्यास बिगड़ता है और उसका विकृत प्रभाव नए काम पर भी पड़ता है। इस प्रकार स्थगनशीलता कार्य में मनुष्य की रुचि तथा दक्षता को नष्ट कर देती है। इन दोनों विशेषताओं से रहित कर्त्तव्य-परिश्रम का भरपूर मूल्य पाकर भी अपेक्षित पुरस्कार एवं पारितोषिक नहीं दिला पाते।
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
*सफल जीवन की दिशा-धारा पृष्ठ-३४*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
https://youtu.be/oTRU5Gwj0V4
*🥀१९ जुलाई २०२३ बुधवार🥀*
*❗//➖अधिकमास➖//❗*
*〰️🍀 प्रथम श्रावण🍀〰️*
*🌜शुक्लपक्ष द्वितीया २०८०🌛*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
*‼ऋषि चिंतन‼*
➖➖➖➖‼️➖➖➖➖
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
*➖नियमितता की आदत➖*
*सफलता का सुनिश्चित राजमार्ग*
〰️〰️〰️➖🌹➖〰️〰️〰️
👉 *मानवी प्रगति के मार्ग में अत्यंत छोटी किंतु अत्यंत भयानक बाधा है- "अनियमितता की आदत"।* आमतौर से लोग अस्त-व्यस्त पाए जाते हैं। हवा के झोकों के साथ उड़ते रहने वाले पत्तों की तरह कभी इधर कभी उधर फुदकते रहते हैं। निश्चित दिशा न होने से परिश्रम और समय बेतरह बरबाद होता रहता है। *धीमी चाल से चलने की स्वल्प क्षमता रखते हुए भी सतत प्रयत्न से कछुए ने बाजी जीती थी और बेतरतीब उछलने-भटकने वाला खरगोश अधिक क्षमता संपन्न होते हुए भी पराजित घोषित किया गया था।* सामर्थ्य का जितना महत्त्व है, उससे अधिक महत्ता इस बात की है कि जो कुछ उपलब्ध है, उसी को योजनाबद्ध रूप से, नियत क्रम व्यवस्था अपनाकर सदुद्देश्य के लिए नियोजित किया जाए। जो ऐसा कर पाते हैं, वे ही क्रमिक विकास के राजमार्ग पर चलते हुए उन्नति के उच्च शिखर तक पहुँचते हैं। जो इस ओर ध्यान नहीं देते, उन्हें योग्यता एवं सुविधा के रहते हुए भी पिछड़ी परिस्थितियों में पड़े रहना पड़ता है। *जबकि सुनियोजित जीवनचर्या बना सकने वाले एक के बाद दूसरी सीढ़ी पर चढ़ते हुए वहाँ पहुँचते हैं, जहाँ साथियों के साथ तुलना करने पर प्रतीत होता है कि कदाचित किसी देव-दानव ने ही ऐसा चमत्कार प्रस्तुत किया हो, पर वास्तविकता इतनी है कि प्रगतिशील ने नियमितता अपनाई।* अपने समय, श्रम और चिंतन को एक दिशा विशेष में संकल्पपूर्वक नियोजित रखा। इसके विपरीत दुर्भाग्य का पश्चात्ताप उन्हें सहन करना पड़ता है जो लंबी योजना बनाकर उस पर निश्चयपूर्वक चलते रहना तो दूर अपनी दिनचर्या बनाने की आवश्यकता नहीं समझते और बहुमूल्य समय को ऐसे ही आलस्य प्रमाद की अस्त-व्यस्तता में गँवाते रहते हैं। कहते हैं कि लक्ष्य और क्रम बनाकर चलने वाली चींटी पर्वत शिखर पर जा पहुँचती है, जबकि प्रमादी गरुड़ ऐसे ही जहाँ-तह पंख फड़फड़ाता और बीट करता दिन गुजारता है।
👉 *अच्छी बातों में सर्वप्रथम मानने योग्य है-"नियमितता" । समय और कार्य की संगति बिठाकर योजनाबद्ध दिनचर्या बनाने और उस पर आरूढ़ रहने का नाम "नियमितता" है।* उसके बन पड़ते ही चिंतन करने के लिए एक दिशा मिलती है। व्यवस्थित कार्यक्रम बनाकर चलने से शरीर को संलग्न रहने की इच्छा रहती तथा प्रवीणता मिलती है। *फलत: सूझबूझ के साथ निश्चित किया गया कार्यक्रम सरलता और सफलतापूर्वक संपन्न होता चला जाता है।*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
*सफल जीवन की दिशा-धारा पृष्ठ-४१*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
➖➖➖➖🪴➖➖➖➖
https://youtu.be/bhgzInwUj-8
