💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 81 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐शांति💐💐*
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एक राजा था जिसे पेटिंग्स से बहुत प्यार था. एक बार उसने घोषणा की कि जो कोई भी उसे एक ऐसी पेंटिंग बना कर देगा जो शांति को दर्शाती हो तो वह उसे मुंह माँगा इनाम देगा।
फैसले के दिन एक से बढ़ कर एक चित्रकार इनाम जीतने की लालच में अपनी-अपनी पेंटिंग्स लेकर राजा के महल पहुंचे।
राजा ने एक-एक करके सभी पेंटिंग्स देखीं और उनमे से दो को अलग रखवा दिया।
अब इन्ही दोनों में से एक को इनाम के लिए चुना जाना था।
पहली पेंटिंग एक अति सुन्दर शांत झील की थी. उस झील का पानी इतना साफ़ था कि उसके अन्दर की सतह तक नज़र आ रही थी. और उसके आस-पास मौजूद हिमखंडों की छवि उस पर ऐसे उभर रही थी मानो कोई दर्पण रखा हो. ऊपर की और नीला आसमान था जिसमे रुई के गोलों के सामान सफ़ेद बादल तैर रहे थे।
जो कोई भी इस पेटिंग को देखता उसको यही लगता कि शांति को दर्शाने के लिए इससे अच्छी पेंटिंग हो ही नहीं सकती
दूसरी पेंटिंग में भी पहाड़ थे, पर वे बिलकुल रूखे, बेजान , वीरान थे और इन पहाड़ों के ऊपर घने गरजते बादल थे जिनमे बिजलियाँ चमक रही थीं…घनघोर वर्षा होने से नदी उफान पर थी… तेज हवाओं से पेड़ हिल रहे थे… और पहाड़ी के एक ओर स्थित झरने ने रौद्र रूप धारण कर रखा था।
जो कोई भी इस पेटिंग को देखता यही सोचता कि भला इसका “शांति” से क्या लेना देना… इसमें तो बस अशांति ही अशांति है।
सभी आश्वस्त थे कि पहली पेंटिंग बनाने वाले चित्रकार को ही इनाम मिलेगा।तभी राजा अपने सिंघासन से उठे और ऐलान किया कि दूसरी पेंटिंग बनाने वाले चित्रकार को वह मुंह माँगा इनाम देंगे।
हर कोई आश्चर्य में था!
पहले चित्रकार से रहा नहीं गया, वह बोला, “लेकिन महाराज उस पेटिंग में ऐसा क्या है जो आपने उसे इनाम देने का फैसला लिया… जबकि हर कोई यही कह रहा है कि मेरी पेंटिंग ही शांति को दर्शाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है?”
“आओ मेरे साथ!”, राजा ने पहले चित्रकार को अपने साथ चलने के लिए कहा।
दूसरी पेंटिंग के समक्ष पहुँच कर राजा बोले, “झरने के बायीं ओर हवा से एक तरह झुके इस वृक्ष को देखो…देखो इसकी डाली पर बने इस घोसले को देखो… देखो कैसे एक चिड़िया इतनी कोमलता से, इतने शांत भाव व प्रेम से पूर्ण होकर अपने बच्चों को भोजन करा रही है…।”
फिर राजा ने वहां उपस्थित सभी लोगों को समझाया-
“ शांत होने का मतलब ये नही है कि आप ऐसे स्थिति में हों जहाँ कोई शोर नहीं हो…कोई समस्या नहीं हो… जहाँ कड़ी मेहनत नहीं हो… जहाँ आपकी परीक्षा नहीं हो… शांत होने का सही अर्थ है कि आप हर तरह की अव्यवस्था, अशांति, अराजकता के बीच हों और फिर भी आप शांत रहें, अपने काम पर केन्द्रित रहें… अपने लक्ष्य की और अग्रसित रहें।
अब सभी समझ चुके थे कि दूसरी पेंटिंग को राजा ने क्यों चुना है।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, हर कोई अपनी जिदंगी में शान्ति चाहता है. पर अक्सर हम “शांति” को कोई बाहरी वस्तु समझ लेते हैं, और उसे दूरस्थ और विस्तारित छुटियों में ढूंढते हैं। जबकि शांति पूरी तरह से हमारे अन्दर की चीज है, और सत्य यही है कि तमाम दुःख-दर्दों, तकलीफों और दिक्कतों के बीच भी शांत रहना ही असल में शांत होना है।
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 82 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐मजबूत रिश्ते का रहस्य💐💐*
अमन एक शांत स्वभाव का लड़का था।वह किराये के एक छोटे से घर में अपनी पत्नी आरती के साथ रहता था.
पिछले तीन साल से वह एक मल्टीनेशनल कम्पनी में काम कर रहा था और अभी तक एक बार भी उसकी सैलरी नहीं बढ़ी थी. वह बार-बार सोचता कि बॉस से पगार बढाने के बारे में कहूँ पर हर बार संकोच वश वह कुछ कह नहीं पाता था।
लेकिन एक दिन उसने निश्चय किया कि आज मैं बॉस से ज़रूर इस बारे में बात करूँगा. आरती ने भी अमन की हिम्मत बढ़ाई और हाथ में लंच थमाते हुए all the best कहा।
ऑफिस पहुँच कर अमन ने सही मौका देखते हुए बॉस से अपने दिल की बात कह डाली।
बॉस मुस्कुराते हुए बोले, “बिलकुल अमन, कुछ दिन पहले हुई मीटिंग में ही हमने तय कर लिया था कि इस बार तुम्हे 30% की हाइक दी जायेगी… हम तुम्हे इस बारे में बताने ही वाले थे…. कम्पनी तुम्हारी लॉयल्टी और परफॉरमेंस से खुश है और अगले महीने से तुम्हे बढ़ी हुई तनख्वाह मिलने लगेगी.”
अमन को यकीन ही नहीं हुआ कि इतनी आसानी से उसकी बात मान ली गयी है. उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. ऑफिस ख़त्म होते ही यह खुशखबरी सुनाने के लिए वह आरती के मनपसंद रसगुल्ले खरीद कर घर के लिए निकला।
आरती भी आज अमन के इंतज़ार में आँखें बिछाई बैठी थी. दूर से ही देखकर वह समझ गयी कि अमन को सैलरी हाइक मिल चुकी है. वह अमन का वेलकम करने के लिए दरवाजे पर खड़ी हो गयी।
अमन गेट से अन्दर घुसा. आरती एक सुन्दर साड़ी पहने तैयार खड़ी थी… पूरा घर भीनी-भीनी खुश्बू में नहा रहा था…. डिनर टेबल पर क्रॉकरी का नया सेट लगा हुआ था और बीच में एक कैंडल जल रही थी. खाने में हर वो चीज बनी हुई थी जो अमन को बेहद पसंद है….और इन सबके बीच में एक सुन्दर सा कार्ड रखा हुआ था.
अमन ने कार्ड उठाया और पढना शुरू किया-
डिअर अमन, मुझे पता था कि जो तुम चाहते हो वही होगा… तुम्हारी इस ख़ुशी में आज मैं सबसे ज्यादा खुश हूँ…ये खुश्बू…ये नया क्रॉकरी सेट…ये डिशेज …ये कैंडल… ये सबकुछ तुम्हे यही बताने के लिए हैं कि मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ. I love you so much.
यह पढ़ कर अमन मुस्कुराया और अपनी वाइफ को गले से लगा लिया.
“मैं अभी तुम्हारा मुंह मीठा कराता हूँ.”, यह कहते हुए अमन किचन से प्लेट लाने के लिए बढ़ा.
लेकिन ये क्या…किचन की शेल्फ पर भी ठीक वैसा ही कार्ड पड़ा था जैसा उसने अभी-अभी पढ़ा था.
अमन ने फ़ौरन कार्ड उठाया, और पढ़ने लगा-
डिअर अमन,
क्या हुआ जो तुम्हारी सैलरी नहीं बढ़ी…कोई बात नहीं! मुझे पता है तुम्हारी वैल्यू इन छोटी-मोटी हाइक्स से कहीं ज्यादा है… ये खुश्बू…ये नया क्रॉकरी सेट…ये डिशेज …ये कैंडल… ये सबकुछ तुम्हे यही बताने के लिए हैं कि मैं तुमसे कितना प्यार करती हू।
अमन की आँखों में आंसू थे, उसे पता चल चुका था कि उसके लिए आरती का प्यार उसकी सफलता या असफलता पर निर्भर नहीं करता… आज अमन का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ चुका था… अब वह अपनी पगार बढ़ने से कहीं ज्यादा इस बात से खुश था कि उसके पास कोई ऐसा है जो उसे किसी भी परिस्थिति में अपना सकता है।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, लोगों को हमारे प्रेम, विश्वास, और सपोर्ट की ज़रुरत तब सबसे ज्यादा होती है जब वे किसी बुरे दौर से गुजर रहे हों. लेकिन अक्सर हम उनके उपलब्धि में तो शामिल होते हैं पर नाकामी में मदद करने के लिए उन्हें अकेला छोड़ देते हैं।
अगर हमारे पास एक भी ऐसा शख्स है जो हमें हर हाल में स्वीकार करता है तो हम इस दुनिया को सहजता से कर सकते हैं और कठिन से कठिन मंज़िल को पा सकते हैं. और जानते हैं उस शख्स को पाने का सबसे आसान तरीका क्या है….वो है खुद किसी और के लिए ऐसा शख्स बनना. इसलिए लाइफ में कुछ ऐसे रिश्ते ज़रूर बनाइये जिन्हें आप totally accept और unconditionally support करने को तैयार हों और आप पायेंगे कि आपके पास भी कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें सिर्फ और सिर्फ आपसे लेना-देना है आपकी सफलता-असफलता से नहीं! और यही एक मजबूत रिश्ते का रहस्य है!
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 83 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐बच्चों की सही परवरिश💐💐*
शहर से कुछ दूरी पर बसे एक मोहल्ले में रुचिका अपने हस्बैंड के साथ रहती थी. उसके ठीक बगल में एक बुजर्ग व्यक्ति अकेले ही रहा करते थे, जिन्हें सभी “दादा जी” कह कर बुलाते थे।
एक बार मोहल्ले में एक पौधे वाला आया. उसके पास कई किस्म के खूबसूरत, हरे-भरे पौधे थे।
रुचिका और दादाजी ने बिलकुल एक तरह का पौधा खरीदा और अपनी-अपनी क्यारी में लगा दिया. रुचिका पौधे का बहुत ध्यान रखती थी. दिन में तीन बार पानी डालना, समय-समय पर खाद देना और हर तरह के कीटनाशक का प्रयोग कर वह कोशश करती की उसका पौधा ही सबसे अच्छा ढंग से बड़ा हो।
दूसरी तरफ दादा जी भी अपने पौधे का ख़याल रख रहे थे, पर रुचिका के तुलना में वे थोड़े बेपरवाह थे… दिन में बस एक या दो बार ही पानी डालते, खाद डालने और कीटनाशक के प्रयोग में भी वे ढीले थे।
समय बीता. दोनों पौधे बड़े हुए।
रुचिका का पौधा हरा-भरा और बेहद खूबसूरत था. दूसरी तरफ दादा जी का पौधा अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में नहीं आ पाया था।
यह देखकर रुचिका मन ही मन पौधों के विषय में अपनी जानकारी और देखभाल करने की लगन को लेकर गर्व महसूस करती थी।
फिर एक रात अचानक ही मौसम बिगड़ गया. हवाएं तूफ़ान का रूप लेने लगीं…बादल गरजने लगे… और रात भर आंधी-तूफ़ान और बारिश का खेल चलता रहा।
सुबह जब मौसम शांत हुआ तो रुचिका और दादा जी लगभग एक साथ ही अपने अपने पौधों के पास पहुंचे. पर ये क्या ? रुचिका का पौधा जमीन से उखड़ चुका था, जबकि दादा जी का पौधा बस एक ओर जरा सा झुका भर था।
“ऐसा क्यों हुआ दादाजी, हम दोनों के पौधे बिलकुल एक तरह के थे, बल्कि आपसे अधिक तो मैंने अपने पौधे की देख-भाल की थी… फिर आपका पौधा प्रकृति की इस चोट को झेल कैसे गया जबकि मेरा पौधा धराशायी हो गया?”, रुचिका ने घबराहट और दुःख भरे शब्दों में प्रश्न किया।
इस पर दादाजी बोले, “देखो बेटा, तुमने पौधे को उसके ज़रुरत की हर एक चीज प्रचुरता में दी… इसलिए उसे अपनी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए कभी खुद कुछ नहीं करना पड़ा… न उसे पानी तलाशने के लिए अपनी जड़ें जमीन में भीतर तक गाड़नी पड़ीं, ना कीट-पतंगों से बचने के लिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता पैदा करनी पड़ी…नतीजा ये हुआ कि तुम्हारा पौदा बाहर से खूबसूरत, हरा-भरा दिखाई पड़ रहा था पर वह अन्दर से कमजोर था और इसी वजह से वह कल रात के तूफ़ान को झेल नहीं पाया और उखड़ कर एक तरफ गिर गया।
जबकि मैंने अपने पौधे की बस इतनी देख-भाल की कि वह जीवित रहे इसलिए मेरे पौधे ने खुद को ज़िंदा रखने के लिए अपनी जडें गहरी जमा लीं और अपनी प्रतिरोधक क्षमता को भी विकसित कर लिया और आसानी से प्रकृति के इस प्रहार को झेल गया।”
रुचिका अब अपनी गलती समझ चुकी थी पर अब वह पछताने के सिवा और कुछ नहीं कर सकती थी।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों, आज कल परिवार छोटे होने लगे हैं। अधिकतर जोड़ें 2 या सिर्फ 1 ही बच्चा कर रहे हैं. ऐसे में माता-पिता बच्चों का रख रखाव करने में उन्हें इतना कर दे रहे हैं कि बच्चे को खुद करने और संघर्ष करने का मौका ही नहीं मिल रहा। वे भावनात्मक और शारिरिक मजबूत बनने की जगह कमजोर बन जा रहे हैं।
बच्चों को पालना और पौधों की देखभाल करने में काफी समानतायें हैं… ऐसे ही छोड़ देने पर बच्चे और प्लांट्स दोनों बिगड़ जाते हैं और ज़रुरत से अधिक रख रखाव करने पर वे कमजोर हो जाते हैं… इसलिए बतौर अभिभावक ज़रुरी है कि हम एक सही अंतराल के साथ अपने बच्चों को पाले-पोसें और सही परवरिश दें ताकि वे उस पौधे की तरह बनें जो मुसीबतों के आने पर गिरें नहीं बल्कि अपना सीना चौड़ा कर उनका सामना कर सके।
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 84 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐न माया मिली न राम💐💐*
किसी गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम हीरा था और दूसरे का मोती. दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे बचपन से ही खेलना-कूदना, पढना-लिखना हर काम साथ करते आ रहे थे।
जब वे बड़े हुए तो उनपर काम-धंधा ढूँढने का दबाव आने लगा. लोग ताने मारने लगे कि दोनों निठल्ले हैं और एक पैसा भी नही कमाते।
एक दिन दोनों ने विचार-विमर्श कर के शहर की ओर जाने का फैसला किया. अपने घर से रास्ते का खाना पीना ले कर दोनों भोर होते ही शहर की ओर चल पड़े।
शहर का रास्ता एक घने जंगल से हो कर गुजरता था. दोनों एक साथ अपनी मंजिल की ओर चले जा रहे थे. रास्ता लम्बा था सो उन्होंने एक पेड़ के नीचे विश्राम करने का फैसला किया. दोनों दोस्त विश्राम करने बैठे ही थे की इतने में एक साधु वहां पर भागता हुआ आया. साधु तेजी से हांफ रहा था और बेहद डरा हुआ था।
मोती ने साधु से उसके डरने का कारण पूछा।
साधु ने बताय कि-आगे के रास्ते में एक डायन है और उसे हरा कर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है, मेरी मानो तुम दोनों यहीं से वापस लौट जाओ।
इतना कह कर साधु अपने रास्ते को लौट गया।
हीरा और मोती साधु की बातों को सुन कर असमंजस में पड़ गए. दोनों आगे जाने से डर रहे थे। दोनों के मन में घर लौटने जाने का विचार आया, लेकिन लोगों के ताने सुनने के डर से उन्होंने आगे बढ़ने का निश्चेय किया।
आगे का रास्ता और भी घना था और वे दोनों बहुत डरे हुए भी थे. कुछ दूर और चलने के बाद उन्हें एक बड़ा सा थैला पड़ा हुआ दिखाई दिया. दोनों दोस्त डरते हुए उस थैले के पास पहुंचे।
उसके अन्दर उन्हें कुछ चमकता हुआ नज़र आया. खोल कर देखा तो उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही न रहा. उस थैले में बहुत सारे सोने के सिक्के थे. सिक्के इतने अधिक थे कि दोनों की ज़िंदगी आसानी से पूरे ऐश-ओ-आराम से कट सकती थी. दोनों ख़ुशी से झूम रहे थे, उन्हें अपने आगे बढ़ने के फैसले पर गर्व हो रहा था।
साथ ही वे उस साधु का मजाक उड़ा रहे थे कि वह कितना मूर्ख था जो आगे जाने से डर गया।
अब दोनों दोस्तों ने आपस में धन बांटने और साथ ही भोजन करने का निश्चेय किया।
दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गए. हीरा ने मोती से कहा कि वह आस-पास के किसी कुएं से पानी लेकर आये, ताकि भोजन आराम से किया जा सके।मोती पानी लेने के लिए चल पड़ा।
मोती रास्ते में चलते-चलते सोच रहा था कि अगर वो सारे सिक्के उसके हो जाएं तो वो और उसका परिवार हमेशा राजा की तरह रहेगा. मोती के मन में लालच आ चुका था।
वह अपने दोस्त को जान से मर डालने की योजना बनाने लगा. पानी भरते समय उसे कुंए के पास उसे एक धारदार हथियार मिला।उसने सोचा की वो इस हथियार से अपने दोस्त को मार देगा और गाँव में कहेगा की रास्ते में डाकुओं ने उन पर हमला किया था. मोती मन ही मन अपनी योजना पर खुश हो रहा था।
वह पानी लेकर वापस पहुंचा और मौका देखते ही हीरा पर पीछे से वार कर दिया. देखते-देखते हीरा वहीं ढेर हो गया।
मोती अपना सामान और सोने के सिक्कों से भरा थैला लेकर वहां से वापस भागा।
कुछ एक घंटे चलने के बाद वह एक जगह रुका। दोपहर हो चुकी थी और उसे बड़ी जोर की भूख लग आई थी. उसने अपनी पोटली खोली और बड़े चाव से खाना-खाने लगा।
लेकिन ये क्या ? थोड़ा खाना खाते ही मोती के मुँह से खून आने आने लगा और वो तड़पने लगा।
उसे एहसास हो चुका था कि जब वह पानी लेने गया था तभी हीरा ने उसके खाने में कोई जहरीली जंगली बूटी मिला दी थी. कुछ ही देर में उसकी भी तड़प-तड़प कर मृत्यु हो गयी।
अब दोनों दोस्त मृत पड़े थे और वो थैला यानी माया रूपी डायन जस का तस पड़ा हुआ था।
जी हाँ दोस्तों उस साधु ने एकदम ठीक कहा था कि आगे डायन है. वो सिक्कों से भरा थैला उन दोनों दोस्तों के लिए डायन ही साबित हुआ. ना वो डायन रूपी थैला वहां होता न उनके मन में लालच आता और ना वे एक दूसरे की जाना लेते।
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों! यही जीवन का सच भी है. हम माया यानी धन-दौलत-सम्पदा एकत्रित करने में इतना उलझ जाते हैं कि अपने रिश्ते-नातों तक को भुला देते हैं. माया रूपी डायन आज हर घर में बैठी है. इसी माया के चक्कर में इंसान हैवान बन बैठा है. हमें इस प्रेरक कहानी से ये सीख लेनी चाहिए की हमें कभी भी पैसे को ज़रुरत से अधिक महत्त्व नहीं देना चाहिए और अपनी दोस्ती… अपने रिश्तों के बीच में इसको कभी नहीं लाना चाहिए.
और हमारे पूर्वज भी तो कह गए हैं-
माया के चक्कर में दोनों गए, न माया मिली न राम
इसलिए हमें हमेशा माया के लोभ व धन के लालच से बचना चाहिए और ज्यादा ना सही पर कुछ समय भगवान् की अराधना में ज़रूर लगाना चाहिए।
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*💐💐परमात्मा हर जगह मौजूद है💐💐*
एक प्रसिद्ध साधवी हुई हैं! जवानी में वह बहुत ही खूबसूरत थी।
एक बार चोर उसे उठाकर ले गए और एक वेश्या के कोठे पर ले जाकर उसे बेच दिया।
अब उसे वही कार्य करना था जो वहाँ की बाक़ी औरतें करती थी।
इस नए घर में पहली रात को उसके पास एक आदमी लाया गया। उसने तुरन्त बातचीत शुरू कर दी।
"आप जैसे भले आदमी को देखकर मेरा दिल बहुत खुश है" वह बोली।
आप सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ जायें , मैं थोड़ी देर परमात्मा की याद में बैठ लूँ।
अगर आप चाहें तो आप भी परमात्मा की याद में बैठ जाएँ।
यह सुनकर उस नौजवान की हैरानी की कोई हद न रही। वह भी उस औरत के साथ धरती पर ही बैठ गया।
फिर वह उठी और बोली मुझे विश्वास है कि अगर मैं आपको याद दिला दूँ कि
एक दिन हम सबको मरना है तो आप बुरा नहीं मानोगे।
आप यह भी भली भाँति समझ लें की जो पाप करने का आपके मन में चाह है, वह आपको नर्क की आग में धकेल देगा।
अब आप स्वयं ही फैसला कर लें कि आप यह पाप करके नर्क की आग में कूदना चाहते हैं, या इससे बचना चाहते हैं?
यह सुनकर नौजवान हक्का बक्का रह गया।उसने संभलकर कहा,
ऐ पवित्र औरत! तुमने तो मेरी आँखे खोल दी, जो अभी तक पाप के भयंकर नतीजे की तरफ से बंद थी मै वचन देता हूँ कि फिर कभी कोठे की तरफ कदम नही बढ़ाऊंगा।
हर रोज नए आदमी उस औरत के पास भेजे जाते। पहले दिन आये नौजवान की तरह उन सबकी जिंदगी भी पलटती गयी।
उस कोठे के मालिक को बहुत हैरानी हुई की इतनी खूबसूरत और नौजवान औरत है और एक बार आया ग्राहक दोबारा उसके पास जाने के लिए नही आता।
जबकि लोग ऐसी सुन्दर लड़कियों के दीवाने होकर उसके इर्दगिर्द घूमते है।
यह राज जानने के लिए उसने एक रात अपनी पत्नी को ऐसी जगह छुपाकर बिठा दिया, जहां से वह उस औरत के कमरे के अंदर सब कुछ देख सकती थी।
वह यह जानना चाहता था की जब कोई आदमी उस औरत के पास भेजा जाता है तो वह उसके साथ कैसे पेश आती है?
उस रात उसने देखा कि जैसे ही ग्राहक ने अंदर कदम रखा, औरत उठकर खड़ी हो गई और बोली,आओ भले आदमी, आपका स्वागत है।
पाप के इस घर में मुझे हमेशा याद रहता है कि परमात्मा हर जगह मौजूद है।
वह सब कुछ देखता है और जो चाहे कर सकता है।आपका इस बारे में क्या ख्याल है ?
यह सुनकर वह आदमी हक्का बक्का रह गया
और उसे कुछ समझ न आया कि क्या करे क्या कहे ?
आखिर वह कुछ हिचकिचाते हुए बोला, हाँ पंडित और मौलवी भी कुछ ऐसा ही कहते हैं।
वह कहती चली गई, 'यहाँ पाप से घिरे इस घर में, मैं कभी नही भूलती कि परमात्मा सब पाप देखता है और पूरा न्याय भी करता है।
वह हर इंसान को उसके पापों की सजा जरूर देता है। जो लोग यहाँ आकर पाप करते हैं, उसकी सजा पाते हैं।
उन्हें अनगिनत दुःख और मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं।
मेरे भाई, हमें मनुष्य जन्म मिला है, भजन, बंदगी करने के लिए दुनिया के दुखों से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिये, परमात्मा से मुलाकात करने के लिए, न की जानवरों से भी बदतर बनकर उसे बर्बाद करने के लिए।
पहले आये लोगों की तरह इस आदमी को भी उस औरत की बातों में छुपी सच्चाई का अहसास हो गया।
उसे जिंदगी में पहली बार महसूस हुआ की वह कितने घोर पाप करता रहा है और आज फिर करने जा रहा था।वह फूटफूट कर रोने लगा और औरत के पाव पर गिरकर क्षमा मांगने लगा।
औरत के शब्द इतने सहज, निष्कपट और दिल को छू लेने वाले थे कि उस कोठे के मालिक की पत्नी भी बाहर आकर अपने पापो का पश्चाताप करने लगी।
फिर उसने कहा ऐ पवित्र लड़की, तुम तो वास्तव में साधु हो। हमने कितना बड़ा पाप तुम पर लादना चाहा।
इसी वक्त इस पाप की दलदल से बाहर निकल जाओ। इस घटना ने उसकी अपनी जिंदगी को भी एक नया मोड़ दे दिया और उसने पाप की कमाई हमेशा के लिए छोड़ दी।
*💐💐शिक्षा💐💐*
ईश्वर के सच्चे भक्त जहां कहीं भी हों, जिस हालात में हो, वे हमेशा मनुष्य जन्म के असली उद्देश्य की ओर इशारा करते हैं और भूले भटके जीवों को नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह औरत कोई और नहीं महान साधु राबिया बसरी थीं।
इसलिए हमें हमेशा माया के लोभ से बचना चाहिए और ज्यादा ना सही पर कुछ समय भगवान् की अराधना में ज़रूर लगाना चाहिए।
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