प्रेरणादायक कहानियां भाग 20 prernadayak kahaniyan part 20





💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  96  💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*



*💐💐विचित्र आशीर्वाद💐💐*

एक समय आदरणीय गुरु नानक देव यात्रा करते हुए नास्तिक विचारधारा रखने वाले लोगों के गाँव पहुंचे. वहां बसे लोगों नें गुरु नानाक देव और उनके शिष्यों का आदर
सत्कार नहीं किया, उन्हें कटु वचन बोले और तिरस्कार किया. इतना सब होने के बाद भी, जाते समय ठिठोली लेते हुए, उन्होंने गुरु नानक देव से आशीर्वाद देने को कहा।

जिस पर नानक देव नें मुस्कुराते हुए कहा “आबाद रहो”

भ्रमण करते हुए, कुछ समय बाद गुरु नानक और उनके शिष्य एक दूसरे गाँव , समीप्रस्थ ग्राम जा पहुंचे. इस गाँव के लोग नेक, दयालु और प्रभु में आस्था रखने वाले थे.

उन्होंने बड़े भाव से सभी का स्वागत सत्कार किया और जाते समय गुरु नानक देव से आशीर्वाद देने की प्रार्थना की. तब गुरु नानक देव नें कहा “उजड़ जाओ\” इतना बोल कर वह आगे बढ़ गए. तब उनके शिष्य भी गुरु के पीछे पीछे चलने लगे।


आगे चल कर उनमें से एक शिष्य खुद को रोक नहीं सका और बोला. है ‘देव’ आप नें तिरस्कार करने वाले उद्दंड मनुष्यों को आबाद रहने का आशीर्वाद दिया और सदाचारी
शालीन लोगों को उजड़ जाने का कठोर आशीर्वाद क्यों दिया?

तब गुरु नानक देव हँसते हुए बोले-

सज्जन लोग उजड़ने पर जहाँ भी जायेंगे वहां अपनी सज्जनता से उत्तम वातावरण का निर्माण करेंगे. परंतु दुष्ट और दुर्जन व्यक्ति जहाँ विचरण करेगा वहां, अपने आचार-विचार से वातावरण दूषित करेगा. इस प्रयोजन से मैंने उन्हें वहीँ आबाद रहने का आशीर्वाद दिया।

अपने गुरु की ऐसी तर्कपूर्ण बात से वह शिष्य संतुष्ट हुआ और वह सब अपने मार्ग पर आगे बढ़ गए।



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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  97  💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐असली ख़ुशी💐💐*


नीलेश और कमल दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे। पर दोनों के स्वभाव में बहुत अंतर था। जहां कमल शांत स्वभाव का था, वहीं नीलेश को हर समय कोई ना कोई शरारत सूझते रहती थी। पढ़ाई में उसका मन ही नहीं लगता था। वहीँ कमल पढ़ाई में अव्वल था। शिक्षक के हर सवालों का जवाब वह फट्ट से दे देता था। नीलेश को इसी चीज की तकलीफ थी। खुद पढ़ाई में ध्यान ना लगा कर कमल के हर क्रियाकलापों की कॉपी करना ही उसका काम था। कैसे उसे पीछे धकेले और नीचा दिखाए, बस इसी चक्कर में वह हमेशा लगा रहता था। इन सबके बीच में इसका सबसे बुरा असर उसकी खुद की पढ़ाई पर पड़ रहा था।

इसी तरह एक बार लंच टाइम में जब कमल थोड़ी देर के लिए कक्षा से बाहर गया तो नीलेश ने उसके स्कूल बैग से विज्ञान की कॉपी चुरा ली। ताकि जब शिक्षक उससे कुछ पूछे तो वह जवाब देने की स्थिति में ना हो। हुआ भी वही शिक्षक की खूब डांट पड़ी कमल को। निलेश तो मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।

हर समय नीलेश मौके की ताक में रहता कि कैसे कमल को परेशान करें। एक तरह से वह कमल की वजह से हीन भावना का शिकार भी होते जा रहा था। उसे लगता था कि वह कभी पढ़ाई नहीं कर पाएगा। कभी कमल का पेन गायब कर देता तो कभी लंच बॉक्स में खाना ही नहीं रहता। कमल को परेशान देखकर उसे बड़ी खुशी होती थी। धीरे-धीरे उसकी शरारत और हीन भावना दोनों ही बढ़ने लगे। क्लास के दूसरे बदमाश लड़कों से भी उसकी दोस्ती हो गई थी जो उसे हर समय उकसाते रहते थे ।

नीलेश की एक दोस्त थी रितिका जिसकी हर बात वह मानता था। नीलेश की हरकतों को देखकर रितिका को बड़ी तकलीफ हो रही थी, उसने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, पर वह हीन भावना का ऐसा शिकार हुआ था कि निकल ही नहीं पा रहा था।

देखते-देखते परीक्षाएं नजदीक आ गयीं। निलेश की पूरी कोशिश थी कि इस बार कमल को पहले रैंक पर नहीं आने देगा। अचानक कुछ उड़ती हुई खबर मिली उसे। उसके कुछ उद्दंड दोस्तों ने एग्जाम के पेपर चुरा लिए और नीलेश को दे दिया। नीलेश की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। अब तो इस बार वह अव्वल आकर ही रहेगा। परीक्षाएं खत्म हो गई और कुछ दिन के बाद रिजल्ट भी आ गया। अपनी कक्षा में वह सबसे अव्वल था। उसने कमल की तरफ विजयी मुस्कान से देखा। आज उसने कमल को पीछे छोड़ दिया था। कमल को अपने कम नंबरों से थोड़ी निराशा जरूर थी पर वह हारा नहीं था। उसने नीलेश को उसके सफलता पर बहुत बधाई दी और उसे गले लगा लिया।


नीलेश असमंजस में पड़ गया, क्या करे क्या ना करे, अपने स्वभाव पर रोए या कमल की अच्छाई पर खुश हो। जिस लड़के को उसने परेशानी के सिवा कुछ ना दिया था, आज वही उसे उसकी सफलता पर बधाई दे रहा था। पल भर में ही उसकी जीत की खुशी काफूर हो गई और आईने की तरह उसके कारनामे सामने दिखने लगे।

बेईमानी से लायी गयी रैंक पर उसे अब बड़ी शर्मिंदा हो रही थी, सामने रखे अच्छे अंक भी उसे बार-बार उसकी गलतियों का एहसास करा रहे थे। उसकी आंखों के कोरों से शर्मिंदगी के आंसू बहने लगे और अपनी गलतियों को सुधारने का मौका सूझने लगा। उसने मन में ठान लिया कि वह कमल से अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगेगा और शिक्षक के सामने अपनी चोरी भी कुबूल करेगा, चाहे उसे स्कूल से निकलना ही क्यों ना पड़े।

तभी सर ने आवाज दी, “नीलेश यहाँ आओ, तुम्हारी क्लास में फर्स्ट रैंक आई है, मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, बताओ तुमने ये सफलता कैसे हासिल की?”

नीलेश बड़ा असमंजस में था, समझ में ही नहीं आ रहा था कि हंसे या रोए। सामपेपर ने मार्कशीट पड़ी हुई थी, जिसमें हर विषयों में उसे सबसे अधिक नंबर मिले थे पर उसे वह खुशी नहीं मिल पा रही थी जो अच्छे अंक मिलने पर होती है।

नीलेश दबे क़दमों से ब्लैक बोर्ड के सामने पहुंचा-

“सर, फर्स्ट रैंक मेरी नहीं कमल की आई है, मैं आप सभी से माफ़ी मांगता हूँ… मैंने चीटिंग की है, कमल को नीचा दिखाने के लिए मैंने पेपर आउट करा दिया था।

सर, आप इसकी जो चाहे वो सजा मुझे दे सकते हैं। कमल, I am really sorry! मैंने हमेशा तुम्हे परेशान करता रहा पर आज तुमने ही मुझे गले लगा कर बधायी दी।”

और ये कहते-कहते नीलेश की आँखों में आँसू आ गए।

क्लास के सबसे शरारती बच्चे को इस तरह टूटता देख सभी भावुक हो गए, रितिका और कमल फ़ौरन उसके पास पहुंचे और उसका हाथ थाम लिया।

स्कूल मैनेजमेंट ने भी नीलेश का पश्चाताप बेकार नहीं जाने दिया और पुनः परीक्षा ले उसे पास कर दिया।

अब नीलेश समझ चुका था कि बेईमानी से पायी गयी सफलता कभी ख़ुशी नहीं दे सकती, असली ख़ुशी ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चल कर ही पायी जा सकती है।


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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  98  💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐लालच का फल💐💐*


किसी गांव में एक गड़रिया रहता था। वह लालची स्वभाव का था, हमेशा यही सोचा करता था कि किस प्रकार वह गांव में सबसे अमीर हो जाये। उसके पास कुछ बकरियां और उनके बच्चे थे। जो उसकी जीविका के साधन थे।

एक बार वह गांव से दूर जंगल के पास पहाड़ी पर अपनी बकरियों को चराने ले गया। अच्छी घास ढूँढने के चक्कर में आज वो एक नए रास्ते पर निकल पड़ा। अभी वह कुछ ही दूर आगे बढ़ा था कि तभी अचानक तेज बारिश होने लगी और तूफानी हवाएं चलने लगीं। तूफान से बचने के लिए गड़रिया कोई सुरक्षित स्थान ढूँढने लगा। उसे कुछ ऊँचाई पर एक गुफा दिखाई दी। गड़रिया बकरियों को वहीँ बाँध उस जगह का जायजा लेने पहुंचा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं। वहां बहुत सारी जंगली भेड़ें मौजूद थीं।

मोटी- तगड़ी भेड़ों को देखकर गड़रिये को लालच आ गया। उसने सोचा कि अगर ये भेड़ें मेरी हो जाएं तो मैं गांव में सबसे अमीर हो जाऊंगा। इतनी अच्छी और इतनी ज्यादा भेड़ें तो आस-पास के कई गाँवों में किसी के पास नहीं हैं।

उसने मन ही मन सोचा कि मौका अच्छा है मैं कुछ ही देर में इन्हें बहला-फुसलाकर अपना बना लूंगा। फिर इन्हें साथ लेकर गांव चला जाऊंगा।


यही सोचते हुए वह वापस नीचे उतरा। बारिश में भीगती अपनी दुबली-पतली कमजोर बकरियों को देखकर उसने सोचा कि अब जब मेरे पास इतनी सारी हट्टी-कट्टी भेडें हैं तो मुझे इन बकरियों की क्या ज़रुरत उसने फ़ौरन बकरियों को खोल दिया और बारिश में भीगने की परवाह किये बगैर कुछ रस्सियों की मदद से घास का एक बड़ा गट्ठर तैयार कर लिया।

गट्ठर लेकर वह एक बार फिर गुफा में पहुंचा और काफी देर तक उन भेड़ों को अपने हाथ से हरी-हरी घास खिलाता रहा। जब तूफान थम गया, तो वह बाहर निकला। उसने देखा कि उसकी सारी बकरियां उस स्थान से कहीं और जा चुकी थीं।

गड़ेरिये को इन बकरियों के जाने का कोई अफ़सोस नहीं था, बल्कि वह खुश था कि आज उसे मुफ्त में एक साथ इतनी अच्छी भेडें मिल गयी हैं। यही सोचते-सोचते वह वापस गुफा की ओर मुड़ा लेकिन ये क्या… बारिश थमते ही भेडें वहां से निकल कर दूसरी तरफ जान लगीं। वह तेजी से दौड़कर उनके पास पहुंचा और उन्हें अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। पर भेडें बहुत थीं, वह अकेला उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकता था… कुछ ही देर में सारी भेडें उसकी आँखों से ओझल हो गयीं।

यह सब देख गड़रिये को गुस्सा आ गया। उसने चिल्लाकर बोला 

तुम्हारे लिए मैंने अपनी बकरियों को बारिश में बाहर छोड़ दिया। इतनी मेहनत से घास काट कर खिलाई… और तुम सब मुझे छोड़ कर चली गयी… सचमुच कितनी स्वार्थी हो तुम सब।

गड़रिया बदहवास होकर वहीं बैठ गया। गुस्सा शांत होने पर उसे समझ आ गया कि दरअसल स्वार्थी वो भेडें नहीं बल्कि वो खुद है, जिसने भेड़ों की लालच में आकर अपनी बकरियां भी खो दीं।

*💐💐शिक्षा💐💐*


लोभ का फल नामक यह कहानी हमें सिखाती है कि जो व्यक्ति स्वार्थ और लोभ में फंसकर अपनों का साथ छोड़ता है, उसका कोई अपना नहीं बनता और अंत में उसे पछताना ही पड़ता है।


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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  99  💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐बेटे पर मुकदमा💐💐*


एक बाप अदालत में दाखिल हुआ।ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।

 जज साहब ने पूछा,आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है।बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्च मांगना चाहता हू। 

जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। 
इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है।
आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए।

बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है। 
लेकिन फिर भी मुझे हर महीना, अपने बेटे से खर्चा लेना चाहता हू। 
वो चाहे कम का ही क्यों न हो।

जज साहब आश्चर्यचकित होकर,
 बाप से कहने लगा, 
आप इतने मालदार हो, 
तो आपको बेटे से क्यों पैसे की क्या आवश्यकता है। 

बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा,  
की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे।तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा।

जब बेटा अदालत में आया,तो जज साहब ने बेटे से कहा की आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं, चाहे वह कम क्यों न हो। 

बेटा भी जज साहब की बात सुनकर,आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा कि मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पैसे की भला क्या जरूरत है। 

जज साहब ने कहा,यह आपके पिता की मांग है और वह अपने में स्वतंत्र है।पिता ने जज साहब से कहा की आप मेरे बेटे से कहिए की वह मुझे हर महीना 100 रूपए देगा और वो भी अपने हाथों से और उस पैसे में बिल्कुल भी देरी न करेगा। 

फिर जज साहब ने बूढ़े आदमी के बेटे से कहा की तुम हर महीने 100 रूपए, बिना देरी के उनके हाथों में दोगे।

ये आपको अदालत हुक्म देती है। 


मुकदमा खत्म होने के बाद,
 जज साहब बूढ़े आदमी को अपने पास बुलाते हैं।

उन्होंने बूढ़े आदमी से पूछा की, अगर आप बुरा न मानें, तो मैं आप से एक बात पूछूंगा।
आपने बेटे के खिलाफ यह मुकदमा क्यों किया, आप तो बहुत अमीर आदमी हो और ये इतनी छोटी सी कीमत। 
बूढ़े आदमी ने रोते हुए कहा:जज साहब मैं अपने बेटे का चेहरा देखने के लिए तरस गया था। वह अपने कामों में इतना व्यस्त रहता है कि एक जमाना गुजर गया, उससे मिला नहीं और ना ही बात हुई, ना आमने सामने और न फोन पर।
मुझे अपने बेटे से बहुत मोहब्बत है, इसलिए मैंने उस पर ये मुकदमा किया था, ताकि हर महीने मैं उससे मिल सकूं और मैं उसको देख कर खुश हो लिया करूंगा।ये बात सुनकर जज की भी आंखों में आंसू आ गए। 

जज साहब ने बूढ़े आदमी से कहा की अगर आप पहले बताते, तो मैं उसको नज़रअंदाज और ख्याल न रखने के जुल्म में सजा करा देता। 

बूढ़े बाप ने जज साहब की तरफ मुस्कराते हुए देखा, 
और कहा अगर आप सजा कराते, तो मेरे लिए ये दुख की बात होती, क्योंकि सच में उससे मैं बहुत मोहब्बत करता हूं और मैं हरगिज नहीं चाहूंगा कि मेरी वजह से मेरे बेटे को कोई सजा मिले या उसे कोई तकलीफ हो। 

*💐💐शिक्षा💐💐*


*इस कहानी से ये प्रेरणा मिलती है, मां बाप को आपके पैसे की जरूरत नहीं है, उनको आपके समय की जरूरत है। वक्त के रहते उनसे रोज बातें कर लिया करो। आपका कुछ नहीं जाएगा, परंतु आपको अपने माँ बाप का आशीर्वाद जरूर प्राप्त होगा। वरना एक दिन याद करके पछताने के अतिरिक्त कुछ शेष नहीं होगा।*


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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  💯 of the day  💮




*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐सोशल मीडिया फ्रेंड💐💐*



अभय एक सीधा-साधा लड़का था। ग्रेजुएशन की पढाई करने के लिए अब उसे अपना गाँव छोड़कर शहर में दाखिला लेना था। किसान पिता ने एक-एक पैसा जोड़कर अभय के लिए शहर में सारी व्यवस्था कर दी और ये सोचकर एक स्मार्ट फोन भी दिला दिया कि ऑनलाइन पढाई करने में इसका उपयोग होगा।

स्वभाव से अंतर्मुखी अभय को अब अपने सपनों को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करनी थी। अपने संकोची स्वभाव के कारण  वह शहर के बच्चों के साथ उतना घुल-मिल नहीं पाया और दोस्त बनाने के लिए उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया। ऐसे ही फेसबुक पर उसी शहर के मयंक नाम के एक लड़के से उसकी दोस्ती हो गई। मयंक का प्रोफाइल अभय को बहुत पसंद आया था। दोनों के बीच मैसेजेस का आदान-प्रदान होना शुरू हो गया।

पढाई के लिए लिए गए फोन का प्रयोग अब दोस्ती और मनोरंजक वीडियोस देखने में होने लगा। यहाँ तक की क्लास करते हुए भी अभय का ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर ही लगा रहता।

मयंक और अभय की दोस्ती भी गहरी होती गयी, यहाँ तक कि मयंक कई बार उसका फ़ोन भी रिचार्ज करा देता।

देखते-देखते उनकी फ्रेंडशिप को दो-तीन महीने बीत गए, पर अभी भी उनकी एक बार भी मुलाक़ात नहीं हुई थी।

फिर एक दिन मयंक ने अभय को एक जगह बुलाने के लिए कॉल की, ” यार एक बहुत अच्छी opportunity है, तू सुबह दस बजे Whatsapp किये पते पर आ जा, अब पढाई के साथ -साथ तू हर महीने 5000 रु भी कमा सकता है, और इसी बहाने हम दोनों पहली बार face to face मिल भी लेंगे।”

अभय की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, दोस्त से मिलने की ख़ुशी और पैसा कमाने का अवसर मिलने की बात से वो फूला नहीं समा रहा था। अगले दिन वह सुबह जल्दी उठा और तैयार होकर मयंक के दिए पते की ओर बढ़ गया। वो जगह शहर से कुछ दूर थी, इसलिए अभय उधर जा रही एक बस पर सवार हो गया। एक घंटे के सफ़र के बाद आखिरकार वो पूछते-पाछते दिए हुए पते पर पहुंचा।

अभी वह दरवाजा खटखटाता की इससे पहले एक कार उसके पास आकर रुकी। उसमे से पैंताली-पचास साल का एक अधेड़ व्यक्ति बाहर निकला और बोला, “सुनो बेटा क्या तुम्हारा नाम अभय है?

“जी अंकल”, अभय बोला।

“मुझे मयंक ने भेजा है, दरअसल, अचानक मीटिंग का स्थान बदल गया है, आओ कार में बैठो मैं तुम्हे सही जगह ले चलता हूँ।”, व्यक्ति बोला।

अभय फौरन कार में बैठ गया और वे आगे बढ़ गए।

व्यक्ति ने अभय की केयर करते हुए उसे पीने के लिए फ्रूटी दी!

फ्रूटी पीने के करीब तीन घंटे बाद जब अभय की आँखें खुलीं तो उसने खुद को एक पार्क में लेटा हुआ पाया, उसे पेट के एक तरफ काफी दर्द महसूस हो रहा था, मोबाइल और पैसे भी गायब थे।


कुछ देर तक तो उसे समझ ही नहीं आया कि वो आखिर कार से यहाँ कैसे पहुँच गया। फिर उसने शर्ट उठा कर दर्द वाली जगह देखी तो वहां एक चीरा लगा हुआ था.


अभय का दिल तेजी से धड़कने लगा। वह समझ चुका था कि उसके साथ कुछ बहुत गलत हो चुका है।

वह फ़ौरन भाग कर डॉक्टर के पास गया।

पर डॉक्टर ने जो बात उसे बताई, उसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उसके शरीर से एक किडनी गायब थी। अब उसकी “काटो तो खून नहीं” वाली हालत हो गई।

सोचने लगा, “क्या सपने लेकर गांव से शहर आया था। अब अपने पिताजी को क्या जवाब देगा।”

वह भागा-भागा पुलिस के थाने पहुंचा। वहां जाकर तो उसके सामने डिजिटल दुनिया की सारी सच्चाई सामने आ गई। यह जो फेसबुक पर मयंक का प्रोफाइल था वह कोई युवा नहीं बल्कि वही अधेड़ व्यक्ति था जिसने उसे कार में बैठाया था।

वह आकर्षक अकाउंट बनाकर अभय जैसे लोगों को, जो सफलता शॉर्टकट में चाहते थे और ऐसे छलावे पे विश्वाश करते थे, फांसता था। फिर धीरे-धीरे पर्सनल लाइफ में घुसकर उन्हें नौकरी का झांसा देकर बुलाता। उसके बाद शरीर के अंगों की चोरी करता था। ऐसे कितने सारे cases उसके नाम थे।

सोशल मीडिया पर सोशल ना होकर अगर अभय वास्तविक  दुनिया में social होता तो शायद ऐसी नौबत ही नहीं आती। स्क्रीन के पीछे का सच अब आईने की तरह साफ हो चुका था। इतनी बड़ी ठोकर लगने के बाद अब उसने मोबाइल स्क्रीन पर अपना समय गवाना बंद कर दिया। वास्तविक और आभासी दुनिया के बीच का फर्क अब उसकी समझ में आ चुका था ,पर बहुत कुछ खोने के बाद।

*💐💐शिक्षा💐💐*


दोस्तों, ऑनलाइन वर्ल्ड में किसी पर आँख मूँद कर विश्वास करना आपको मुसीबत में डाल सकता है। इसलिए सोशल मीडिया और इन्टरनेट को प्रयोग पूरी सावधानी के साथ करें ताकि आपको कभी अभय की तरह पछताना ना पड़े।


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