💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 111 💮
*💐💐कर्म करों फल की चिंता ना करों💐💐*
जमीन में दो बीज बोये गए थे अब उनके अंकुरित होकर धरती के ऊपर आने का वक्त था तभी एक बीज ने सोचा कि पता करते हैं धरती के ऊपर का जीवन कैसा हैं ?
उस बीज ने कई पौधों और वृक्षों से बात की और एक निष्कर्ष निकाला कि धरती के ऊपर का जीवन बहुत कष्टदायी हैं | धरती के मानव पौधों को पैरों तलें रौंध देते हैं |
जीव-जन्तु पेड़, पौधों को खा जाते हैं | इस प्रकार उस बीज ने निर्णय लिया कि वह अंकुरित होकर ऊपर नहीं जाएगा और उसने यह बात अपने दोस्त दुसरे बीज को भी बताई और उसे भी अंकुरित ना होने की सलाह दी | पर उस दुसरे बीज ने उसकी बात नहीं मानी और अंकुरित होकर ऊपर जाने का फैसला किया |
आज कई वर्षों बाद वह बीज एक वृक्ष बन गया जिसने फल, फूल दिए लोगो को छाया दी और अपने बीज से नए पौधों और वृक्षों को जीवन दिया और अपने आप में बहुत ख़ुशी पाई| और उसी जगह वह बीज जिसने अंकुरित ना होने का फैसला किया था वह धरती के नीचे ही ख़राब होकर मर गया ।
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*💐💐शिक्षा💐💐*
कर्म करों फल की चिंता ना करो।जीवन में अगर भविष्य से डरकर आगे बढ़ेंगे तो कभी कुछ नहीं मिलेगा | जीवन के हर कोने में डर हैं पर उसे जी कर ही जिन्दगी में आगे बढ़ सकते हैं डरकर बैठ जाने से जिन्दगी एक ठहरे हुयें पानी की तरह हो जाती हैं जिसमे कुछ दिनों बाद कीड़े पड़ जाते हैं और दुर्गन्ध फैल जाती हैं | चलता हुआ जीवन बहती हुई नदी की धारा हैं जो सदैव निर्मल और पवित्र होती हैं |
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 112 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐ईश्वर का चक्रव्यूह💐💐*
किसी नगर में एक राजा राज्य करता था। एक शौक जो प्रा
सभी राजाओं को होता है और वो है शिकार खेलने का। एक दिन राजा ने अपने मंत्री से कहा, क्यों न शिकार खेलने जंगल में जाया जाए। राजा और मंत्री दोनों शिकार खेलने जंगल में गए। उन्हें एक हिरन दिखाई दिया। राजा ने उस पर प्रहार करने के लिए तीर निकाला पर उस पर प्रहार करते समय अपने ही शस्त्र से उसकी अपनी अंगुली कट गई। मंत्री ने यह देख कर कहा ‘ईश्वर जो कुछ करता है अच्छा ही करता है।’
सभी राजाओं को होता है और वो है शिकार खेलने का। एक दिन राजा ने अपने मंत्री से कहा, क्यों न शिकार खेलने जंगल में जाया जाए। राजा और मंत्री दोनों शिकार खेलने जंगल में गए। उन्हें एक हिरन दिखाई दिया। राजा ने उस पर प्रहार करने के लिए तीर निकाला पर उस पर प्रहार करते समय अपने ही शस्त्र से उसकी अपनी अंगुली कट गई। मंत्री ने यह देख कर कहा ‘ईश्वर जो कुछ करता है अच्छा ही करता है।’
मंत्री के मुख से यह सुनकर राजा को बहुत बुरा लगा। वह सोचने लगे मेरी तो ऊंगली कट गई और यह कहता है कि ईश्वर जो करता है वह अच्छा ही करता है। यह मेरा ही खाता है और मेरी ही हानी चाहता है। इस प्रकार विचार करके उसने अपने मंत्री को अपने यहां से निकल जाने को कहा। चलते समय मंत्री ने फिर कहा ‘ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है।’ कुछ दिन बाद राजा पुनः शिकार खेलने गया। एक हिरण का पीछा करते-करते एक जंगल में जा पहुंचा। हाथी घोड़े नौकर चाकर सब पीछे रह गए। जंगल में एक कबीला पूजन कर रहा था।
उन्हें देवी के लिए नर बलि देनी थी। तभी अचानक उनकी दृष्टि राजा पर पड़ी। बलि के लिए उन्होंने राजा को पकड़ लिया। राजा को बलि के लिए खड़ा किया गया तो किसी की निगाह अचानक राजा के कटी हुई ऊँगली पर पड़ी। राजा की अंग भंग होने के कारण उन लोगों ने राजा को छोड़ दिया। फिर भटकता हुआ राजा अपने राज्य में वापस पहुंच गया। उसने सोचा इसी कटी हुई अंगुली ने आज मेरे प्राण बचाए हैं। उसे मंत्री की बात का अर्थ समझ में आ गया और उस मंत्री को पुनः मंत्री पद पर रख लिया। राजा ने मंत्री से पूछा, मेरी ऊँगली कटी थी अब तो समझ में आ गया कि क्या अच्छा हुआ, क्योंकि कटी अंगुली के कारण मेरे प्राण बच सकें।
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पर जब मैंने तुमको नौकरी से निकाला था तब भी तुमने यही कहा था कि ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है उसका क्या अर्थ है। मंत्री ने उत्तर में कहा ‘महाराज यदि आपने मुझे निकाल न दिया होता तो मैं भी उस दिन शिकार के समय आपके साथ होता और मेरे अंग भंग न होने के कारण मैं पूरी तरह योग्य समझा जाता और उस कबीले के लोग अपनी कुलदेवी को प्रसन्न करने के लिए मेरी बलि अवश्य चढ़ा देते।’ राजा को समझ आ गया कि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है।
*💐💐शिक्षा:-💐💐*
दोस्तों, हर बुराई में कोई न कोई अच्छाई छुपी होती है। प्रसंग से, जो भी समस्या हमारे सामने आती हैं उस समय हम यही सोचते हैं की ऐसा क्यों हुआ, ऐसा मेरे साथ क्यों होता है। परंतु हर चीज जो भी हमारे सामने आती है वो कोई न कोई संदेश, शुभ संदेश, कल्याणकारी संदेश लेकर जरूर आती है। जिस समय समस्या आती है उस समय लगता है कि सब कुछ गलत हो रहा है परंतु कुछ समय के बाद हमें समझ में आ जाता है कि हां यह चीज इस दृष्टिकोण से मेरे लिए अत्यंत लाभदायक भी है। इसीलिए किसी भी समस्या के बीच सकारात्मक रहना बहुत जरूरी है।
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 113 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐चावल का दाना💐💐*
एक भिखारी एक दिन सुबह अपने घर के बाहर निकला। त्यौहार का दिन है। आज गाँव में बहुत भिक्षा मिलने की संभावना है। वो अपनी झोली में थोड़े से चावल दाने डाल कर, बाहर आया। चावल के दाने उसने डाल लिये हैं अपनी झोली में, क्योंकि झोली अगर भरी दिखाई पड़े तो देने वाले को आसानी होती है, उसे लगता है कि किसी और ने भी दिया है। सूरज निकलने के क़रीब है। रास्ता सोया है। अभी लोग जाग ही रहे हैं।
मार्ग पर आते ही सामने से राजा का रथ आता हुआ नजर आता है। सोचता है आज राजा से अच्छी भीख मिल जायेगी, राजा का रथ उसके पास आकर रूक जाता है। उसने सोचा, “धन्य हैं मेरा भाग्य ! आज तक कभी राजा से भिक्षा नहीं माँग पाया, क्योंकि द्वारपाल बाहर से ही लौटा देते हैं। आज राजा स्वयं ही मेरे सामने आकर रूक गया है।
भिखारी ये सोच ही रहा होता है अचानक राजा उसके सामने एक याचक की भाँति खड़ा होकर उससे भिक्षा देने की मांग करने लगता है। राजा कहता है कि आज देश पर बहुत बड़ा संकट आया हुआ है, ज्योतिषियों ने कहा है इस संकट से उबरने के लिए यदि मैं अपना सब कुछ त्याग कर एक याचक की भाँति भिक्षा ग्रहण करके लाऊँगा तभी इसका उपाय संभव है। तुम आज मुझे पहले आदमी मिले हो इसलिए मैं तुमसे भिक्षा मांग रहा हूँ। यदि तुमने मना कर दिया तो देश का संकट टल नहीं पायेगा इसलिए तुम मुझे भिक्षा में कुछ भी दे दो।
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भिखारी तो सारा जीवन माँगता ही आया था कभी देने के लिए उसका हाथ उठा ही नहीं था। सोच में पड़ गया की ये आज कैसा समय आ गया है, एक भिखारी से भिक्षा माँगी जा रही है, और मना भी नहीं कर सकता। बड़ी मुशकिल से एक चावल का दाना निकाल कर उसने राजा को दिया। राजा वही एक चावल का दाना ले खुश होकर आगे भिक्षा लेने चला गया। सबने उस राजा को बढ़-बढ़कर भिक्षा दी। परन्तु भिखारी को चावल के दाने के जाने का भी गम सताने लगा।
जैसे-तैसे शाम को वह घर आया। भिखारी की पत्नी ने भिखारी की झोली पलटी तो उसमें उसे भीख के अन्दर एक सोने का चावल का दाना भी नजर आया। भिखारी की पत्नी ने उसे जब उस सोने के दाने के बारे में बताया तो वो भिखारी छाती पीटके रोने लगा। जब उसकी पत्नी ने रोने का कारण पूछा तो उसने सारी बात उसे बताई। उसकी पत्नी ने कहा, “तुम्हें पता नहीं, कि जो दान हम देते हैं, वही हमारे लिए स्वर्ण है। जो हम इकट्ठा कर लेते हैं, वो सदा के लिए मिट्टी का हो जाता है।"
उस दिन से उस भिखारी ने भिक्षा माँगनी छोड़ दी, और मेहनत करके अपना तथा परिवार का भरण-पोषण करने लगा। जिसने सदा दुसरों के आगे हाथ फैलाकर भीख माँगी थी अब खुले हाथ से दान-पुण्य करने लगा। धीरे-धीरे उसके दिन भी बदलने लगे। जो लोग सदा उससे दूरी बनाया करते थे अब उसके समीप आने लगे। वो एक भिखारी की जगह दानी के नाम से जाना जाने लगा।
*💐💐शिक्षा:-💐💐*
जिस इंसान की प्रवृति देने की होती है उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं होती और जो हमेशा लेने की नियत रखता है उसका कभी पूरा नहीं पड़ता..!!
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 114 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐दिखावा💐💐*
अरे राजू भैया ऐसे किन ख्यालों में खोए बैठे हुए हो बेटी की शादी सिरपर है ऐसे में तो एक पिता खुशी में झूमते हुए दिखाई देता है और तुम हो की पार्क की इस बेंच पर अकेले बैठे हुए गहरी चिंता में डूबे हुए हो क्या हुआ कोई परेशानी है दहेज वगैरह की तो नहीं
अरे नहीं बिरजू बात वो नहीं है लड़के वाले अच्छे हैं दहेज प्रथा के विरोधी मगर सच कहूं आज बाबूजी की कहीं हुई बातें बहुत याद आ रही है जिनपर में कभी हंसा करता था मगर आज एहसास होता है कितना सच कहा करते थे
राजूभाई बड़े बुजुर्गो के बाद यूं ही सफेद नहीं होते उनके अनुभवों से ये सब ज्ञान होता है जिनसे वो अपने बच्चों को बचाने के लिए हमें आगाह करते रहते हैं वैसे क्या बात याद आ रही थी चाचाजी की
बिरजू बाबूजी अक्सर कहते थे बेटी की शादी में और मकान बनाने में लगाया गया अनुमान अक्सर गलत साबित होता है सोचो दो तीन लाख तो बजट पांच पार कर जाता है मैंने भी गीता की शादी के लिए अपना बजट तय किया हुआ था मगर .... मेरे अनुमान से लगाए गये सब खर्चे अचानक से बढ़ गये मेरे खर्चों का पूर्वानुमान गलत निकला यार लडके वालो की फरमाइशें तो होती ही है ये तो मुझे पता है मगर मेरे खुद के बच्चे ...
उन्हें शादी किसी बारात घर में नहीं बल्कि बड़े से होटल रेस्टोरेंट में चाहिए
शगुन और शादी दो प्रोग्राम है दोनों के लिए महंगी डिज़ाइनर ड्रेस चाहिए
दोनों प्रोग्राम के लिए ब्यूटिशियन भी ख़ासा पैसा लेने वाली बुक करी है
जब मैं अपनी हैसियत की बात करता हूं तो सबके सब एकसाथ बोल उठते हैं ...शादी कौन सी बार बार होती है और फिर फलां की शादी का एग्जाम्पल देना शुरू कर देते हैं मुंह फुलाकर कहते हैं आपको जैसा ठीक लगे करो
हम बस शादी में शामिल हो जायेंगे
अरे यार उन्हें कैसे समझाऊं में पैसे वाले तो अपनी शान दिखाने के लिए चकाचौंध से भरी महंगी शादियां करते है
और उनकी देखा देखी मे मध्यम वर्ग, विशेष रूप से युवा दिखावे की उस अंधी दौड़ में शामिल हो जाते हैं जो उनके लिए है ही नही
ओह ....सच कहा राजू भाई आजकल की यही परिस्थितियां कमोबेश हर परिवार में हो रही है एक पिता को पता होता है कैसे वो पाई पाई एकत्रित करके बेटी की शादी के लिए अपनी अनेकों ख्वाहिशों को अनदेखा करता है मगर आजकल के युवा बच्चों को बस दिखावा चाहिए होता है उसने वहां ऐसा किया तो में भी अपनी शादी में वहीं करुंगा वैसा ही डिजाइनर ड्रेस पहनूंगा
स्टाटर में चाइनीज फूड चाहिए कुछ गेम्स होने चाहिए
और तो और ड्रेस कोड तक ... खैर अब क्या सोचा है आपने ...
सोचना क्या है बिरजू ....अपनी भविष्यनिधि संजोकर रखीं थीं की बुढ़ापे में .... वहीं रकम निकासी का फॉर्म भरने जा रहा हूं कहते हुए राजूभाई उठकर चल दिए वहीं बिरजू पार्क की बेंच पर बैठे हुए बुदबुदाने लगा
सच है भैया बाहर वालों से लड़ना आसान है मगर अपनों से.... अपनों से नही...
💐💐शिक्षा💐💐
दोस्तों .... सोचिएगा लोगों के कहने पर नहीं उनके दिखावे से नहीं आपकी चादर कितनी है ये आप और आपका परिवार बखूबी जानते हैं किसी दिखावटी पन में पैर इतने मत पसारिए की चादर छोटी पड़ जाए
कम शब्दों में बड़ी बात मानना ना मानना आपके विवेक पर निर्भर है...
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*💐💐दांव-पेंच💐💐*
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किसी गाँव में एक दिन कुश्ती स्पर्धा का आयोजन किया गया । हर साल की तरह इस साल भी दूर -दूर से बड़े-बडें पहलवान आये । उन पहलवानो में ऐक पहलवान ऐसा भी था, जिसे हराना सब के बस की बात नहीं थी। जाने-माने पहलवान भी उसके सामने ज्यादा देर टिक नही पाते थे।
स्पर्धा शुरू होने से पहले मुखिया जी आये और बोले , ” भाइयों , इस वर्ष के विजेता को हम 3 लाख रूपये इनाम में देंगे। “
इनामी राशि बड़ी थी , पहलावन और भी जोश में भर गए और मुकाबले के लिए तैयार हो गए।कुश्ती स्पर्धा आरंभ हुई और वही पहलवान सभी को बारी-बारी से चित्त करता रहा । जब हट्टे-कट्टे पहलवान भी उसके सामने टिक ना पाये तो उसका आत्म-विश्वास और भी बढ़ गया और उसने वहाँ मौजूद दर्शकों को भी चुनौती दे डाली – ” है कोई माई का लाल जो मेरे सामें खड़े होने की भी हिम्मत करे !! … “
वही खड़ा एक दुबला पतला व्यक्ति यह कुश्ती देख रहा था, पहलवान की चुनौती सुन उसने मैदान में उतरने का निर्णय लिया,और पहलावन के सामें जा कर खड़ा हो गया।
यह देख वह पहलवान उस पर हँसने लग गया और उसके पास जाकर कहाँ, तू मुझसे लडेगा…होश में तो है ना?
तब उस दुबले पतले व्यक्ति ने चतुराई से काम लिया और उस पहलवान के कान मे कहाँ, “अरे पहलवानजी मैं कहाँ आपके सामने टिक पाऊगां,आप ये कुश्ती हार जाओ मैं आपको ईनाम के सारे पैसे तो दूँगा ही और साथ में 3लाख रुपये और दूँगा,आप कल मेरे घर आकर ले जाना। आपका क्या है , सब जानते हैं कि आप कितने महान हैं , एक बार हारने से आपकी ख्याति कम थोड़े ही हो जायेगी…”
कुश्ती शुरू होती है ,पहलवान कुछ देर लड़ने का नाटक करता है और फिर हार जाता है। यह देख सभी लोग उसकी खिल्ली उड़ाने लगते हैं और उसे घोर निंदा से गुजरना पड़ता है।
अगले दिन वह पहलवान शर्त के पैसे लेने उस दुबले व्यक्ति के घर जाता है,और 6लाख रुपये माँगता है.
तब वह दुबला व्यक्ति बोलता है , ” भाई किस बात के पैसे? “
“अरे वही जो तुमने मैदान में मुझसे देने का वादा किया था। “, पहलवान आश्चर्य से देखते हुए कहता है।
दुबला व्यक्ति हँसते हुए बोला “वह तो मैदान की बात थी,जहाँ तुम अपने दाँव-पेंच लगा रहे थे और मैंने अपना… पर इस बार मेरे दांव-पेंच तुम पर भारी पड़े और मैं जीत गया। “
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों , ये कहानी हमें सीख देती है कि थोड़े से पैसों के लालच में वर्षों के कड़े प्ररिश्रम से कमाई प्रतिष्ठा भी कुछ ही पलों में मिटटी मे मिल जातीं है और धन से भी हाथ धोना पड़ता है। अतः हमें कभी अपने नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से बच कर रहना चाहिए।
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