💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 161 💮
*💐💐पापी कौन💐💐*
एक बार, मैं किसी काम से, बस द्वारा सफर कर रहा था, 12-13 घण्टे का लंबा सफर था, बात उस जमाने की है जब , राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई कई किलोमीटर तक कोई आबादी नही मिलती थी।
हमारी बस शाम को चली, रात भर सफर करके दूसरे दिन हमे गन्तव्य तक पहुचना था, 2-3 घण्टे के सफर के बाद ही बारिश चालू हो गयी, धीरे धीरे बारिश , तेज तूफान का रूप लेती चली गयी, जैसे जैसे समय बढ़ रहा था तूफान बढ़ रहा था, बिजली गिर रही थी , उस तेज बारिश तूफानी रात में बस में बैठे सभी लोग घबरा रहे थे, और तरह तरह की बाते करने लगे, फिर बिजली कई बार बस के आस पास ही गिरने लगी, जिसके कारण बस में बैठे लोगों की चर्चा और तेज हो गयी कि जरूर इस बस में कोई पापी व्यक्ति बैठा है, जिसकी वजह से बिजली उसके ऊपर गिरने के लिये बस के आस पास ही गिर रही है, कुछ लोग चिल्लाने लगे कि ढूंढो उस व्यक्ति को, निकालो बस से, नही तो हम सब मारे जाएंगे।
बहुत सारे तेज तर्राक लोग थे, कुछ अच्छे सम्पन्न दिखने वाले, आखिरकार उन चिल्लाने वाले लोगो की टोली ने , एक व्यक्ति को चुना वो एक बहुत गरीब सी दिखने वाली बुढ़िया थी, सब लोग उसी पर चीखने चिल्लाने लगे कि यही पापिन है, इसे बस से तुरन्त उतारो! मैंने उस बुढ़िया को देखा, जो उन लोगो के निराधार आरोपो से घबराई हुई थी, शायद रो भी रही थी मेरे मन में उस बुढ़िया को देख कर दया फूटी, और विचार आया कि ये दुनिया निर्बल को ही सताती है, उस दया भाव के कारण मैंने उन लोगो को समझाने का प्रयास किया कि इतनी तूफानी रात में , इस जंगल में , रास्ते में इस बेचारी बुढ़िया को उतार दोगे तो शायद ये इस तूफान में मर भी जाए।
परन्तु भीड़ कहाँ किसी की सुनती है ??
वही हुवा, वो सब लोग मेरे ऊपर ही चढ़ गए कि तुझे ज्यादा चिंता सता रही है इस बुढ़िया की ?? तो तू भी उतर जा इसके साथ उन लोगो ने मुझे भी चुप करा दिया , मैं चुप हो कर अपनी सीट में बैठ गया अब मेरे मन मे द्वंद चल रहा था कि क्या करूँ ?? बाहर तेज तूफानी रात, जंगल, दूर दूर तक आबादी नही, उस बुढ़िया के प्रति दया भी आ रही थी, और भगवान पर गुस्सा भी आ रहा था कि भगवान ने भी कैसी दुनिया बनाई है , सब लोग कमजोर को ही सताते हैं, इस बुढ़िया का क्या होगा ?? मुझे डर भी लग रहा था।
आखिरकार, उस चिल्लाती भीड़ ने, उस कमजोर बुढ़िया को जबरदस्ती बस से उतार दिया, उस बुढ़िया का चेहरा देख कर, अचानक मेरे अंदर बहुत तेज दया के आँसू फूटे, और मैं भी उस बुढ़िया को सहारा देते हुए, नीचे उतर गया, सड़क के पास एक पेड़ के नीचे जाने की तरफ बढ़ा मुझे उस बुढ़िया के साथ नीचे उतरते उस बस के सभी लोगो ने देखा, अधिकतर लोगों ने मुझे मूर्ख कहा -- किसी ने चेहरे से, किसी ने शब्दों से, किसी ने अठ्ठाहस हँसी से, मैं उस बुढ़िया को लिए सड़क पर खड़ा था,पेड़ की तरफ जाते जाते , मैं जाती हुई बस को देख रहा था, जिसमे लोग हँस रहे थे, मेरे निर्णय पर।
बस कुछ ही दूर चली थी कि मेरे देखते देखते ही, एक बिजली उस बस पर गिरी और पूरी बस जल कर राख हो गयी, सब लोग जल कर मर गए।
*💐💐शिक्षा💐💐*
किसी पर दया फूटे, उस भाव दशा में, अपने किसी भी नुकसान की परवाह किये बगैर, जो कुछ हमने मदद की तो परिणाम शुभ ही होगा, हो सकता है कभी जल्दी दिखाई दे, कभी देर से किसी की बाहरी क्रिया, अवस्था देख कर हम किसी के ऊपर ये आरोप नही लगा सकते कि वो पापी है, किसी को पापी कहने का, मानने का अधिकार हमें नहीं है, हम जज नही है, किसी को पापी मान कर यदि हम उससे द्वेष करते है, उलाहना देते हैं तो हमें उसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 162 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐मूर्ख पड़ोसी💐💐*
https://youtu.be/EQbGmarFEqQ
प्राचीन भारत में, एक बहुत ही दयालु व्यापारी रहता था। वह निर्धन लोगों को पैसे दान करता था और अपने दोस्तों की हमेशा मदद करता था। उस व्यापारी ने एक दिन अपना सारा पैसा और पैसे के साथ अपनी ख्याति भी खो दी। उसके दोस्त उसे अनदेखा करने लगे। इन सबसे तंग आकर एक रात उसने सोचा, “मैंने सब कुछ खो दिया, कोई मेरे साथ नहीं है। मुझे मर जाना चाहिए।”
यह सोचते सोचते उसे गहरी नींद आ गई। सोते हुए उसने एक सपना देखा। सपने में एक भिक्षु ने उससे कहा, “कल मैं तुम्हारे द्वार पर आऊंगा। तुम्हें मेरे सिर पर लाठी से चोट करनी होगी। मैं सोने की मूर्ति में बदल जाऊंगा।” लगभग सुबह हो चुकी थी। व्यापारी जागा और सपने के बारे में सोचने लगा।
फिर कुछ समय बाद, एक भिक्षु ने घर के दरवाजे पर दस्तक दी। व्यापारी ने भिक्षु को अंदर बुलाया। व्यापारी ने भिक्षु के सिर पर लाठी से वार किया और भिक्षु तुरंत ही सोने की मूर्ति में बदल गया। पास से ही एक पड़ोसी जा रहा था उसने यह सब देख लिया।
लालची पड़ोसी ने व्यापारी की नकल करने का फैसला लिया। अगले दिन पड़ोसी एक आश्रम में गया और कुछ भिक्षुओं से एक कठिन पुस्तक को समझाने के लिए अपने घर पर आने का आग्रह किया। भिक्षुओं ने उसका आग्रह स्वीकार कर लिया।
अगले दिन कई भिक्षु उस पड़ोसी के घर आए। उसने अपने घर का द्वार बंद कर दिया और भिक्षुओं के सिर पर लाठी से प्रहार करना शुरू कर दिया। जब एक भी भिक्षु सोने की मूर्ति में नहीं बदला तो पड़ोसी निराश हो गया।
पड़ोसी को भिक्षुओं पर हमला करने के अपराध में बंदी बना लिया गया। पड़ोसी ने अपने कृत्य के लिए व्यापारी को दोषी ठहराया। राजा ने व्यापारी को राजदरबार में बुलाया। व्यापारी ने राजा को अपने सपने के बारे में सब कुछ बता दिया। उसने कहा, “महाराजा, मैंने पड़ोसी से भिक्षुओं पर हमला करने के लिए नहीं कहा। पड़ोसी को यह मूर्खता करने से पहले इसके दुष्परिणामों के बारे में सोचना चाहिए था।”
राजा व्यापारी की बात से सहमत था अत: उसने व्यापारी को मुक्त कर दिया और सैनिकों से मूर्ख पड़ोसी को कारागार में डालने का आदेश दिया।
*शिक्षा:-*
मित्रों! बिना सोचे समझे कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 163 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐रामायण💐💐*
https://youtu.be/EQbGmarFEqQ
सुमित के घर आते ही बेटे ने बताया कि मिश्रा अंकल क्रेटा गाड़ी ले आये हैं। पत्नी ने चाय का कप पकड़ाया और बोली पूरे सत्रह लाख की गाड़ी खरीदी और वो भी कैश में। सुमित हाँ हूँ करता रहा। आखिर पत्नी का धैर्य जवाब दे गया, हम लोग भी अपनी एक गाड़ी ले लेते हैं, तुम मोटर साईकल से दफ्तर जाते हो क्या अच्छा लगता है कि सभी लोग गाड़ी से आएं और तुम बाइक चलाते हुए वहाँ पहुंचो, कितना खराब लगता है। तुम्हे न लगे पर मुझे तो लगता है।
देखो घर की किश्त और बाल बच्चों के पढ़ाई लिखाई के बाद इतना नही बचता कि गाड़ी लें। फिर आगे भी बहुत खर्चे हैं। सुमित धीरे से बोला।
बाकी लोग भी तो कमाते हैं, सभी अपना सौख पूरा करते हैं, तुमसे कम तनखा पाने वाले लोग भी स्कोर्पियो से चलते हैं, तुम जाने कहाँ पैसे फेंक कर आते हो। पत्नी तमतमाई।
अरे भई सारा पैसा तो तुम्हारे हाथ मे ही दे देता हूँ, अब तुम जानो कहाँ खर्च होता है। सुमित ने कहा।
मैं कुछ नही जानती, तुम गाँव की जमीन बेंच दो ,यही तो समय है जब घूम घाम लें हम भी ज़िंदगी जी लें। मरने के बाद क्या जमीन लेकर जाओगे। क्या करेंगे उसका। मैं कह रही कल गाँव जाकर सौदा तय करके आओ बस्स। पत्नी ने निर्णय सुना दिया।
अच्छा ठीक है पर तुम भी साथ चलोगी। सुमित बोला । पत्नी खुशी खुशी मान गयी और शाम को सारे मुहल्ले में खबर फैल गयी कि प्रिया जल्द ही गाड़ी लेने वाली है।
सुबह सुमित और प्रिया गाँव पहुँचे। गाँव में भाई का परिवार था। चाचा को आते देख बच्चे दौड़ पड़े। बच्चों ने उन्हें खेत पर ही रुकने को बोला, चाचा माँ आ रही है। तब तक सुमित की भाभी लोटे में पानी लेकर वहाँ आईं और दोनों के जूड़ उतारने के बाद बोलीं लल्ला अब घर चलो।
बहुत दिन बाद वे लोग गाँव आये थे, कच्चा घर एक तरफ गिर गया था। एक छप्पर में दो गायें बंधीं थीं। बच्चों ने आस पास फुलवारी बना रखी थी, थोड़ी सब्जी भी लगा रखी थी। प्रिया को उस जगह की सुगंध ने मोह लिया। भाभी ने अंदर बुलाया पर वह बोली यहीं बैठेंगे। वहीं रखी खटिया पर बैठ गयी। सुमित के भाई कथा कहते थे। एक बालक भाग कर उन्हें बुलाने गया। उस समय वह राम और भरत का संवाद सुना रहे थे। बालक ने कान में कुछ कहा, उनकी आंख से झर झर आँसू गिरने लगे, कण्ठ अवरुद्ध हो गया। जजमानों से क्षमा मांगते बोले, आज भरत वन से आया है राम की नगरी। श्रोता गण समझ नही सके कि महाराज आज यह उल्टी बात क्यों कह रहे। नरेश पंडित अपना झोला उठाये नारायण को विश्राम दिया और घर को चल दिये।
सुमित ने जैसे ही भैया को देखा दौड़ पड़ा, पंडित जी के हाथ से झोला छूट गया, भाई को अँकवार में भर लिए। दोनो भाइयों को इस तरह लिपट कर रोते देखना प्रिया के लिए अनोखा था। उसकी भी आंखे नम हो गयीं। भाव के बादल किसी भी सूखी धरती को हरा भरा कर देते हैं। वह उठी और जेठ के पैर छुए, पंडित जी के मांगल्य और वात्सल्य शब्दों को सुनकर वह अन्तस तक भरती गयी।
दो पैक्ड कमरे में रहने की अभ्यस्त आंखें सामने की हरियाली और निर्दोष हवा से सिर हिलाती नीम, आम और पीपल को देखकर सम्मोहित सी हो रहीं थीं। लेकिन क्रेटा का चित्र बार बार उस सम्मोहन को तोड़ रहा था। वह खेतों को देखती तो उसकी कीमत का अनुमान लगाने बैठ जाती।
दोपहर में खाने के बाद पण्डित जी नित्य मानस पढ़ कर बच्चों को सुनाते थे। आज घर के सदस्यों में दो सदस्य और बढ़ गए थे। अयोध्याकांड चल रहा था। मन्थरा कैकेयी को समझा रही थी, भरत को राज कैसे मिल सकता है। पाठ के दौरान प्रिया असहज होती जाती जैसे किसी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो। पाठ खत्म हुआ। पोथी रख कर पण्डित जी गाँव देहात की समसामयिक बातें सुनाने लगे। प्रिया को इसमें बड़ा रस आता था। उसने पूछा कि क्या सभी खेतों में फसल उगाई जाती है? पण्डित जी ने सिर हिलाते हुए कहा कि एक हिस्सा परती पड़ा है। प्रिया को लगा बात बन गयी, उसने कहा क्यों न उसे बेंच कर हम कच्चे घर को पक्का कर लें। पण्डित जी अचकचा गए। बोले बहू, यह दूसरी गाय देख रही, दूध नही देती पर हम इसकी सेवा कर रहे हैं। इसे कसाई को नही दे सकते। तुम्हे पता है, इस परती खेत में हमारे पुरखों का जांगर लगा है। यह विरासत है, विरासत को कभी खरीदा और बेंचा थोड़े जाता है। विरासत को संभालते हुए हम लोगों की कितनी पीढ़ियाँ खप गयीं। कितने बलिदानों के बाद आज भी हमने अपनी मही माता को बचा कर रखा है। तमाम लोगों ने खेत बेंच दिए, उनकी पीढ़ियाँ अब मनरेगा में मजूरी कर रही हैं या शहर के महासमुन्दर में कहीं विलीन हो गए। तुम अपनी जमीन पर बैठी हो, इन खेतों की रानी हो। इन खेतों की सेवा ठीक से हो तो देखो कैसे माता मिट्टी से सोना देती है। शहर में जो हर लगा है बेटा वो सब कुछ हरने पर तुला है, सम्बन्ध, भाव, प्रेम, खेत, मिट्टी, पानी हवा सब कुछ। आज तुम लोग आए तो लगा मेरा गाँव शहर को पटखनी देकर आ गया। शहर को जीतने नही देना बेटा। शहर की जीत आदमी को मशीन बना देता है। हम लोग रामायण पढ़ने वाले लोग हैं जहाँ भगवान राम सोने की लंका को जीतने के बाद भी उसे तज कर वापस अजोध्या ही आते है, अपनी माटी को स्वर्ग से भी बढ़कर मानते हैं।
तब तक अंदर से भाभी आयीं और उसे अंदर ले गईं। कच्चे घर का तापमान ठंडा था। उसकी मिट्टी की दीवारों से उठती खुशबू प्रिया को अच्छी लग रही थी। भाभी ने एक पोटली प्रिया के सामने रख दी और बोलीं, मुझे लल्ला ने बता दिया था, इसे ले लो और देखो इससे कार आ जाये तो ठीक नही तो हम इनसे कहेंगे कि खेत बेंच दें।
प्रिया मुस्कुराई, विरासत कभी बेंचा नही जाता भाभी। मैं बड़ों की संगति से दूर रही न इसलिए मैं विरासत को कभी समझ नही पाई। अब यहीं इसी खेत से सोना उपजाएँगे और फिर गाड़ी खरीदकर आप दोनों को तीरथ पर ले जायेंगे, कहते हुए प्रिया रो पड़ी, क्षमा करना भाभी। दोनो बहने रोने लगीं। बरसों बरस की कालिख धुल गयी।
अगले दिन जब सुमित और प्रिया जाने को हुए तो उसने अपने पति से कहा, सुनो मैंने कुछ पैसे गाड़ी के डाउन पेमेंट के लिए जमा किये थे उससे परती पड़े खेत पर अच्छे से खेती करवाइए। अगली बार उसी फसल से हम एक छोटी सी कार लेंगे और भैया भाभी के साथ हरिद्वार चलेंगे।
शहर हार गया, जाने कितने बरस बाद गाँव अपनी विरासत को मिले इस मान पर गर्वित हो उठा था ।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 164 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐समय का सदुपयोग💐💐*
https://youtu.be/EQbGmarFEqQ
किसी गांव में एक आनंद नाम का व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही भला था लेकिन उसमें एक दुर्गुण था वह हर काम को टाला करता था। वह मानता था कि जो कुछ होता है भाग्य से होता है।
एक दिन एक साधु उसके पास आया। उस व्यक्ति ने साधु की बहुत सेवा की। उसकी सेवा से खुश होकर साधु ने पारस पत्थर देते हुए कहा- मैं तुम्हारी सेवा से बहुत प्रसन्न हूं। इसलिए मैं तुम्हे यह पारस पत्थर दे रहा हूं। सात दिन बाद मै इसे तुम्हारे पास से ले जाऊंगा। इस बीच तुम जितना चाहो, उतना सोना बना लेना।
उस व्यक्ति को लोहा नही मिल रहा था। अपने घर में लोहा तलाश किया। थोड़ा सा लोहा मिला तो उसने उसी का सोना बनाकर बाजार में बेच दिया और कुछ सामान ले आया।
अगले दिन वह लोहा खरीदने के लिए बाजार गया, तो उस समय मंहगा मिल रहा था यह देख कर वह व्यक्ति घर लौट आया।
तीन दिन बाद वह फिर बाजार गया तो उसे पता चला कि इस बार और भी महंगा हो गया है। इसलिए वह लोहा बिना खरीदे ही वापस लौट गया।
उसने सोचा-एक दिन तो जरुर लोहा सस्ता होगा। जब सस्ता हो जाएगा तभी खरीदेंगे। यह सोचकर उसने लोहा खरीदा ही नहीं।
आठवें दिन साधु पारस लेने के लिए उसके पास आ गए। व्यक्ति ने कहा- मेरा तो सारा समय ऐसे ही निकल गया। अभी तो मैं कुछ भी सोना नहीं बना पाया। आप कृपया इस पत्थर को कुछ दिन और मेरे पास रहने दीजिए। लेकिन साधु राजी नहीं हुए।
साधु ने कहा-तुम्हारे जैसा आदमी जीवन में कुछ नहीं कर सकता। तुम्हारी जगह कोई और होता तो अब तक पता नहीं क्या-क्या कर चुका होता। जो आदमी समय का उपयोग करना नहीं जानता, वह हमेशा दु:खी रहता है। इतना कहते हुए साधु महाराज पत्थर लेकर चले गए।
*💐शिक्षा:-💐💐*
जो व्यक्ति काम को टालता रहता है, समय का सदुपयोग नहीं करता और केवल भाग्य भरोसे रहता है वह हमेशा दुःखी रहता है।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 165 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐कबूतर का घोंसला💐💐*
एक बार शिक्षक नवनीत शाम के समय विद्यालय के बाहर शिष्यों के साथ बेठे थे। तभी वहां एक कबूतर का जोड़ा उड़ता हुआ आ गया। उन्हें देख कर शिक्षक नवनीत को एक कहानी याद आई और उन्होंने शिष्यों को कहानी सुनाना शुरू किया।
एक पेड़ पर एक कबूतर और कबूतरी रहते थे। कुछ समय बाद कबूतरी ने उसी पेड़ की टहनी पर तीन अंडे दिए। एक दिन कबूतर और कबूतरी दोपहर के समय खाना ढूंढते हुए कुछ दूर निकल गये। तभी कहीं से एक लोमड़ी आ गयी। वह भी भोजन की तलाश में पेड़ पर चढ़ी। जहां उसे कबूतर के अंडे मिल गये और वो अंडों को खा गयी।
जब कबूतर का जोड़ा वापस आया तो अंडे न पा कर बहुत परेशान हो गया। दोनों को बहुत बुरा लग रहा था। उनका मन टूट सा गया। तभी कबूतर ने निश्चय किया कि अब वह घोंसला बनाएंगा। ताकि फिर कभी उसके अंडे कोई न खा जाए।
कबूतर ने अपने निर्णय अनुसार तिनके इकट्ठे कर के घोंसला बनाना शुरू किया। पर उसे एहसास हुआ कि उसे तो घोंसला बनाना आता ही नहीं है। तब उसने मदद के लिए जंगल के दूसरे पक्षियों को बुलाया।
सभी पक्षी उसकी मदद के लिए आ गये आर उन्होंने कबूतर के लिए घोंसला बनाना शुरू किया। पक्षियों ने अभी कबूतर को सिखाना शुरू ही किया था कि कबूतर ने बोला कि अब वो घोंसला बना लेगा। उसने सब सीख लिया है।
सभी पक्षी यह सुन कर वापस चले गए। अब कबूतर ने घोंसला बनाना शुरू किया। उसने एक तिनका इधर रखा एक तिनका उधर। उसे समझ आया कि वह अभी भी कुछ नही सीखा है। उसने फिर से पक्षियों को बुलाया। पक्षियों ने आ कर फिर घोंसला बनाना शुरू किया। अभी आधा घोंसला बना ही था कि कबूतर जोर से चिल्लाया, तुम सब छोड़ दो अब मैं समझ गया हूं यह कैसे बनेगा।
इस बार पक्षियों को बहुत गुस्सा आया। सारे पक्षी तिनके वहीं छोड़ कर चले गये। कबूतर ने फिर कोशिश की पर उस से घोंसला नहीं बना।
कबूतर ने तीसरी बार पक्षियों को बुलाया, लेकिन इस बार एक भी पक्षी मदद के लिए नहीं आया और आज तक कबूतर को घोंसला बनाना नहीं आया।
*💐💐शिक्षा💐💐*
बच्चों, इस कहानी ने बताया कि हमें जो काम नहीं आता हो, उसे किसी की मदद से पूरी तरह सीख लेना चाहिए। जो काम नहीं आता हो उसे जबरदस्ती करने का दिखावा नहीं करना चाहिए, क्योंकि मदद करने वाला व्यक्ति एक या दो बार तो आपकी मदद करेगा, लेकिन हर बार नहीं। इसलिए, किसी की मदद का सम्मान करते हुए वह काम पूरी निष्ठा के साथ सीखना चाहिए।
💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
शायरी ग्रुप में जुड़ने के लिए क्लिक करें-👇
https://t.me/Hindishayriya
💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐
सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏.