उठो हिम्मत करो , *कठिनाई का सामना करने को तैयार रहो*ऋषि चिंतन से भाग 1

   




 🌺 ऋषि चिंतन से भाग 1 उठो हिम्मत करो ।🌺 


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               🌺!! 10 जनवरी 2021 रविवार !!🌺

               🌸 !! पौष कृष्ण पक्ष द्वादशी 2077 !!🌸

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                                  *❗प्रणाम❗*

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                             🍥 !!ऋषि चिंतन!!🍥

                     🏵!! उठो हिम्मत करो !!🏵

🏵स्मरण रखिए,🏵 रुकावट और कठिनाइयां आपकी हित चिंतक हैं ! वे आपकी शक्तियों का ठीक-ठीक उपयोग सिखाने के लिए है । वे मार्ग के कंटक हटाने के लिए हैं । वे आपके जीवन को आनंदमय बनाने के लिए हैं । जिनके रास्ते में रुकावट नहीं पड़ी, वे जीवन का आनंद ही नहीं जानते । उनको जिंदगी का स्वाद ही नहीं आया। जीवन का रस उन्होंने ही चखा है , जिनके रास्ते में बड़ी-बड़ी कठिनाइयां आई हैं । वही महान आत्मा कहलाए हैं , उन्हीं का जीवन , जीवन कहला सकता है ।


 🏵उठो ! 🏵उदासीनता त्यागो ! 🏵प्रभु की ओर देखो । वे जीवन के पुजं है । उन्होंने आपको इस संसार में निरर्थक नहीं भेजा । उन्होंने जो श्रम आपके ऊपर किया है , उसको सार्थक करना आपका काम है । यह संसार तभी तक दुखमय दिखता है , जब तक कि हम इसमें अपना जीवन होम नहीं करते । बलिदान हुए बीज पर ही वृक्ष का उद्भव होता है । फूल और फल उसके जीवन की सार्थकता सिद्ध करते हैं । 


🏵सदा प्रसन्न रहो ! 🏵मुसीबतों का खिले चेहरे से सामना करो । आत्मा सबसे बलवान हैं , इस सच्चाई पर दृढ़ विश्वास रखो । यह विश्वास ईश्वरीय विश्वास है । इस विश्वास द्वारा आप सब कठिनाइयों पर विजय पा सकते हैं । कोई कायरता आपके सामने ठ़हर नहीं सकती । इसी से आपके बल वृद्धि होगी । यह आपकी आंतरिक शक्तियों का विकास करेगा।

       🌺  अखंड ज्योति फरवरी 🌺1940🌺  पृष्ठ 9🌺

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    *❗२५  जून   २०२० गुरुवार ❗*

  *॥आषाढ़शुक्लपक्षचतुर्थी२०७७॥*

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     🌺 ऋषि चिंतन से 2 🌺 Rishi chintan se 2 🌺

                  *❗प्रणाम❗*

               *🙏वंदे मातरम्🙏*

              *‼ऋषि चिंतन ‼*

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*अपने आप के साथ सद्व्यवहार करें*

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👉    जब आप ईश्वर के  प्रतिनिधि हैं,  सर्वोच्च विभूति के पुंज हैं, तो आपको क्या अधिकार है कि अपने को दीन हीन या अभागा समझें ? ईश्वर का अपमान आप नहीं कर सकते । *"ईश्वरत्व संसार की मूल क्रियात्मक  शक्ति है ।"* संसार में जो सबसे *"सत्य,"* *" सुंदर"* और *"शिव"*  हो सकता है वह ईश्वरत्व के नाते  आपके रक्त और मांस में प्रवाहित है । 

👉 *"अपने साथ सद्व्यवहार  सीखिए ।"* आप दूसरों की भलाई चाहते हैं । अपने पुत्र की शिक्षा,  स्वास्थ्य,  प्रसिद्धि,  हित कामना के लिए एड़ी चोटी का पसीना एक कर देते हैं, पत्नी,  पुत्रों,  अन्य संबंधियों की हित  चिंता में निरंतर निमग्न रहते हैं ।  *"दूसरों  के हित चिंतन में रहना अच्छा है,  किंतु उससे उत्कृष्ट मार्ग तो वह है,  जिसके द्वारा आप स्वयं अपने विषय में हित- चिंतन करते हैं ।"*

👉 दूसरों के साथ बुराई करने को आप पाप कहते हैं ।  इस दुर्व्यवहार  को आप घृणा की दृष्टि  से देखते हैं,  ठीक है,  *"किंतु जब आप स्वयं अपने ही विषय में निंद्य  विचार रखते हैं, मेरे  विचार में तो यह और भी जघन्य  पाप है ।"*  दूसरों से किए हुए पाप को संसार देखता है, पर आपको स्वयं अपने साथ किया हुआ पाप नजर नहीं आता ।  *"अंतर्दृष्टि से अंतरात्मा उसे देखता है ।  वह कभी-कभी आपको धिक्कारता  भी है,"*  पर  उसके निर्देशनों  पर ध्यान न देने से वह क्षीण हो जाता है । 

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*॥अखण्डज्योतिजनवरी १९५२पृष्ठ८॥*

    *💦पं.श्रीराम शर्मा आचार्य💦*

              *☘संस्थापक☘*

  *🍁अखिल विश्व गायत्री  परिवार🍁*

          *🇮🇳भारतमाता की जय🇮🇳*

                  *🇮🇳जयहिंद🇮🇳*

     *🙏🙏🙏सुप्रभात🙏🙏🙏*

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    *❗०१ जुलाई    २०२० बुधवार ❗*

  *॥आषाढ़ शुक्लपक्षएकादशी२०७७॥*

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    🌺 ऋषि चिंतन से 3 🌺 Rishi chintan se 3 🌺

*👉आज .................................. ..*

   *🌹देवशयनी - एकादशी 🌹* है । 

   *🙏बहुत बहुत शुभकामना 🙏*

   *🙏🙏  बहुत बहुत बधाई 🙏🙏*

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                  *❗प्रणाम❗*

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              *‼ऋषि चिंतन ‼*

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*कठिनाई का सामना करने को तैयार रहो*

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👉  *कोई मनुष्य अपनी गुप्त शक्ति के परिणाम को उस समय तक नहीं जान सकता, जब तक कि किसी कठिन प्रसंग के समय या भारी आपत्ति में उसकी परीक्षा न हो जाए ।* मनुष्य बहुधा अधेड़ हो जाने पर भी अपनी सम्पूर्ण शक्ति को नहीं जान पाते । जब तक किसी बड़ी आपत्ति, हानि अथवा शोक में उनकी परीक्षा नहीं हो जाती, *तब तक वे यह नहीं बता सकते कि वे कितनी बड़ी कठिनाई का सामना कर सकते हैं और किसी बड़ी आपत्ति के आ जाने पर वे कितनी वीरता दिखा सकेंगे ।* 

👉 यदि तुम अपने ऊपर जिम्मेदारी लेना ही नहीं चाहते और यदि तुम आराम की जिंदगी पसंद करते हो और स्वतंत्र व्यापार की कठिनाइयों और झंझटों को किसी दूसरे के ही ऊपर डालना चाहते हो, तो तुम भले ही गुलामी करते रहो, परंतु यदि तुम अपनी शक्ति से यथासंभव अधिक काम लेना चाहते हो और तुम्हारा उद्देश्य अपनी योग्यता की अधिक से अधिक वृद्धि करना है तो तुम उस समय तक अपने उद्देश्य की अच्छी तरह पूर्ति नहीं कर सकते, *जब तक कि तुम केवल किसी दूसरे के बताए हुए मार्ग पर चलते रहोगे और सब काम उसी के विचारों के अनुसार करते रहोगे ।*

👉  *अपने ऊपर भरोसा करने से डरो मत । प्रत्येक मनुष्य में नए कामों के करने की कुछ न कुछ योग्यता होती है और "आत्मविश्वास" से इस योग्यता का विकास होता है ।* 

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*॥अखण्डज्योतिदिसम्बर १९५२पृष्ठ१६॥*

    *💦पं.श्रीराम शर्मा आचार्य💦*

              *☘संस्थापक☘*

  *🍁अखिल विश्व गायत्री  परिवार🍁*

          *🇮🇳भारतमाता की जय🇮🇳*

                  *🇮🇳जयहिंद🇮🇳*

     *🙏🙏🙏सुप्रभात🙏🙏🙏*

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    🌺 ऋषि चिंतन से 4 🌺 Rishi chintan se 4 🌺

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    *❗०२ जुलाई    २०२० गुरुवार ❗*

  *॥आषाढ़ शुक्लपक्ष द्वादशी२०७७॥*

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                  *❗प्रणाम❗*

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              *‼ऋषि चिंतन ‼*

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*🌹🚶‍♂अकेले चलना पड़ेगा 🚶‍♂🌹*

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👉  आपको अपने जैसा व्यक्ति कदापि प्राप्त न होगा । *आपको जीवन-पथ पर अकेले ही अग्रसर होना पड़ेगा ।* कोई आपके साथ दूर तक न चल सकेगा । अकेले चले चलिए । 

👉 जीवन को एक यात्रा मानिए । यात्रा में एक दो अल्पकालीन संगी-साथी आपको प्राप्त हो गए हैं । इनसे चार दिन  के लिए आप बोलते-बरतते हैं, हँसी-ठट्टा, संघर्ष, छीना-झपटी चलती है । साथ-साथ कुछ समय तक आगे बढ़ते हैं, किंतु धीरे-धीरे उनकी जीवन यात्रा समाप्त होती चलती है । एक के पश्चात दूसरा अपने गन्तव्य स्थान पर रुककर आपको छोड़ते चलते हैं । आपके साथ अभी छः सात व्यक्तियों का परिवार था । सात में से छः रह जाते हैं और फिर क्रमशः आप अकेले ही रह जाते हैं । *"अरे, मैं अकेला रह गया, बिलकुल अकेला"* आपका मन कुछ काल के लिए अशांत हो उठता है । उसमें एक कड़ुवाहट सी आ जाती है, *"पर वास्तव में जीवन का यह "अकेलापन" ही मानव जीवन का चरम सत्य है ।"*

👉 *सबको पाकर भी हम सब अकेले हैं, नितांत अकेले ।* हमारे साथ कोई भी दूर तक चलने वाला नहीं है । जिन्हें हम भ्रम से अथवा मायावश अपने साथ चलता हुआ समझते हैं, वे वास्तव में हमारे अल्पकालीन सहयात्री मात्र हैं । *हमारे अकेलेपन में कोई भी हाथ बंटाने, दिलासा देने वाला नहीं है ।*

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*॥अखण्डज्योतिफरवरी १९५३पृष्ठ१५॥*

    *💦पं.श्रीराम शर्मा आचार्य💦*

              *☘संस्थापक☘*

  *🍁अखिल विश्व गायत्री  परिवार🍁*

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    🌺 ऋषि चिंतन से 5 🌺 Rishi chintan se 5 🌺

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    *❗०३ जुलाई  २०२० शुक्रवार❗*

  *॥आषाढ़ शुक्लपक्ष त्रयोदशी२०७७॥*

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                  *❗प्रणाम❗*

               *🙏वंदे मातरम्🙏*

              *‼ऋषि चिंतन ‼*

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*🌹अंत:शुद्धि की आवश्यकता🌹*

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👉 मनुष्य जो कुछ कहता है, वह वास्तव में अनुभव करता भी है या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता । वह दीखता तो एक है, किंतु है उसमें सर्वथा अनेक विरोधी तत्त्वों का सम्मिश्रण । मनुष्य माया का पुतला है । *दुनियाँ में कई दुनियाँ हैं और आदमी में कई आदमी ।* वास्तव में मनुष्य की चेतना में परत पर परत हैं । 

👉 *मनुष्य को चाहिए कि अपनी चेतना की आंतरिक परतों की सफाई करे, आत्मविश्वास उत्पन्न करे ।* ऊपरी परत को संकेत देने से कोई विशेष लाभ नहीं होगा । वास्तव में मनुष्य की उन्नति की आधारशिला यह आंतरिक परत ही है । *बाह्य कठिनाइयाँ आंतरिक कठिनाइयों का आरोपण मात्र है ।* जो व्यक्ति इस अंदरूनी परत में शक्ति उत्पन्न कर लेता है, वह अपार शक्ति का अनुभव करता है । उसे संकटों को पार करने के लिए यहीं  से शक्ति प्राप्त होती है ! ! 

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*॥अखण्ड ज्योति जून  १९५३पृष्ठ६॥*

    *💦पं.श्रीराम शर्मा आचार्य💦*

              *☘संस्थापक☘*

  *🍁अखिल विश्व गायत्री  परिवार🍁*

          *🇮🇳भारतमाता की जय🇮🇳*

                  *🇮🇳जयहिंद🇮🇳*

     *🙏🙏🙏सुप्रभात🙏🙏🙏*

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