💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 6 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐बदलाव💐💐*
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बूढ़े दादा जी को उदास बैठे देख बच्चों ने पूछा , “क्या हुआ दादा जी , आज आप इतने उदास बैठे क्या सोच रहे हैं ?”
“कुछ नहीं , बस यूँही अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोच रहा था !”, दादा जी बोले ।
“जरा हमें भी अपनी लाइफ के बारे में बताइये न …”, बच्चों ने ज़िद्द्द की ।
दादा जी कुछ देर सोचते रहे और फिर बोले , “ जब मैं छोटा था , मेरे ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं थी , मेरी कल्पनाओं की भी कोई सीमा नहीं थी …. मैं दुनिया बदलने के बारे में सोचा करता था …
जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ …बुद्धि कुछ बढ़ी ….तो सोचने लगा ये दुनिया बदलना तो बहुत मुश्किल काम है …इसलिए मैंने अपना लक्ष्य थोड़ा छोटा कर लिया … सोचा दुनिया न सही मैं अपना देश तो बदल ही सकता हूँ .
पर जब कुछ और समय बीता , मैं अधेड़ होने को आया … तो लगा ये देश बदलना भी कोई मामूली बात नहीं है …हर कोई ऐसा नहीं कर सकता है …चलो मैं बस अपने परिवार और करीबी लोगों को बदलता हूँ …
पर अफ़सोस मैं वो भी नहीं कर पाया .
और अब जब मैं इस दुनिया में कुछ दिनों का ही मेहमान हूँ तो मुझे एहसास होता है कि बस अगर मैंने खुद को बदलने का सोचा होता तो मैं ऐसा ज़रूर कर पाता …और हो सकता है मुझे देखकर मेरा परिवार भी बदल जाता …और क्या पता उनसे प्रेरणा लेकर ये देश भी कुछ बदल जाता … और तब शायद मैं इस दुनिया को भी बदल पाता !
ये कहते-कहते दादा जी की आँखें नम हो गयीं और वे धीरे से बोले, “बच्चों ! तुम मेरी जैसी गलती मत करना …कुछ और बदलने से पहले खुद को बदलना …बाकि सब अपने आप बदलता चला जायेगा।
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों, हम सभी में दुनिया बदलने की ताकत है पर इसकी शुरआत खुद से ही होती है . कुछ और बदलने से पहले हमें खुद को बदलना होगा …हमें खुद को तैयार करना होगा …अपने कौशल को मजबूत करना होगा …अपने attitude को सकारात्मक बनाना होगा …अपने लक्ष्य को फौलाद करना होगा …और तभी हम वो हर एक बदलाव ला पाएंगे जो हम सचमुच लाना चाहते हैं ।
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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐गुलाम की सीख 💐💐*
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दास प्रथा के दिनों में एक मालिक के पास अनेकों गुलाम हुआ करते थे। उन्हीं में से एक था लुक़मान।
लुक़मान था तो सिर्फ एक गुलाम लेकिन वह बड़ा ही चतुर और बुद्धिमान था। उसकी ख्याति दूर दराज़ के इलाकों में फैलने लगी थी।
एक दिन इस बात की खबर उसके मालिक को लगी, मालिक ने लुक़मान को बुलाया और कहा- सुनते हैं, कि तुम बहुत बुद्धिमान हो। मैं तुम्हारी बुद्धिमानी की परीक्षा लेना चाहता हूँ। अगर तुम इम्तिहान में पास हो गए तो तुम्हें गुलामी से छुट्टी दे दी जाएगी। अच्छा जाओ, एक मरे हुए बकरे को काटो और उसका जो हिस्सा बढ़िया हो, उसे ले आओ।
लुक़मान ने आदेश का पालन किया और मरे हुए बकरे की जीभ लाकर मालिक के सामने रख दी।
कारण पूछने पर कि जीभ ही क्यों लाया ! लुक़मान ने कहा- अगर शरीर में जीभ अच्छी हो तो सब कुछ अच्छा-ही-अच्छा होता है।
मालिक ने आदेश देते हुए कहा- “अच्छा! इसे उठा ले जाओ और अब बकरे का जो हिस्सा बुरा हो उसे ले आओ।”
लुक़मान बाहर गया, लेकिन थोड़ी ही देर में उसने उसी जीभ को लाकर मालिक के सामने फिर रख दिया।
फिर से कारण पूछने पर लुक़मान ने कहा- “अगर शरीर में जीभ अच्छी नहीं तो सब बुरा-ही-बुरा है। “
उसने आगे कहते हुए कहा- “मालिक! वाणी तो सभी के पास जन्मजात होती है, परन्तु बोलना किसी-किसी को ही आता है…क्या बोलें? कैसे शब्द बोलें, कब बोलें.. इस एक कला को बहुत ही कम लोग जानते हैं। एक बात से प्रेम झरता है और दूसरी बात से झगड़ा होता है।
कड़वी बातों ने संसार में न जाने कितने झगड़े पैदा किये हैं। इस जीभ ने ही दुनिया में बड़े-बड़े कहर ढाये हैं।जीभ तीन इंच का वो हथियार है जिससे कोई छः फिट के आदमी को भी मार सकता है तो कोई मरते हुए इंसान में भी प्राण फूंक सकता है । संसार के सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को ही मिला है। उसके सदुपयोग से स्वर्ग पृथ्वी पर उतर सकता है और दुरूपयोग से स्वर्ग भी नरक में परिणत हो सकता है। भारत के विनाशकारी महाभारत का युद्ध वाणी के गलत प्रयोग का ही परिणाम था। “
मालिक, लुक़मान की बुद्धिमानी और चतुराई भरी बातों को सुनकर बहुत खुश हुए ; आज उनके गुलाम ने उन्हें एक बहुत बड़ी सीख दी थी और उन्होंने उसे आजाद कर दिया।
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों, मधुर वाणी एक वरदान है जो हमें लोकप्रिय बनाती है वहीँ कर्कश या तीखी बोली हमें अपयश दिलाती है और हमारी प्रतिष्ठा को कम करती है। आपकी वाणी कैसी है ? यदि वो तीखी है या सामान्य भी है तो उसे मीठा बनाने का प्रयास करिये। आपकी वाणी आपके व्यत्कित्व का प्रतिबिम्ब है , उसे अच्छा होना ही चाहिए।
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*💐💐फ़र्क तो पड़ता है 💐💐*
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दौड़ते-भागते शर्मा जी जैसे ही ऑफिस पहुँच डायरेक्टर के मुंहलगे चपरासी ने उन्हें बताया- “सर ने आपको आते ही मिलने के लिए कहा है.”डरते-डरते जैसे ही वे कैबिन में घुसे, डायरेक्टर साहब एकदम से बरस पड़े- ” शर्मा जी, इससे पहले कि आप एक नई कहानी सुनाएँ, मैं अपको स्पष्ट कह देता हूँ कि आप आज आराम करिए. छुट्टी का एप्लीकेशन दीजिए और जितनी समाजसेवा करनी है, कीजिए. तंग आ चुका हूँ मैं आपकी परोपकार कथा सुन-सुनकर. क्या फ़र्क पड़ता है आपकी समाजसेवा से ? यदि नौकरी करनी है तो ढंग से कीजिए.”
शर्मा जी डायरेक्टर साहब के आदेशानुसार उस दिन की छुट्टी का एप्लीकेशन देकर ऑफिस से बाहर आकर सोचने लगे- “अभी से घर जाकर क्या कर लूँगा. क्यों न हॉस्पीटल जाकर उस बच्चे की हालचाल पता कर लूँ, जिसे किसी दुर्घटना के कारण सड़क में पड़े हालत में देखकर अस्पताल पहुँचाने के चक्कर में ऑफिस देर से पहुँचा और साहब की डाँट खाई. शायद अब तक उसे होश भी आ गया हो.” अनायस ही उनके कदम अस्पताल की ओर चल पडे. जैसे ही वे अस्पताल पहुँचे, डॉक्टर ने उन्हें बताया कि बच्चे को होश आ गया है और उसके मम्मी-पापा भी आ चुके हैं.
“आइए, आपको मिलवाता हूँ उनसे… इनसे मिलिए, शर्मा जी, जिन्होंने आज सुबह आपके बच्चे को यहाँ एडमिट कराया है. यदि समय पर ये बच्चे को यहां नहीं लाते और अपना ब्लड नहीं दिये होते, तो कुछ भी हो सकता था.”
“सर आप… ? ये आपका बेटा…?”
सामने डायरेक्टर साहब थे, हाथ जोड़कर खड़े. काटो तो खून नहीं. बोले- “शर्मा जी, हो सके तो मुझे माफ कर दीजिएगा. मैंने आपको बहुत गलत समझा पर अब मैं जान चुका हूँ कि फ़र्क तो बहुत पड़ता है आपकी समाजसेवा से.
#और कहा भी है...
*"परोपकार के लिए ही वृक्ष फल देते हैं,नदीयाँ परोपकार के लिए ही बहती हैं और गाय परोपकार के लिए ही दूध देती हैं अर्थात् यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है !"*
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*💐💐अंगूठी की कीमत💐💐*
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एक नौजवान शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला , ” गुरु जी एक बात समझ नहीं आती , आप इतने साधारण वस्त्र क्यों पहनते हैं …इन्हे देख कर लगता ही नहीं कि आप एक ज्ञानी व्यक्ति हैं जो सैकड़ों शिष्यों को शिक्षित करने का महान कार्य करता है ।
गुरु जी मुस्कुराये ।फिर उन्होंने अपनी ऊँगली से एक अंगूठी निकाली और शिष्य को देते हुए बोले , ” मैं तुम्हारी जिज्ञासा अवश्य शांत करूँगा लेकिन पहले तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो … इस अंगूठी को लेकर बाज़ार जाओ और किसी सब्जी वाले या ऐसे ही किसी दुकानदार को इसे बेच दो … बस इतना ध्यान रहे कि इसके बदले कम से कम सोने की एक अशर्फी ज़रूर लाना ।
शिष्य फ़ौरन उस अंगूठी को लेकर बाज़ार गया पर थोड़ी देर में अंगूठी वापस लेकर लौट आया ।
“क्या हुआ , तुम इसे लेकर क्यों लौट आये ?”, गुरु जी ने पुछा .
” गुरु जी , दरअसल , मैंने इसे सब्जी वाले , किराना वाले , और अन्य दुकानदारों को बेचने का प्रयास किया पर कोई भी इसके बदले सोने की एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ …”
गुरु जी बोले , ” अच्छा कोई बात नहीं अब तुम इसे लेकर किसी जौहरी के पास जाओ और इसे बेचने की कोशिश करो …”
शिष्य एक बार फिर अंगूठी लेकर निकल पड़ा , पर इस बार भी कुछ ही देर में वापस आ गया .
“क्या हुआ , इस बार भी कोई इसके बदले 1 अशर्फी भी देने को तैयार नहीं हुआ ?”, गुरूजी ने पुछा .
शिष्य के हाव -भाव कुछ अजीब लग रहे थे , वो घबराते हुए बोला , ” अरररे … नहीं गुरु जी , इस बार मैं जिस किसी जौहरी के पास गया सभी ने ये कहते हुए मुझे लौटा दिया की यहाँ के सारे जौहरी मिलकर भी इस अनमोल हीरे को नहीं खरीद सकते इसके लिए तो लाखों अशर्फियाँ भी कम हैं …”
“यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है ” , गुरु जी बोले , ” जिस प्रकार ऊपर से देखने पर इस अनमोल अंगूठी की कीमत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता उसी प्रकार किसी व्यक्ति के वस्त्रों को देखकर उसे आँका नहीं जा सकता .व्यक्ति की विशेषता जानने के लिए उसे भीतर से देखना चाहिए , बाह्य आवरण तो कोई भी धारण कर सकता है लेकिन आत्मा की शुद्धता और ज्ञान का भण्डार तो अंदर ही छिपा होता है। “
शिष्य की जिज्ञासा शांत हो चुकी थी . वह समझ चुका था कि बाहरी वेश-भूषा से व्यक्ति की सही पहचान नहीं हो सकती , जो बात मायने रखती है वो ये कि व्यक्ति भीतर से कैसा है !
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों, हमें कभी भी किसी को सिर्फ इसलिए छोटा नहीं समझना चाहिए क्योंकि उसने अच्छे कपड़े नहीं पहने या किसी को सिर्फ इसलिए बहुत बड़ा नहीं समझना चाहिए क्योंकि वो बहुत अच्छे से कपड़ें पहन रखे है । इंसान का असली गुण तो उसके भीतर होता है और वही उसे अच्छा या बुरा बनाता है ।
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*💐💐चमत्कारी ताबीज💐💐*
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किसी नयासर नामक गाँव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती थे, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं! कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।
एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।
खबर मिलते ही राम, महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला, “ महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”
महात्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- बेटा, तुम्हारी समस्या का समाधान इस चमत्कारी ताबीज में है, मैंने इसके अन्दर कुछ मन्त्र लिखकर डालें हैं जो तुम्हारी हर बाधा दूर कर देंगे। लेकिन इसे सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात शमशान में अकेले गुजारनी होगी।”
शमशान का नाम सुनते ही राम का चेहरा पीला पड़ गया, “ लल्ल..ल…लेकिन मैं रात भर अकेले कैसे रहूँगा…”, राम कांपते हुए बोला।
“घबराओ मत यह कोई मामूली ताबीज नहीं है, यह हर संकट से तुम्हे बचाएगा।”, महात्मा जी ने समझाया।
राम ने पूरी रात शमशान में बिताई और सुबह होती ही महात्मा जी के पास जा पहुंचा, “ हे महात्मन! आप महान हैं, सचमुच ये ताबीज दिव्य है, वर्ना मेरे जैसा डरपोक व्यक्ति रात बिताना तो दूर, शमशान के करीब भी नहीं जा सकता था। निश्चय ही अब मैं सफलता प्राप्त कर सकता हूँ।”
इस घटना के बाद राम बिलकुल बदल गया, अब वह जो भी करता उसे विश्वास होता कि ताबीज की शक्ति के कारण वह उसमें सफल होगा, और धीरे-धीरे यही हुआ भी…वह गाँव के सबसे सफल लोगों में गिना जाने लगा।
इस वाकये के करीब १ साल बाद फिर वही महात्मा गाँव में पधारे।
राम तुरंत उनके दर्शन को गया और उनके दिए चमत्कारी ताबीज का गुणगान करने लगा।
तब महात्मा जी बोले,- बेटे! जरा अपनी ताबीज निकालकर देना। उन्होंने ताबीज हाथ में लिया, और उसे खोला।
उसे खोलते ही राम के होश उड़ गए जब उसने देखा कि ताबीज के अंदर कोई मन्त्र-वंत्र नहीं लिखा हुआ था…वह तो धातु का एक टुकड़ा मात्र था!
राम बोला, “ ये क्या महात्मा जी, ये तो एक मामूली ताबीज है, फिर इसने मुझे सफलता कैसे दिलाई?”
महात्मा जी ने समझाते हुए कहा- ” सही कहा तुमने, तुम्हें सफलता इस ताबीज ने नहीं बल्कि तुम्हारे विश्वास की शक्ति ने दिलाई है। पुत्र, हम इंसानों को भगवान ने एक विशेष शक्ति देकर यहाँ भेजा है। वो है, विश्वास की शक्ति। तुम अपने कार्यक्षेत्र में इसलिए सफल नहीं हो पा रहे थे क्योंकि तुम्हें खुद पर यकीन नहीं था…खुद पर विश्वास नहीं था। लेकिन जब इस ताबीज की वजह से तुम्हारे अन्दर वो विश्वास पैदा हो गया तो तुम सफल होते चले गए ! इसलिए जाओ किसी ताबीज पर यकीन करने की बजाय अपने कर्म पर, अपनी सोच पर और अपने लिए निर्णय पर विश्वास करना सीखो, इस बात को समझो कि जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है और निश्चय ही तुम सफलता के शीर्ष पर पहुँच जाओगे। “
राम महात्मा जी के बात को गंभीरता से सुन रहा था और उसे आज एक बहुत बड़ी सीख मिली थी कि यदि उसे किसी भी क्षेत्र में सफल होना है तो उसे अपने प्रयत्नों पर विश्वास करना होगा। यदि वह खुद पर विश्वास कर लेता है तो उसकी सफलता का प्रतिशत हमेशा बढ़ता चला जायेगा।
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों, सफलता का सीधा सम्बन्ध आपके अंदर के विश्वास से होता है। यदि आप खुद पर यकीन रखते हैं तो आपको हाथों में अलग-अलग पत्थरों के अंगूठियां पहनने की जरूरत नहीं, माला या ताबीज के साथ की जरूरत नहीं है। बस मन में विश्वास का होना जरूरी है कि आप कर सकते हैं, सफल हो सकते हैं और आप सफल हो जायेंगे।
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