शराबी शिष्य, तीन डंडियां, और दोस्ती की आग, की प्रेरणादायक कहानियां भाग 1 prernadayak kahaniyan


प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan भाग 1 







💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  1 💮
      

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐शराबी शिष्य 💐💐*

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एक  मास्टर के सैकड़ों शिष्य थे . वे सभी नियमों का पालन करते थे और समय पर पूजा करते थे ।

 लेकिन उनमे से एक शिष्य शराबी था , वो न नियमों का पालन करता था और न ही समय पर पूजा करता था।

मास्टर वृद्ध हो रहे थे . आश्रम में  यही चर्चा थी कि मास्टर किसे अपने रहस्य  बताएँगे और अपना उत्तराधिकारी घोषित करेंगे … 


सभी का अनुमान था कि मास्टर के कुछ प्रिय शिष्यों में से एक ही अगला मास्टर बनेगा ,पर मरने से कुछ समय पहले मास्टर ने शराबी शिष्य को बुलाया और  सारे रहस्य बता कर उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया ।

ये बात किसी के गले नहीं उतरी , जल्द ही बाकी शिष्यों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया ।

एक शिष्य क्रोधित होते हुए बोला ,“ कितना शर्मनाक है ये … हमने एक गलत मास्टर के लिए अपना बहुमूल्य समय बर्वाद कर दिया , उसने हमारे जैसे गुणवान शिष्यों को चुनने की बजाये एक शराबी को चुन लिया। “

उसकी  बात सुनकर मास्टर बोले , “

पुत्रों , मैं अपने रहस्य केवल उसी को बता सकता था जिसे मैं अच्छी तरह से जानता हूँ ।

तुम सभी बड़े गुणवान हो लेकिन तुम सबने मेरे सामने हमेशा अपनी अच्छाई ही रखी अपनी बुराइयों को कभी सामने नहीं आने दिया . ये खतरनाक है; क्योंकि अक्सर इन गुणों के पीछे व्यक्ति  का घमंड , गर्व और असहिष्णुता छिपी रह जाती है . इसलिए मैंने उस शिष्य  को चुना जिसकी बुराइयों को भी  मैं देख सकता हूँ और जिसे मैं सबसे अच्छी तरह से जानता हूँ ।

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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 2 💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐तीन डंडियां 💐💐*

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गंगा के तट पर एक संत अपने शिष्यों को शिक्षा दे रहे थे, तभी एक शिष्य ने पुछा , “ गुरू जी , यदि हम कुछ नया … कुछ अच्छा करना चाहते हैं पर समाज उसका विरोध करता है तो हमें क्या करना चाहिए ?”

गुरु जी ने कुछ सोचा और बोले ,” इस प्रश्न का उत्तर मैं कल दूंगा ।

अगले दिन जब सभी शिष्य नदी के तट पर एकत्रित हुए तो गुरु जी बोले ,  आज हम एक प्रयोग करेंगे … इन तीन मछली पकड़ने वाली डंडियों को देखो , ये एक ही लकड़ी से बनी हैं और बिलकुल एक समान हैं ।

उसके बाद गुरु जी ने उस शिष्य को आगे बुलाया जिसने कल प्रश्न किया था ।

“ पुत्र , ये लो इस डंडी से मछली पकड़ो .”, गुरु जी ने निर्देश दिया ।

शिष्य ने डंडी से बंधे कांटे में आंटा लगाया और पानी में डाल दिया । फ़ौरन ही एक बड़ी मछली कांटे में आ फंसी …” जल्दी …पूरी ताकत से बाहर की ओर खींचो :, गुरु जी बोले

शिष्य ने ऐसा ही किया ,उधर मछली ने भी पूरी ताकत से भागने की कोशिश की …फलतः डंडी टूट गयी ।

“कोई बात नहीं ; ये दूसरी डंडी लो और पुनः प्रयास करो …”, गुरु जी बोले .

शिष्य ने फिर से मछली पकड़ने के लिए काँटा पानी में डाला ।

इस बार जैसे ही मछली फंसी , गुरु जी बोले , “ आराम से… एकदम हल्के हाथ से डंडी को खींचो ।”

शिष्य ने ऐसा ही किया , पर मछली ने इतनी जोर से झटका दिया कि डंडी हाथ से छूट गयी ।

गुरु जी ने कहा , “ओह्हो , लगता है मछली बच निकली , चलो इस आखिरी डंडी से एक बार फिर से प्रयत्न करो .”
शिष्य ने फिर वही किया .

पर इस बार जैसे ही मछली फंसी गुरु जी बोले , “ सावधान , इस बार न अधिक जोर लगाओ न कम …. बस जितनी शक्ति से मछली खुद को अंदर की ओर खींचे उतनी ही शक्ति से तुम डंडी को बाहर की ओर खींचो .. कुछ ही देर में मछली थक जायेगी और तब तुम आसानी से उसे बाहर निकाल सकते हो”

शिष्य ने ऐसा ही किया और इस बार मछली पकड़ में आ गयी ।

“ क्या समझे आप लोग ? गुरु जी ने बोलना शुरू किया …” ये मछलियाँ उस समाज के समान हैं जो आपके कुछ करने पर आपका विरोध करता है 
। यदि आप इनके खिलाफ अधिक शक्ति का प्रयोग करेंगे तो आप टूट जायेंगे , यदि आप कम शक्ति का प्रयोग करेंगे तो भी वे आपको या आपकी योजनाओं को नष्ट कर देंगे…लेकिन यदि आप उतने ही बल का प्रयोग करेंगे जितने बल से वे आपका विरोध करते हैं तो धीरे -धीरे वे थक जाएंगे … हार मान लेंगे … और तब आप जीत जायेंगे …।

*💐💐शिक्षा💐💐*
इसलिए कुछ उचित करने में जब ये समाज आपका विरोध करे तो समान बल प्रयोग का सिद्धांत अपनाइये और अपने लक्ष्य को प्राप्त कीजिये ।

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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  3 💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐बड़ा पद💐💐*

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                 पिता अपने बेटे के साथ पांचसितारा होटल में प्रोग्राम अटेंड करके कार से वापस जा रहे थे। रास्ते में ट्रेफिक पुलिस हवलदार ने सीट बैल्ट नहीं लगाने पर रोका और चालान बनाने लगे।


 पिता ने सचिवालय में अधिकारी होने का परिचय देते हुए रौब झाडना चाहा तो हवलदार जी ने कडे शब्दों में आगे से सीट बैल्ट लगाने की नसीहत देते हुए छोड दिया। बेटा चुपचाप सब देख रहा था। 



रास्ते में पिता " अरे मैं आइएएस लेवल के पद वाला अधिकारी हूं और कहां वो मामूली हवलदार मुझे सिखा रहा था, मैं क्या जानता नहीं क्या जरुरी है क्या नहीं", बडे अधिकारियों से बात करना तक नहीं आता, आखिर हम भी जिम्मेदारी वाले बडे पद पर हैं भई !!  " 
बेटे ने खिडकी से बगल में लहर जैसे चलती गाडियों का काफिला देखा, तभी अचानक तेज ब्रेक लगने और धमाके की आवाज आई। 


पिता ने कार रोकी, तो देखा सामने  सडक पर आगे चलती मोटरसाइकिल वाले प्रोढ को कोई तेज रफ्तार कार वाला टक्कर मारकर भाग गया था । मौके पर एक अकेला पुलिस का हवलदार उसे संभालकर साइड में बैठा रहा था।


 खून ज्यादा बह रहा था, हवलदार ने पिता को कहा " खून ज्यादा बह रहा है मैं ड्यूटि से ऑफ होकर घर जा रहा हूं और मेरे पास बाईक है आपकी कार से इसे जल्दी अस्पताल ले चलते हैं‌ शायद बच जाए।" 

बेटा घबराया हुआ चुपचाप देख रहा था। पिता ने तुरंत  घर पर इमरजेंसी का बहाना बनाया और जल्दी से बेटे को खींचकर  कार में बिठाकर चल पडा । 


बेटा अचंभित सा चुपचाप सोच रहा था  कि बडा पद वास्तव में कौनसा है !! पिता का प्रशासनिक पद या पुलिस वाले हवलदार का पद जो अभी भी उस घायल की चिंता में वहां बैठा है......….....  


अगले दिन अखबार के एक कोने में दुर्घटना में घायल को गोद में उठाकर 700 मीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले हवलदार की फोटो सहित खबर व प्रशंसा छपी थी। बेटे के होठों पर सुकुन भरी मुस्कुराहट थी, उसे अपना जवाब मिल गया था। 

*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों इंसानियत का मतलब सिर्फ खुशियां बांटना नहीं होता …बड़े पद  का असली मतलब अपने पास आई चुनोतियों का उस समय तक सामना करना होता है, जब तक उसका समाधान नही हो जाता। उस समय तक साथ देना होता है जब वो मुसीबत में हो, जब उसे हमारी सबसे ज्यादा ज़रुरत हो …।इसलिए हमें कभी भी अपने पद का घमंड नही करना चाहिए,हर समय मदद के लिए तैयार होकर अपने पद की गरिमा बनानी चाहिए।

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*💐💐दोस्ती की आग 💐💐*

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गुरु नाम के एक लड़के को पैसों की सख्त ज़रुरत थी ,उसने अपने मालिक से मदद मांगी । मालिक पैसे देने को तैयार हो गया पर उसने एक शर्त रखी , शर्त ये थी कि गुरु को बिना आग जलाये कल की रात पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी पर बितानी थी, अगर वो ऐसा कर लेता तो उसे एक बड़ा इनाम मिलता और अगर नहीं कर पाता तो उसे मुफ्त में काम करना होता।

गुरु जब दुकान से निकला तो उसे एहसास हुआ कि वाकई कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है और बर्फीली हवाएं इसे और भी मुश्किल बना रही हैं . उसे मन ही मन लगा कि शायद उसने ये शर्त कबूल कर बहुत बड़ी बेवकूफी कर दी है . घबराहट में वह तुरंत अपने दोस्त तेजल के पास पहुंचा और सारी बात बता दी ।

तेजल ने कुछ देर सोचा और बोला, “ चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करूँगा . कल रात, जब तुम पहाड़ी पर होगे तो ठीक सामने देखना मैं तुम्हारे लिए सामने वाली पहाड़ी पर सारी रात आग जल कर बैठूंगा .

तुम आग की तरफ देखना और हमारी दोस्ती के बारे में सोचना ; वो तुम्हे गर्म रखेगी।

और जब तुम रात बिता लोगे तो बाद में मेरे पास आना, मैं बदले में तुमसे कुछ लूंगा .”

गुरु अगली रात पहाड़ी पर जा पहुंचा, सामने वाली पहाड़ी पर तेजल भी आग जल कर बैठा था ।

अपने दोस्त की दी हुई हिम्मत से गुरु ने वो बर्फीली रात किसी तरह से काट ली ।मालिक ने शर्त के मुताबिक उसे ढेर सारे पैसे इनाम में दिए ।

इनाम मिलते ही वो तेजल के पास पहुंचा, और बोला,  “ तुमने कहा था कि मेरी मदद के बदले में तुम कुछ लोगे … कितने पैसे चाहिएं तुम्हे ..”

तेजल बोला, “ हाँ मैंने कुछ लेने को कहा था, पर वो पैसे नहीं हैं . मैं तो तुमसे एक वादा लेना चाहता हूँ … वादा करो कि अगर कभी मेरी ज़िन्दगी में भी बर्फीली हवाएं चलें तो तुम मेरे लिए दोस्ती की आग जलाओगे ।”

गुरु ने फ़ौरन उसे गले लगा लिया और हमेशा दोस्ती निभाने का वादा किया ।

*💐💐शिक्षा💐💐*

मित्रों, कहते हैं दोस्ती ही वो पहला रिश्ता होता है जो हम खुद बनाते हैं, बाकी रिश्तों के साथ तो हम पैदा होते हैं . सचमुच अगर हम अपनी जिंदगी से “दोस्तों ” को minus कर दें तो ज़िन्दगी कितनी खाली लगे … दोस्त होने का मतलब सिर्फ खुशियां बांटना नहीं होता …दोस्ती का असली मतलब अपने दोस्त का उस समय साथ देना होता है जब वो मुसीबत में हो, जब उसे हमारी सबसे ज्यादा ज़रुरत हो …

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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan  5  💮

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐सच्ची मदद 💐💐*

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एक नन्हा परिंदा अपने परिवार-जनों से बिछड़ कर अपने आशियाने से बहुत दूर आ गया था । उस नन्हे परिंदे को अभी उड़ान भरने अच्छे से नहीं आता था… उसने उड़ना सीखना अभी शुरू ही किया था ! उधर नन्हे परिंदे के परिवार वाले बहुत परेशान थे और उसके आने की राह देख रहे थे । इधर नन्हा परिंदा भी समझ नहीं पा रहा था कि वो अपने आशियाने तक कैसे पहुंचे?

वह उड़ान भरने की काफी कोशिश कर रहा था पर बार-बार कुछ ऊपर उठ कर गिर जाता।

कुछ दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ ये सब दृश्य बड़े गौर से देख रहा था । कुछ देर देखने के बाद वो दोनों परिंदे उस नन्हे परिंदे के करीब आ पहुंचे । नन्हा परिंदा उन्हें देख के पहले घबरा गया फिर उसने सोचा शायद ये उसकी मदद करें और उसे घर तक पहुंचा दें ।

अनजान परिंदा – क्या हुआ नन्हे परिंदे काफी परेशान हो ?

नन्हा परिंदा – मैं रास्ता भटक गया हूँ और मुझे शाम होने से पहले अपने घर लौटना है । मुझे उड़ान भरना अभी अच्छे से नहीं आता । मेरे घर वाले बहुत परेशान हो रहे होंगे । आप मुझे उड़ान भरना सीखा सकते है ? मैं काफी देर से कोशिश कर रहा हूँ पर कामयाबी नहीं मिल पा रही है ।

अनजान परिंदा – (थोड़ी देर सोचने के बाद )- जब उड़ान भरना सीखा नहीं तो इतना दूर निकलने की क्या जरुरत थी ? वह अपने मित्र के साथ मिलकर नन्हे परिंदे का मज़ाक उड़ाने लगा ।

 उन लोगो की बातों से नन्हा परिंदा बहुत क्रोधित हो रहा था ।

अनजान परिंदा हँसते हुए बोला – देखो हम तो उड़ान भरना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते हैं । इतना कहकर अनजान परिंदे ने उस नन्हे परिंदे के सामने पहली उड़ान भरी । वह फिर थोड़ी देर बाद लौटकर आया और दो-चार कड़वी बातें बोल पुनः उड़ गया । ऐसा उसने पांच- छः बार किया और जब इस बार वो उड़ान भर के वापस आया तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था ।

अनजान परिंदा अपने मित्र से- नन्हे परिंदे ने उड़ान भर ली ना? उस समय अनजान परिंदे के चेहरे पर ख़ुशी झलक रही थी ।

मित्र परिंदा – हाँ नन्हे परिंदे ने तो उड़ान भर ली लेकिन तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो मित्र? तुमने तो उसका कितना मज़ाक बनाया ।

अनजान परिंदा – मित्र तुमने मेरी सिर्फ नकारात्मकता पर ध्यान दिया । लेकिन नन्हा परिंदा मेरी नकारात्मकता पर कम और सकारात्मकता पर ज्यादा ध्यान दे रहा था । इसका मतलब यह है कि उसने मेरे मज़ाक को अनदेखा करते हुए मेरी उड़ान भरने वाली चाल पर ज्यादा ध्यान दिया और वह उड़ान भरने में सफल हुआ ।

मित्र परिंदा – जब तुम्हे उसे उड़ान भरना सिखाना ही था तो उसका मज़ाक बनाकर क्यों सिखाया ?

अनजान परिंदा – मित्र, नन्हा परिंदा अपने जीवन की पहली बड़ी उड़ान भर रहा था और मैं उसके लिए अजनबी था । अगर मैं उसको सीधे तरीके से उड़ना सिखाता तो वह पूरी ज़िंदगी मेरे एहसान के नीचे दबा रहता और आगे भी शायद ज्यादा कोशिश खुद से नहीं करता ।

मैंने उस परिंदे के अंदर छिपी लगन देखी थी। जब मैंने उसको कोशिश करते हुए देखा था तभी समझ गया था इसे बस थोड़ी सी दिशा देने की जरुरत है और जो मैंने अनजाने में उसे दी और वो अपने मंजिल को पाने में कामयाब हुआ ।अब वो पूरी ज़िंदगी खुद से कोशिश करेगा और दूसरों से कम मदद मांगेगा । इसी के साथ उसके अंदर आत्मविश्वास भी ज्यादा बढ़ेगा ।

मित्र परिंदे ने अनजान परिंदे की तारीफ करते हुए बोला तुम बहुत महान हो, जिस तरह से तुमने उस नन्हे परिंदे की मदद की वही सच्ची मदद है !

*💐💐शिक्षा💐💐*

मित्रों , सच्ची  मदद  वही  है  जो  मदद  पाने  वाले  को  ये  महसूस  न  होने  दे  कि  उसकी  मदद  की  गयी  है  . बहुत  बार  लोग सहायता तो  करते  हैं  पर  उसका  ढिंढोरा  पीटने  से  नहीं  चूकते। ऐसी सहायता किस  काम की  ! परिंदों  की  ये  कहानी  हम  इंसानो  के  लिए  भी  एक  सीख  है  कि  हम  लोगों  की  मदद  तो  करें  पर  उसे  जताएं नहीं !


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