*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐कर्ज💐💐*
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विवाह के दो वर्ष हुए थे जब सुहानी गर्भवती होने पर अपने घर राजस्थान जा रही थी ...पति शहर से बाहर थे ...
जिस रिश्ते के भाई को स्टेशन से ट्रेन मे बिठाने को कहा था वो लेट होती ट्रेन की वजह से रुकने में मूड में नहीं था इसीलिए समान सहित प्लेटफॉर्म पर बनी बेंच पर बिठा कर चला गया ....
गाड़ी को पांचवे प्लेटफार्म पर आना था ...
गर्भवती सुहानी को सातवाँ माह चल रहा था. सामान अधिक होने से एक कुली से बात कर ली....
बेहद दुबला पतला बुजुर्ग...पेट पालने की विवशता उसकी आँखों में थी ...एक याचना के साथ सामान उठाने को आतुर ....
सुहानी ने उसे पंद्रह रुपये में तय कर लिया और टेक लगा कर बैठ गई.... तकरीबन डेढ़ घंटे बाद गाडी आने की घोषणा हुई ...लेकिन वो बुजुर्ग कुली कहीं नहीं दिखा ...
कोई दूसरा कुली भी खाली नज़र नही आ रहा था.....ट्रेन छूटने पर वापस घर जाना भी संभव नही था ...
रात के साढ़े बारह बज चुके थे ..सुहानी का मन घबराने लगा ...
तभी वो बुजुर्ग दूर से भाग कर आता हुआ दिखाई दिया .... बोला चिंता न करो बिटिया हम चढ़ा देंगे गाडी में ...भागने से उसकी साँस फूल रही थी ..उसने लपक कर सामान उठाया ...और आने का इशारा किया
सीढ़ी चढ़ कर पुल से पार जाना था कयोकि अचानक ट्रेन ने प्लेटफार्म चेंज करा था जो अब नौ नम्बर पर आ रही थी
वो साँस फूलने से धीरे धीरे चल रहा था और सुहानी भी तेज चलने हालत में न थी
गाडी ने सीटी दे दी
भाग कर अपना स्लीपर कोच का डब्बा ढूंढा ....
डिब्बा प्लेटफार्म खत्म होने के बाद इंजिन के पास था। वहां प्लेटफार्म की लाईट भी नहीं थी और वहां से चढ़ना भी बहुत मुश्किल था ....
सुहानी पलटकर उसे आते हुए देख ट्रेन मे चढ़ गई...तुरंत ट्रेन रेंगने लगी ...कुली अभी दौड़ ही रहा था ...
हिम्मत करके उसने एक एक सामान रेलगाड़ी के पायदान के पास रख दिया ।
अब आगे बिलकुल अन्धेरा था ..
जब तक सुहानी ने हडबडाये कांपते हाथों से दस का और पांच का का नोट निकाला ...
तब तक कुली की हथेली दूर हो चुकी थी...
उसकी दौड़ने की रफ़्तार तेज हुई ..
मगर साथ ही ट्रेन की रफ़्तार भी ....
वो बेबसी से उसकी दूर होती खाली हथेली देखती रही ...
और फिर उसका हाथ जोड़ना नमस्ते
और आशीर्वाद की मुद्रा में ....
उसकी गरीबी ...
उसका पेट ....
उसकी मेहनत ...
उसका सहयोग ...
सब एक साथ सुहानी की आँखों में कौंध गए ..
उस घटना के बाद सुहानी डिलीवरी के बाद दुबारा स्टेशन पर उस बुजुर्ग कुली को खोजती रही मगर वो कभी दुबारा नही मिला ...
आज वो जगह जगह दान आदि करती है मगर आज तक कोई भी दान वो कर्जा नहीं उतार पाया उस रात उस बुजुर्ग की कर्मठ हथेली ने किया था ...
सच है कुछ कर्ज कभी नही उतारे जा सकते......!
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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐दिखावा💐💐*
अरे राजू भैया ऐसे किन ख्यालों में खोए बैठे हुए हो बेटी की शादी सिरपर है ऐसे में तो एक पिता खुशी में झूमते हुए दिखाई देता है और तुम हो की पार्क की इस बेंच पर अकेले बैठे हुए गहरी चिंता में डूबे हुए हो क्या हुआ कोई परेशानी है दहेज वगैरह की तो नहीं
अरे नहीं बिरजू बात वो नहीं है लड़के वाले अच्छे हैं दहेज प्रथा के विरोधी मगर सच कहूं आज बाबूजी की कहीं हुई बातें बहुत याद आ रही है जिनपर में कभी हंसा करता था मगर आज एहसास होता है कितना सच कहा करते थे
राजूभाई बड़े बुजुर्गो के बाद यूं ही सफेद नहीं होते उनके अनुभवों से ये सब ज्ञान होता है जिनसे वो अपने बच्चों को बचाने के लिए हमें आगाह करते रहते हैं वैसे क्या बात याद आ रही थी चाचाजी की
बिरजू बाबूजी अक्सर कहते थे बेटी की शादी में और मकान बनाने में लगाया गया अनुमान अक्सर गलत साबित होता है सोचो दो तीन लाख तो बजट पांच पार कर जाता है मैंने भी गीता की शादी के लिए अपना बजट तय किया हुआ था मगर .... मेरे अनुमान से लगाए गये सब खर्चे अचानक से बढ़ गये मेरे खर्चों का पूर्वानुमान गलत निकला यार लडके वालो की फरमाइशें तो होती ही है ये तो मुझे पता है मगर मेरे खुद के बच्चे ...
उन्हें शादी किसी बारात घर में नहीं बल्कि बड़े से होटल रेस्टोरेंट में चाहिए
शगुन और शादी दो प्रोग्राम है दोनों के लिए महंगी डिज़ाइनर ड्रेस चाहिए
दोनों प्रोग्राम के लिए ब्यूटिशियन भी ख़ासा पैसा लेने वाली बुक करी है
जब मैं अपनी हैसियत की बात करता हूं तो सबके सब एकसाथ बोल उठते हैं ...शादी कौन सी बार बार होती है और फिर फलां की शादी का एग्जाम्पल देना शुरू कर देते हैं मुंह फुलाकर कहते हैं आपको जैसा ठीक लगे करो
हम बस शादी में शामिल हो जायेंगे
अरे यार उन्हें कैसे समझाऊं में पैसे वाले तो अपनी शान दिखाने के लिए चकाचौंध से भरी महंगी शादियां करते है
और उनकी देखा देखी मे मध्यम वर्ग, विशेष रूप से युवा दिखावे की उस अंधी दौड़ में शामिल हो जाते हैं जो उनके लिए है ही नही
ओह ....सच कहा राजू भाई आजकल की यही परिस्थितियां कमोबेश हर परिवार में हो रही है एक पिता को पता होता है कैसे वो पाई पाई एकत्रित करके बेटी की शादी के लिए अपनी अनेकों ख्वाहिशों को अनदेखा करता है मगर आजकल के युवा बच्चों को बस दिखावा चाहिए होता है उसने वहां ऐसा किया तो में भी अपनी शादी में वहीं करुंगा वैसा ही डिजाइनर ड्रेस पहनूंगा
स्टाटर में चाइनीज फूड चाहिए कुछ गेम्स होने चाहिए
और तो और ड्रेस कोड तक ... खैर अब क्या सोचा है आपने ...
सोचना क्या है बिरजू ....अपनी भविष्यनिधि संजोकर रखीं थीं की बुढ़ापे में .... वहीं रकम निकासी का फॉर्म भरने जा रहा हूं कहते हुए राजूभाई उठकर चल दिए वहीं बिरजू पार्क की बेंच पर बैठे हुए बुदबुदाने लगा
सच है भैया बाहर वालों से लड़ना आसान है मगर अपनों से.... अपनों से नही...
*💐💐शिक्षा💐💐*
दोस्तों .... सोचिएगा लोगों के कहने पर नहीं उनके दिखावे से नहीं आपकी चादर कितनी है ये आप और आपका परिवार बखूबी जानते हैं किसी दिखावटी पन में पैर इतने मत पसारिए की चादर छोटी पड़ जाए
कम शब्दों में बड़ी बात मानना ना मानना आपके विवेक पर निर्भर है...
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*💐💐शरण💐💐*
एक गरीब आदमी की झोपड़ी पर…
रात को जोरों की वर्षा हो रही थी . सज्जन था , छोटी सी झोपड़ी थी . स्वयं और उसकी पत्नी , दोनों सोए थे . आधी रात किसी ने द्वार पर दस्तक दी .
उन सज्जन ने अपनी पत्नी से कहा - उठ ! द्वार खोल दे . पत्नी द्वार के करीब सो रही थी .
पत्नी ने कहा - इस आधी रात में जगह कहाँ है ? कोई अगर शरण माँगेगा तो तुम मना न कर सकोगे ?
वर्षा जोर की हो रही है . कोई शरण माँगने के लिए ही द्वार आया होगा न !
जगह कहाँ है ? उस सज्जन ने कहा - जगह ? दो के सोने के लायक तो काफी है , तीन के बैठने के लायक काफी हो जाएगी . तू दरवाजा खोल !
लेकिन द्वार आए आदमी को वापिस तो नहीं लौटाना है . दरवाजा खोला .कोई शरण ही माँग रहा था . भटक गया था और वर्षा मूसलाधार थी . वह अंदर आ गया . तीनों बैठकर गपशप करने लगे . सोने लायक तो जगह न थी .
थोड़ी देर बाद किसी और आदमी ने दस्तक दी . फिर उस सज्जन ने अपनी पत्नी से कहा - खोल !
पत्नी ने कहा - अब करोगे क्या ? जगह कहाँ है ? अगर किसी ने शरण माँगी तो ?
उस सज्जन ने कहा - अभी बैठने लायक जगह है फिर खड़े रहेंगे . मगर दरवाजा खोल ! जरूर कोई मजबूर है . फिर दरवाजा खोला . वह अजनबी भी आ गया . अब वे खड़े होकर बातचीत करने लगे . इतना छोटा झोपड़ा ! और खड़े हुए चार लोग !
और तब अंततः एक कुत्ते ने आकर जोर से आवाज की . दरवाजे को हिलाया . सज्जन ने कहा - दरवाजा खोलो .
पत्नी ने दरवाजा खोलकर झाँका और कहा - अब तुम पागल हुए हो !
यह कुत्ता है . आदमी भी नहीं !
सज्जन बोले - "हमने पहले भी आदमियों के कारण दरवाजा नहीं खोला था" , "अपने हृदय के कारण खोला था ! !! "
हमारे लिए कुत्ते और आदमी में क्या फर्क ?
हमने मदद के लिए दरवाजा खोला था । उसने भी आवाज दी है . उसने भी द्वार हिलाया है . उसने अपना काम पूरा कर दिया , अब हमें अपना काम करना है । दरवाजा खोलो !
उनकी पत्नी ने कहा - अब तो खड़े होने की भी जगह नहीं है !
उसने कहा - अभी हम जरा आराम से खड़े हैं , फिर थोड़े सटकर खड़े होंगे
और एक बात याद रख !
"यह कोई अमीर का महल नहीं है कि जिसमें जगह की कमी हो ! "
यह गरीब का झोपड़ा है , इसमें खूब जगह है ! !!
जगह महलों में और झोपड़ों में नहीं होती , जगह दिलों में होती है !
अक्सर आप पाएँगे कि गरीब कभी कंजूस नहीं होता ! उसका दिल बहुत बड़ा होता है ! !!
कंजूस होने योग्य उसके पास कुछ है ही नहीं . पकड़े तो पकड़े क्या ?
जैसे जैसे आदमी अमीर होता है , वैसे कंजूस होने लगता है , उसमें मोह बढ़ता है , लोभ बढ़ता है ।
जरूरतमंद को अपनी क्षमता अनुसार शरण दीजिए । दिल बड़ा रखकर अपने दिल में औरों के लिए जगह जरूर रखिये..!!
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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐चतुर चिड़िया💐💐*
एक दिन की बात है, एक चिड़िया आकाश में अपनी उड़ान भर रही होती है। रास्ते में उसे गरुड़ मिल जाता है। गरुड़ उस चिड़िया को खाने को दौड़ता है। चिड़िया उससे अपनी जान की भीख मांगती है। लेकिन गरुड़ उस पर रहम करने को तैयार नहीं होता। तब चिड़िया उसे बताती है कि मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं और उनके लालन पालन के लिए मेरा जीवित रहना जरूरी है। तब गरुड़ इस पर चिड़िया के सामने एक शर्त रखता है कि मेरे साथ दौड़ लगाओ और अगर तुमने मुझे हरा दिया तो मैं तुम्हारी जान बख्श दूंगा और तुम्हें यहां से जाने दूंगा।
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गरुड़ इस बात को जानता था कि चिड़िया का उसे दौड़ में हराना असंभव है। इसलिए उसके सामने इतनी कठिन शर्त रख देता है। चिड़िया के पास इस दौड़ के लिए हां करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन चिड़िया को इस बात का अंदाजा था कि गरुड़ को दौड़ में हराना नामुमकिन है लेकिन फिर भी वह इस दौड़ के लिए हां कर देती है। पर वह गरुड़ से कहती है कि जब तक ये दौड़ ख़त्म नहीं होता वह उसे नहीं मरेगा। गरुड़ इस बात पर राजी हो जाता है।
दौड़ शुरू होती है चिड़िया फट से जाकर गरुड़ के सिर पर बैठ जाती है और जैसे ही गरुड़ दौड़ के आखिरी स्थान पर पहुंचता है चिड़िया फट से उड़ कर लाइन के पार पहुंच जाती है और जीत जाती है। गरुड़ उसकी चतुरता से प्रसन्न हो जाता है और उसको जिंदा छोड़ देता है। चिड़िया तुरंत ही वहां से उड़ जाती है और अपने रास्ते चल देती है।
*💐💐शिक्षा:-💐💐*
कठिन परिस्थितियों में हालातों पर रोना नहीं चाहिए बल्कि समझदारी और चतुरता के साथ मुसीबत का सामना करना चाहिए। विरोधी या कार्य आपकी क्षमता से ज्यादा मजबूत हो तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पहले से ही हार मान कर बैठ जाएं बल्कि समझदारी और धैर्य से बैठ कर समस्या का समाधान ढूढ़ना चाहिए। अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए कि हम किसी भी हालत में जीत सकते हैं।
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*💐💐दुष्टों की संगति💐💐*
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पुराने समय की बात है। एक राज्य में एक राजा था। किसी कारण से वह अन्य गाँव में जाना चाहता था। एक दिन वह धनुष-बाण सहित पैदल ही चल पड़ा। चलते-चलते राजा थक गया। अत: वह बीच रास्ते में ही एक विशाल पेड़ के नीचे बैठ गया। राजा अपने धनुष-बाण बगल में रखकर, चद्दर ओढ़कर सो गया। थोड़ी ही देर में उसे गहरी नींद लग गई। उसी पेड़ की खाली डाली पर एक कौआ बैठा था। उसने नीचे सोए हुए राजा पर बीट कर दी। बीट से राजा की चादर गंदी हो गई थी। राजा खर्राटे ले रहा था।
उसे पता नहीं चला कि उसकी चादर खराब हो गई है। कुछ समय के पश्चात कौआ वहाँ से उड़कर चला गया और थोड़ी ही देर में एक हंस उड़ता हुआ आया। हंस उसी डाली पर और उसी जगह पर बैठा, जहाँ पहले वह कौआ बैठा हुआ था अब अचानक राजा की नींद खुली। उठते ही जब उसने अपनी चादर देखी तो वह बीट से गंदी हो चुकी थी। राजा स्वभाव से बड़ा क्रोधी था। उसकी नजर ऊपर वाली डाली पर गई, जहाँ हंस बैठा हुआ था। राजा ने समझा कि यह सब इसी हंस की ओछी हरकत है। इसी ने मेरी चादर गंदी की है।
क्रोधी राजा ने आव देखा न ताव, ऊपर बैठे हंस को अपना तीखा बाण चलाकर, उसे घायल कर दिया। हंस बेचारा घायल होकर नीचे गिर पड़ा और तड़पने लगा। वह तड़पते हुए राजा से कहने लगा-
'अहं काको हतो राजन्!
हंसाऽहंनिर्मला जल:।
दुष्ट स्थान प्रभावेन,
जातो जन्म निरर्थक।।'
अर्थात् हे राजन्! मैंने ऐसा कौन सा अपराध किया, तुमने मुझे अपने तीखे बाणों का निशाना बनाया है? मैं तो निर्मल जल में रहने वाला प्राणी हूँ? ईश्वर की कैसी लीला है। सिर्फ एक बार कौए जैसे दुष्ट प्राणी की जगह पर बैठने मात्र से ही व्यर्थ में मेरे प्राण चले जा रहे हैं, फिर दुष्टों के साथ सदा रहने वालों का क्या हाल होता होगा? हंस ने प्राण छोड़ने से पूर्व कहा - 'हे राजन्! दुष्टों की संगति नहीं करना। क्योंकि उनकी संगति का फल भी ऐसा ही होता है।' राजा को अपने किए अपराध का बोध हो गया। वह अब पश्चाताप करने लगा।
*💐💐शिक्षा:-💐💐*
उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हमें दुष्टों की संगति में रहने से बचना चाहिये, क्योंकि दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों की संगति का फल भी उनके जैसा ही होता हैं। साथ ही, हमें किसी भी काम को करने से पहले अच्छे से सोच-समझ लेना चाहिए। बिना सोचे-विचारे कुछ भी काम नहीं करना चाहिए।
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