प्रेरणादायक कहानियां भाग 40 prernadayak kahaniyan part 40

💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 196 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐जडी बुटी💐💐*
       
                                                                                                                                      *बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी. एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी , ” बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था , लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है ठीक से बात तक नहीं करता।"

” युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है.” , सन्यासी बोला।
"लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है , कृपया आप मुझे वो जड़ी-बूटी दे दें.” , 
महिला ने विनती की।
सन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला ,” देवी मैं तुम्हे वह जड़ी-बूटी ज़रूर दे देता, लेकिन उसे बनाने के लिए एक ऐसी चीज चाहिए जो मेरे पास नहीं है ."
”आपको क्या चाहिए मुझे बताइए मैं लेकर आउंगी .”, महिला बोली।
”मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए .”, सन्यासी बोला।

अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी, बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा, बाघ उसे देखते ही दहाड़ा , महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी।

अगले कुछ दिनों तक यही हुआ , महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती. महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता. अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता. उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी. और देखते देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया।

फिर क्या था , वह बिना देरी किये सन्यासी के पास पहुंची, और बोली ” मैं बाल ले आई बाबा ।

“बहुत अच्छे .” और ऐसा कहते हुए सन्यासी ने बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया ।

”अरे ये क्या बाबा, आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया …… अब मेरी जड़ी-बूटी कैसे बनेगी ?” महिला घबराते हुए बोली।

”अब तुम्हे किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है .” सन्यासी बोला ।” जरा सोचो , तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया….जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ? जाओ जिस तरह तुमने बाघ को अपना मित्र बना लिया उसी तरह अपने पति के अन्दर प्रेम भाव जागृत करो.।"

महिला सन्यासी की बात समझ गयी, अब उसे उसकी जड़ी-बूटी मिल चुकी थी।


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw



*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*

https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5



*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*



*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏









💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 197  💮

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐भेड़िया और बकरी💐💐*

https://youtu.be/dZdh_CGl_rQ


एक बार की बात है। कालू भेड़िया अपने घर जा रहा था। वह शेर से लड़कर आ रहा था, इसलिए गुस्से में भरा था। चलते चलते अंधेरा भी हो गया। रास्ते में एक जगह कुँआ पड़ता था पर गुस्से में होने के कारण भेड़िए को ध्यान ही नहीं रहा। गुस्से में बहुत से गलत काम हो जाते हैं, बहुत हानि हो जाती है। कालू को भी कुँए का ध्यान नहीं रहा। उसका पैर कुँए के ऊपर पड़ गया कालू कुँए में गिर गया। 

कुँए में पानी अधिक नहीं था। जैसे-तैसे कालू ने वहाँ रात बिताई। सुबह से ही उसने चिल्लाना शुरू कर दिया–कोई मुझे कुँए से निकालो पर किसी ने उसे कुँए से निकाला नहीं। ऐसी बात नहीं थी कि वहाँ कोई आया नहीं था। शेर, गीदड़, लोमड़ी, हाथी, ऊंट सभी उस जगह से गए थे। सभी ने कालू भेड़िये की आवाज सुनी थी, पर सभी यह कहते हुए चले गए कि तुम तो सभी से लड़ते–झगड़ते रहते हो। तुम कभी किसी की सहायता नहीं करते। फिर हम ही तुम्हें क्यों निकाले? उन्हें डर भी था कि यदि वे भेड़िये को निकालेंगे तो वह उन्हें काट खाएगा। 

कालू बड़ी देर तक कुँए में पड़ा पड़ा रोता–चिल्लाता रहा।

कुछ समय के बाद रंजू बकरी वहाँ से हो कर निकली। रंजू ने कालू के चिल्लाने की आवाज सुनी तो रंजू बकरी ने पूछा – तुम कौन हो? कहाँ से बोल रहे हो? 

कालू चिल्लाया– दीदी मैं कुँए में हूँ। मुझे तुरंत निकालो नहीं तो मैं मर जाऊंगा। 

रंजू को दया आ गई। वह दौड़ी-दौड़ी अपने घर गई। वहाँ से एक मोटी रस्सी लाई। रंजू ने रस्सी का एक सिरा पकड़ा और एक कुएं में लटका दिया। फिर बोली कालु भैया! तुम जल्दी से रस्सी का सिरा पकड़ कर ऊपर आ जाओ मैं दूसरा सिरा पकड़े वहाँ खड़ी हूँ। 

भेड़िया रस्सी पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर आया तक आया पर यह क्या? कालू भेड़िये का हल्का सा धक्का लगा रंजू संभल न पाई, वह कुँए में गिर पड़ी वह कुँए के अंदर से चिल्लाई कालु भैया! जल्दी निकालो नहीं तो मैं डूब जाऊंगी। पर कालू बड़ा स्वार्थी था। अपनी जान बचाने वाली बकरी की भी परवाह न की। उसने बहाना बनाया रात भर कुँए में रहने से मेरे हाथ जकड गए हैं। मैं तुम्हें निकाल नहीं सकता। कालू सोच रहा था कि बकरी मरे तो मर जाए। अब मुझे क्या पड़ी है, मैं तो बच ही गया। 

बकरी कालू की चालाकी समझ गई। वह बोली – दुष्ट कालू! सब ठीक ही कहते हैं कि तू बड़ा स्वार्थी है। तुझे बचाने के कारण मैं कुँए में गिरी, पर तुझे मेरी जरा भी परवाह नहीं। तूने न बचाया तो न सही। मुझे बचाने वाले बहुत आ जाएंगे। मैं तो दूध देती हूँ, सभी को दूध पिलाती हूँ, सभी का उपकार करती हूँ, तू नीच है जो किसी के काम नहीं आता। सब को हानि पहुंचाता है, इसलिए किसी ने भी तेरी सहायता नहीं की। 

कालू तो चला गया। थोड़ी देर बाद एक आदमी उधर से निकला उसने बकरी के मिमियाने की आवाज को सुनी। 

आदमी ने पूछा:– तू कहाँ से बोल रही है? 

बकरी बोली:– मैं यहाँ कुँए में हूँ। आदमी ने सोचा कि यह तो बड़े काम की है। इसे देखकर बच्चे खुश होंगें, यह दूध देगी। उससे जल्दी से उस बकरी को कुँए से निकाल लिया।

बकरी बोली:– काका! मैं तुम्हारी कृतज्ञ हूँ, तुमने मेरी जान बचाई बचाई है। 

आदमी ने पूछा:- कि वह कुँए में कैसे गिरी थी?  

बकरी ने सारी घटना बता दी।

आदमी बोला:- तू तो बहुत अच्छी है। चल मेरे साथ घर चल। वह बकरी को अपने घर ले गया। वहाँ बकरी उसके बच्चों के साथ खेलती रहती खूब खाती पीती और खूब दूध देती थी।

*💐💐शिक्षा💐💐*

हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है, जो भेड़िये की तरह दूसरों को हानि पहुंचाता है, किसी की सहायता नहीं करता, उसे कोई नहीं चाहता, जो बकरी की तरह दूसरों के काम आता है, अच्छे काम करता है वह सुखी रहता है।


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw



*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*

https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5



*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*



*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏









💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 198.  💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐सत्संग का महत्व 💐💐*


https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw




एक संत रोज अपने शिष्यों को गीता पढ़ाते थे। सभी शिष्य इससे खुश थे लेकिन एक शिष्य चिंतित दिखा। संत ने उससे इसका कारण पूछा। शिष्य ने कहा- गुरुदेव, मुझे आप जो कुछ पढ़ाते हैं, वह समझ में नहीं आता, मैं इसी वजह से चिंतित और दुखी हूं। गुरु ने कहा- कोयला ढोने वाली टोकरी में जल भर कर ले आओ। शिष्य चकित हुआ, आखिर टोकरी में कैसे जल भरेगा? लेकिन चूंकि गुरु ने यह आदेश दिया था, इसलिए वह टोकरी में नदी का जल भरा और दौड़ पड़ा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जल टोकरी से छन कर गिर पड़ा। उसने टोकरी में जल भर कर कई बार गुरु जी तक दौड़ लगाई लेकिन टोकरी में जल टिकता ही नहीं था। तब वह अपने गुरुदेव के पास गया और बोला- गुरुदेव, टोकरी में पानी ले आना संभव नहीं, कोई फायदा नहीं। गुरु बोले- फायदा है। टोकरी में देखो। शिष्य ने देखा- बार बार पानी में कोयले की टोकरी डुबाने से स्वच्छ हो गई है। उसका कालापन धुल गया है। गुरु ने कहा- ठीक जैसे कोयले की टोकरी स्वच्छ हो गई और तुम्हें पता भी नहीं चला। उसी तरह सत्संग बार बार सुनने से ही कृपा शुरू हो जाती है । भले ही अभी तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा है लेकिन तुम सत्संग का लाभ अपने जीवन मे जरुर महसूस करोगे और हमेशा गुरु की रहमत तुम पर बनी रहेगी!



💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw



कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇

https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5


वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए msg करें-👇
https://t.me/DenikSuvichar


💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐



सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏







💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 199.  💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐राम चरित्र मानस💐💐*



एक दिन संध्या के समय सरयू के तट पर तीनों भाइयों संग टहलते श्रीराम से महात्मा भरत ने कहा, "एक बात पूछूं भईया?

माता कैकई ने आपको वनवास दिलाने के लिए मंथरा के साथ मिल कर जो षड्यंत्र किया था, क्या वह राजद्रोह नहीं था?

उनके षड्यंत्र के कारण एक ओर राज्य के भावी महाराज और महारानी को चौदह वर्ष का वनवास झेलना पड़ा तो दूसरी ओर पिता महाराज की दुखद मृत्यु हुई। ऐसे षड्यंत्र के लिए सामान्य नियमों के अनुसार तो मृत्युदंड दिया जाता है, फिर आपने माता कैकई को दण्ड क्यों नहीं दिया?

राम मुस्कुराए…
बोले, "जानते हो भरत, किसी कुल में एक चरित्रवान और धर्मपरायण पुत्र जन्म ले ले तो उसका जीवन उसके असँख्य पीढ़ी के पितरों के अपराधों का प्रायश्चित कर देता है। जिस माँ ने तुम जैसे महात्मा को जन्म दिया हो उसे दण्ड कैसे दिया जा सकता है भरत ?"

भरत संतुष्ट नहीं हुए।
कहा, "यह तो मोह है भइया, और राजा का दण्डविधान मोह से मुक्त होता है। एक राजा की तरह उत्तर दीजिये कि आपने माता को दंड क्यों नहीं दिया, समझिए कि आपसे यह प्रश्न आपका अनुज नहीं, अयोध्या का एक सामान्य नागरिक कर रहा है।

राम गम्भीर हो गए। कुछ क्षण के मौन के बाद कहा, "अपने सगे-सम्बन्धियों के किसी अपराध पर कोई दण्ड न देना ही इस सृष्टि का कठोरतम दण्ड है भरत!”

माता कैकई ने अपनी एक भूल का बड़ा कठोर दण्ड भोगा है। वनवास के चौदह वर्षों में हम चारों भाई अपने अपने स्थान से परिस्थितियों से लड़ते रहे हैं, पर माता कैकई हर क्षण मरती रही हैं। 

अपनी एक भूल के कारण उन्होंने अपना पति खोया, अपने चार बेटे खोए, अपना समस्त सुख खोया, फिर भी वे उस अपराधबोध से कभी मुक्त न हो सकीं। वनवास समाप्त हो गया तो परिवार के शेष सदस्य प्रसन्न और सुखी हो गए, पर वे कभी प्रसन्न न हो सकीं। *कोई राजा किसी स्त्री को इससे कठोर दंड क्या दे सकता है?

मैं तो सदैव यह सोच कर दुखी हो जाता हूँ कि मेरे कारण अनायास ही मेरी माँ को इतना कठोर दण्ड भोगना पड़ा।"

राम के नेत्रों में जल उतर आया था, और भरत आदि भाई मौन हो गए थे।

राम ने फिर कहा, "और उनकी भूल को अपराध समझना ही क्यों भरत! यदि मेरा वनवास न हुआ होता तो संसार भरत और लक्ष्मण जैसे भाइयों के अतुल्य भ्रातृप्रेम को कैसे देख पाता। मैंने तो केवल अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन मात्र किया था, पर तुम दोनों ने तो मेरे स्नेह में चौदह वर्ष का वनवास भोगा। वनवास न होता तो यह संसार सीखता कैसे कि भाइयों का सम्बन्ध होता कैसा है।"
भरत के प्रश्न मौन हो गए थे। वे अनायास ही बड़े भाई से लिपट गए!
राम कोई नारा नहीं हैं।

राम एक आचरण हैं, एक चरित्र हैं, एक जीवन जीने की शैली हैं।

*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw



कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇

https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5



💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐



सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏









💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 200.  💮




🌳🦚आज की कहानी🦚🌳


*💐💐भक्त और भगवान💐💐**


कृष्ण भगवान का एक बहुत बड़ा भक्त हुआ लेकिन वो बेहद गरीब था।

एक दिन उसने अपने शहर के सब से बड़े "गोविन्द गोधाम" की महिमा सुनी और उसका वहाँ जाने को मन उत्सुक हो गया।

कुछ दिन बाद जन्माष्टमी आने वाली थी उसने सोचा मै प्रभु के साथ जन्माष्टमी "गोविन्द गोधाम" में मनाऊँगा।

गोंविंद गोधाम उसके घर से बहुत दूर था। जन्माष्टमी वाले दिन वो सुबह ही घर से चल पड़ा।

उसके मन में कृष्ण भगवान को देखने का उत्साह और मन में भगवान के भजन गाता जा रहा था।

रास्ते में जगह जगह लंगर और पानी की सेवा हो रही थी, वो यह देखकर बहुत आनंदित हुआ की वाह प्रभु आपकी लीला ! मैने तो सिर्फ सुना ही था कि आप गरीबो पर बड़ी दया करते हो आज अपनी आँखों से देख भी लिया। 

सब गरीब और भिखारी और आम लोग एक ही जगह से लंगर प्रशाद पाकर कितने खुश है।

भक्त ऑटो में बैठा ही देख रहा था उसने सबके देने पर भी कुछ नही लिया और सोचा पहले प्रभु के दर्शन करूँगा फिर कुछ खाऊँगा ! क्योंकि आज तो वहाँ ग़रीबो के लिये बहुत प्रशाद का इंतेज़ाम किया होगा।

रास्ते में उसने भगवान के लिए थोड़े से अमरुद का प्रशाद लिया और बड़े आनंद में था भगवान के दर्शन को लेकर।

भक्त इतनी कड़ी धूप में भगवान के घर पहुँच गया और मंदिर की इतनी प्यारी सजावट देखकर भावविभोर हो गया।

भक्त ने फिर मंदिर के अंदर जाने का किसी से रास्ता पूछा।किसी ने उसे रास्ता बता दिया और कहा यह जो लाईने लगी हुई है आप भी उस लाइन में लग जाओ।

वो भक्त भी लाईन में लग गया वहाँ बहुत ही भीड़ थी पर एक और लाइन उसके साथ ही थी पर वो एकदम खाली थी।

भक्त को बड़ी हैरानी हुई की यहाँ इतनी भीड़ और यहाँ तो बारी ही नही आ रही और वो लाइन से लोग जल्दी जल्दी दर्शन करने जा रहे है।

उस भक्त से रहा न गया उसने अपने साथ वाले भक्त से पूछा की भैया यहाँ इतनी भीड़ और वो लाइन इतनी खाली क्यों है और वहाँ सब जल्दी जल्दी दर्शन के लिए कैसे जा रहे है वो तो हमारे से काफी बाद में आए है।

उस दूसरे भक्त ने कहा भाई यह VIP लाइन है जिसमे शहर के अमीर लोग है।

भक्त की सुनते ही आँखे खुली रह गई उसने मन में सोचा भगवान के दर पे क्या अमीर क्या गरीब यहाँ तो सब समान होते है।

कितनी देर भूखे प्यासे रहकर उस भक्त की बारी दरबार में आ ही गई और भगवान को वो दूर से देख रहा था और उनकी छवि को देखकर बहुत आनंदित हो रहा था।

वो देख रहा था की भगवान को तो सब लोग यहाँ छप्पन भोग चढ़ा रहे है और वो अपने थोड़े से अमरुद सब से छुपा रहा था।

जब दर्शन की बारी आई तो सेवादारो ने उसे ठीक से दर्शन भी नही करने दिए और जल्दी चलो जल्दी चलो कहने लगे। उसकी आँखे भर आई और उसने चुपके से अपने वो अमरुद वहाँ रख दिए और दरबार से बाहर चला गया।

दरबार के बाहर ही लंगर प्रशाद लिखा हुआ था। भक्त को बहुत भूख लगी थी सोचा अब प्रशाद ग्रहण कर लू ।

जेसे ही वो लंगर हाल के गेट पर पहुँचा तो 2 दरबान खड़े थे वहाँ उन्होंने उस भक्त को रोका और कहा पहले VIP पास दिखाओ फिर अंदर जा सकोगे।

भक्त ने कहाँ यह VIP पास क्या होता है मेरे पास तो नही है। उस दरबान ने कहा की यहाँ जो अमीर लोग दान करते है उनको पास मिलता है और लंगर सिर्फ वो ही यहाँ खा सकते हैं।

भक्त की आँखों में इतने आँसू आ गए और वो फूट फूट कर रोने लगा और भगवान से नाराज़ हो गया और अपने घर वापिस जाने लगा।

रास्ते में वो भगवान से मन में बातें करता रहा और उसने कहा प्रभु आप भी अमीरों की तरफ हो गए आप भी बदल गए प्रभु मुझे आप से तो यह आशा न थी और सोचते सोचते सारे रास्ते रोता रहा।

भक्त घर पर पहुँच कर रोता रोता सो गया।

भक्त को भगवान् ने नींद में दर्शन दिए और भक्त से कहा तुम नाराज़ मत होओ मेरे प्यारे भक्त

भगवान ने कहा अमीर लोग तो सिर्फ मेरी मूर्ति के दर्शन करते है।अपने साक्षात् दर्शन तो मै तुम जैसे भक्तों को देता हूँ ...

और मुझे छप्पन भोग से कुछ भी लेंना देंना नही है मै तो भक्त के भाव खाता हूँ और उनके आँसू पी लेता हूँ और यह देख मै तेरे भाव से चढ़ाए हुए अमरुद खा रहा हूँ।

भक्त का सारा संदेह दूर हुआ और वो भगवान के साक्षात् दर्शन पाकर गदगद हो गया और उसका गोविंद गोधाम जाना सफल हुआ और भगवान को खुद उसके घर चल कर आना पड़ा।

भगवान भाव के भूखे है बिन भाव के उनके आगे चढ़ाए छप्पन भोग भी फीके है !!!


💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw



कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇

https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5



💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐



सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏






एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.