प्रेरणादायक कहानियां भाग 55 prernadayak kahaniyan part 55




💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 271 💮


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*💐💐आम का मोह💐💐*

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एक बार..गुरू ने अपने शिष्य को समझाते हुए, आम के पेंड की कहानी सुनाई – एक आम का वृक्ष था। जिसमे ढेर सारे आम पके हुए थे, एक दिन उस पेंड का मालिक आया और पेंड पर चढ़कर सारे आम तोड़ने लगा।

परन्तु एक आम का फल वृक्ष से दूर होने का मोह छोड़ नहीं पाया और वही कहीं पत्तों की आड़ में छिप गया। उस पेंड के मालिक को जब लगा कि उसने सारे आम तोड़ लिया है तब वह नीचे उतर गया और वहां से चला गया, यह सब वह छिपा हुआ आम देख रहा था।

फिर दूसरे दिन जब उस आम ने देखा के उसके साथ के सारे आम तो जा चुके हैं केवल उसी का मोह उसे पेंड से अलग होने नहीं दे रहा है। उसे अपने मित्र आमों की याद सताने लगी। 

वह बार-बार सोचता कि नीचे कूद जाऊ और अपने दोस्तों से जा मिलु परन्तु उसे पेंड का मोह अपनी ओर खींचने लगता, आम रोजाना इसी सोंच में डूबा रहता।


 
चिंता का यह कीड़ा उसे लगातार काटे जा रहा था जल्द ही वह सूखने लगा और एक दिन वह गुठली और छिलका के रूप में ही बस रह गया, उसके अंदर का सारा रस समाप्त हो गया था। 

अब अपना आकर्षण खो देने के कारण उसके तरफ कोई देखता भी नहीं था वह बहुत पछताने लगा की संसार का कोई सेवा नहीं कर सका, व वह लोगों का काम भी नहीं आ सका, आखिरकार एक दिन तेज हवा का झोंका आया और वह डाली टूटकर नीचे गिर गया 

दोस्तों “आम का मोह” कहानी का तात्पर्य या प्रेरणा, सन्देश यह है कि जरुरत से ज्यादा मोह आपको व्यर्थ बना सकता है, वो कहते हैं ना कि कही पहुंचे के लिए कही से निकलना बहुत जरुरी होता है।

ठीक उसी तरह सफल होने के लिए मोह का त्याग करना आवश्यक होता है चाहे वह मोह आपके घर परिवार दोस्त यार आदि का हो चाहे आपके कम्फर्ट जोन का..!!

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐मदद💐💐*


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एक समय मोची का काम करने वाले व्यक्ति को रात में भगवान ने सपना दिया और कहा कि कल सुबह मैं तुझसे मिलने तेरी दुकान पर आऊंगा।

मोची की दुकान काफी छोटी थी और उसकी आमदनी भी काफी सीमित थी। खाना खाने के बर्तन भी थोड़े से थे। इसके बावजूद वो अपनी जिंदगी से खुश रहता था। 

एक सच्चा, ईमानदार और परोपकार करने वाला इंसान था। इसलिए ईश्वर ने उसकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया।

मोची ने सुबह उठते ही तैयारी शुरू कर दी। भगवान को चाय पिलाने के लिए दूध, चायपत्ती और नाश्ते के लिए मिठाई ले आया। दुकान को साफ कर वह भगवान का इंतजार करने लगा। उस दिन सुबह से भारी बारिश हो रही थी। थोड़ी देर में उसने देखा कि एक सफाई करने वाली बारिश के पानी में भीगकर ठिठुर रही है। मोची को उसके ऊपर बड़ी दया आई और भगवान के लिए लाए गये दूध से उसको चाय बनाकर पिलाई।

दिन गुजरने लगा। दोपहर बारह बजे एक महिला बच्चे को लेकर आई और कहा कि मेरा बच्चा भूखा है इसलिए पीने के लिए दूध चाहिए। मोची ने सारा दूध उस बच्चे को पीने के लिए दे दिया। इस तरह से शाम के चार बज गए। मोची दिनभर बड़ी बेसब्री से भगवान का इंतजार करता रहा।

तभी एक बूढ़ा आदमी जो चलने से लाचार था आया और कहा कि मैं भूखा हूं और अगर कुछ खाने को मिल जाए तो बड़ी मेहरबानी होगी। मोची ने उसकी बेबसी को समझते हुए मिठाई उसको दे दी। इस तरह से दिन बीत गया और रात हो गई।

रात होते ही मोची के सब्र का बांध टूट गया और वह भगवान को उलाहना देते हुए बोला कि "वाह रे भगवान सुबह से रात कर दी मैंने तेरे इंतजार में लेकिन तू वादा करने के बाद भी नहीं आया। क्या मैं गरीब ही तुझे बेवकूफ बनाने के लिए मिला था।"

तभी आकाशवाणी हुई और भगवान ने कहा कि " मैं आज तेरे पास एक बार नहीं, तीन बार आया और तीनों बार तेरी सेवाओं से बहुत खुश हुआ। और तू मेरी परीक्षा में भी पास हुआ है, क्योंकि तेरे मन में परोपकार और त्याग का भाव सामान्य मानव की सीमाओं से परे हैं।"

*💐💐शिक्षा:-💐💐*

किसी भी मजबूर या ऐसा व्यक्ति जिसको आपकी मदद की जरूरत है उसकी मदद जरूर करना चाहिए। क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा है'। और मदद की उम्मीद रखने वाले, जरूरतमंद और लाचार लोग धरती पर भगवान की तरह होते हैं। जिनकी सेवा से सुकून के साथ एक अलग संतुष्टी का एहसास होता है..!!



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*💐💐भाई तूं सचमुच बड़ा हो गया है💐💐*

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मायके आयी रमा, माँ को हैरानी से देख रही थी। माँ बड़े ध्यान से आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थी। दाल, रोटी, सब्जी और रायता। फिर झट से फोटो खींच व्हाट्सप्प करने लगीं। 

"माँ ये खाना खाने से पहले फोटो लेने का क्या शौक हो गया है आपको ?"
 
"अरे वो जतिन बेचारा, इतनी दूर रह हॉस्टल का खाना ही खा रहा है। कह रहा था की आप रोज लंच और डिनर के वक्त अपने खाने की तस्वीर भेज दिया करो उसे देख कर हॉस्टल का खाना खाने में आसानी रहती है। "

"क्या माँ लाड-प्यार में बिगाड़ रखा है तुमने उसे। वो कभी बड़ा भी होगा या बस ऐसी फालतू की जिद करने वाला बच्चा ही बना रहेगा !" रमा ने शिकायत की। 

रमा ने खाना खाते ही झट से जतिन को फोन लगाया। 

"जतिन, माँ की ये क्या ड्यूटी लगा रखी है ? इतनी दूर से भी माँ को तकलीफ दिए बिना तेरा दिन पूरा नहीं होता क्या ?"

*"अरे नहीं दीदी ऐसा क्यों कह रही हो। मैं क्यों करूंगा माँ को परेशान ?"*

*"तो प्यारे भाई ये लंच और डिनर की रोज फोटो क्यों मंगवाते हो ?"*

बहन की शिकायत सुन जतिन हंस पड़ा। फिर कुछ गंभीर स्वर में बोल पड़ा :-

*"दीदी पापा की मौत, तुम्हारी शादी और मेरे हॉस्टल जाने के बाद अब माँ अकेली ही तो रह गयी हैं। पिछली बार छुट्टियों में घर आया तो कामवाली आंटी ने बताया की वो किसी-किसी दिन कुछ भी नहीं बनाती। चाय के साथ ब्रेड खा लेती हैं या बस खिचड़ी। पूरे दिन अकेले उदास बैठी रहती हैं। तब उन्हें रोज ढंग का खाना खिलवाने का यही तरीका सूझा। मुझे फोटो भेजने के चक्कर में दो टाइम अच्छा खाना बनाती हैं। फिर खा भी लेती हैं और इस व्यस्तता के चलते ज्यादा उदास भी नहीं होती*। "

जवाब सुन रमा की आंखें छलक आयी। रूंधे गले से बस इतना बोल पायी 

*भाई तू सच में बड़ा हो गया है*...

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*💐💐गैर हाज़िर कन्धे💐💐*

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विश्वास साहब अपने आपको भागयशाली मानते थे। कारण यह था कि उनके दोनो पुत्र आई.आई.टी. करने के बाद लगभग एक करोड़ रुपये का वेतन अमेरिका में प्राप्त कर रहे थे। विश्वास साहब जब सेवा निवृत्त हुए तो उनकी इच्छा हुई कि उनका एक पुत्र भारत लौट आए और उनके साथ ही रहे।

 परन्तु अमेरिका जाने के बाद कोई पुत्र भारत आने को तैयार नहीं हुआ, उल्टे उन्होंने विश्वास साहब को अमेरिका आकर बसने की सलाह दी। विश्वास साहब अपनी पत्नी भावना के साथ अमेरिका गये; परन्तु उनका मन वहाँ पर बिल्कुल नहीं लगा और वे भारत लौट आए।

दुर्भाग्य से विश्वास साहब की पत्नी को लकवा हो गया और पत्नी पूर्णत: पति की सेवा पर निर्भर हो गई।प्रात: नित्यकर्म से लेकर खिलाने–पिलाने, दवाई देने आदि का सम्पूर्ण कार्य विश्वास साहब के भरोसे पर था। पत्नी की जुबान भी लकवे के कारण चली गई थी। विश्वास साहब पूर्ण निष्ठा और स्नेह से पति धर्म का निर्वहन कर रहे थे।

एक रात्रि विश्वास साहब ने दवाई वगैरह देकर भावना को सुलाया और स्वयं भी पास लगे हुए पलंग पर सोने चले गए। रात्रि के लगभग दो बजे हार्ट अटैक से विश्वास साहब की मौत हो गई। पत्नी प्रात: 6 बजे जब जागी तो इन्तजार करने लगी कि पति आकर नित्य कर्म से निवृत्त होने मे उसकी मदद करेंगे। इन्तजार करते करते पत्नी को किसी अनिष्ट की आशंका हुई। चूँकि पत्नी स्वयं चलने में असमर्थ थी, उसने अपने आपको पलंग से नीचे गिराया और फिर घसीटते हुए अपने पति के पलंग के पास पहुँची।

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उसने पति को हिलाया–डुलाया पर कोई हलचल नहीं हुई। पत्नी समझ गई कि विश्वास साहब नहीं रहे।पत्नी की जुबान लकवे के कारण चली गई थी; अत: किसी को आवाज देकर बुलाना भी पत्नी के वश में नहीं था। घर पर और कोई सदस्य भी नहीं था। फोन बाहर ड्राइंग रूम मे लगा हुआ था। पत्नी ने पड़ोसी को सूचना देने के लिए घसीटते हुए फोन की तरफ बढ़ना शुरू किया। लगभग चार घण्टे की मशक्कत के बाद वह फोन तक पहुँची और उसने फोन के तार को खींचकर उसे नीचे गिराया। पड़ोसी के नंबर जैसे तैसे लगाये।

पड़ौसी भला इंसान था, फोन पर कोई बोल नहीं रहा था, पर फोन आया था, अत: वह समझ गया कि मामला गंभीर है।उसने आस– पड़ोस के लोगों को सूचना देकर इकट्ठा किया, दरवाजा तोड़कर सभी लोग घर में घुसे। उन्होने देखा -विश्वास साहब पलंग पर मृत पड़े थे तथा पत्नी भावना टेलीफोन के पास मृत पड़ी थी।पहले विश्वास और फिर भावना की मौत हुई। जनाजा दोनों का साथ–साथ निकला। 

पूरा मोहल्ला कंधा दे रहा था परन्तु दो कंधे मौजूद नहीं थे जिसकी माँ–बाप को उम्मीद थी। शायद वे कंधे करोड़ो रुपये की कमाई के भार से पहले ही दबे हुए थे।

*💐💐शिक्षा :-💐💐*

 अपने बच्चों को उच्चशिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी दीजिए ताकि वो जहां भी जाये सबका समान करे और अपने आचरण से खुद के साथ परिवार का नाम भी रोशन करे ।

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐अपना फर्ज💐💐*


अरे पापा आप अभी तक तैयार नहीं हुए। बैग कहां है? आपका। चलिए मैं पैक करती हूं। पापा ने एक उदास नजर निली पर डाली निली बेटा मैं कहीं नहीं जाऊंगा। ये घर तेरी मां की यादों से भरा हुआ है।निली की ‌आंखे भर आई पापा मां को गये छह महीने हो गए हैं आपकी तबियत भी ठीक नहीं है ऐसे में मैं आपको अकेले नहीं छोड़ सकती।आप मेरे घर चल रहे हैं मेरे साथ। बेटा मैं तेरे घर कैसे रह सकता हूं? 

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बेटी के घर का तो लोग पानी तक नहीं पीते हैं। फिर वहां तेरे सास ससुर भी हैं ।उन्हें मेरा वहां रहना कैसे अच्छा लग सकता है।आखिर हूं तो मैं एक बाहरी आदमी। पापा वो लोग ऐसे नहीं हैं वो मेरे साथ कितने अच्छे हैं।निली पापा का हाथ अपने हाथ में लेकर बैठ गई। पिछली बार आपको शुगर का अटैक आया था । कितनी मुश्किल से ठीक... कहते हुए , उसकी आंखों में आंसू आ गए। पापा मैं आपकी इकलौती बेटी हूं।आपकी सारी जिम्मेदारी अब मेरी है। बस मैं और कुछ नहीं सुनुंगी। 

पापा सोच में डूब गए अनिल (दामाद) जी ने तो एक बार भी नहीं कहा। हां ये जरूर कहा था कि पापा हम आते रहेंगे आपसे मिलने।निली तूने दामाद जी को पूछा। अरे पापा उनकी और मेरी राय अलग थोडे़ ही है।निली पापा को लेकर अपने घर आ गई। उसके सास-ससुर समधी को देख कर चौंक गए अनिल ने भी पैर छुए और कहा अच्छा किया पापा जो आप कुछ दिन के लिए यहां आ ग‌ए। पापा रहने तो लगे पर उन्हें लग‌ रहा‌ था कि शायद दामाद और उनके माता-पिता उनके यहां आने से खुश नहीं हैं। एक दिन पापा लॉन में घूम रहे थे कि अचानक उन्हें अनिल की आवाज सुनाई दी।

निली पापा यहां पर कब तक रहेंगे। ऐसा क्यों पूछ रहे हैं आप। वहां पर उनका है ही कौन‌ और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। अरे तुम समझ नहीं रही हो हमें तो अपने घर में ही अजीब सा महसूस होने लगा है। हमें किसे? अच्छा मम्मी-पापा जी ने कहा आपसे।अब तुम जो भी समझो। अरे वहां पर उनकी अच्छी व्यवस्था कर सकती हो। पापा और नहीं सुन सके कांपते हुए कदमों से वापस आ ग‌ए। अगले दिन जाने की तैयारी करने लगे।

निली बोली पापा ऐसे कैसे जायेंगे आप। पापा उसे ‌डांटने लगे निली मेरी फिजूल में चिंता मत करो अपने पति और सास ससुर का ध्यान रखो बेटा मैं अपना ख्याल खुद रख सकता हूं।निली बेटा बहुत दिन हो गए अब जाना चाहिेए मैं अनिल से बात करती हूं। अभी आपकी तबियत ठीक नहीं है। जब आप ठीक हो जाएंगे तो मैं आपको खुद छोड़ आऊंगी। नहीं निली देखो मैं तुमसे नाराज हो जाऊंगा।निली नाश्ता बनाने लगी। 

सोच रही थी कि पापा को किसी ने कुछ तो कहा है। नाश्ता करने के बाद उसने कहा आज पापा जा रहे हैं।वह अपने सास, ससुर और अनिल का चेहरा देख रही थी कि उनके चेहरे पर चमक आ गई थी। तभी उसने कहा कि मैंने एक फैसला किया है कि पापा इतनी बड़ी कोठी में अकेले कैसे रहेंगे। सोच रही हूं कि गरीब बच्चों के लिए उसमें एक छोटा-सा स्कूल खोल दिया जाय। 

पापा और मैं मिल कर एक ट्रस्ट बनाएंगे ताकि पापा के बाद भी स्कूल चलता रहे। और पापा आपकी वो जमीन पडी़ है उसे बेच देते हैं दो करोड़ की वैल्यू है उसकी उसे ट्रस्ट के फंड में जमा कर देंगे उसके इंट्रेस्ट से उन गरीब बच्चों की फीस में मदद करेंगे जो कुछ करना चाहते हैं उसमें योगदान देंगे। बाकी आपकी पेंशन और फंड आपके लिए बहुत है। पापा मैं आज से ही इस पर काम शुरू करती हूं। पापा हतप्रभ हो कर उसे देख रहे थे।

अनिल की आंखों के सामने तो अंधेरा छा गया उसके मम्मी पापा का मुंह खुला रह गया। मन ही मन हिसाब करने लगा पांच करोड़ की कोठी दो करोड़ की जमीन और फंड इतना बड़ा नुकसान। जब‌ निली पापा को छोड़कर लौटी तो अनिल उसका इंतजार कर रहा था। ये सब क्या बकवास कर रही थी तुम।निली मुस्कराई और बोली ये बकवास नहीं सच है। ऐसा मैं इसलिए करूंगी कि किसी को भी मेरे पिता की मौत का इंतजार न रहे। 

पापा ने मेरी शादी पर ऐसी कौन सी चीज है जो नहीं दी ।अनिल गुस्से से बोला ये तो उनका फर्ज था।फर्ज सिर्फ लड़की के बाप का होता है। क्योंकि उसने लड़की पैदा करने की गलती की है। मैं अपने पापा की इकलौती बेटी हूं। तो क्या मेरा फर्ज नहीं था उनकी देखभाल करने का वो भी ऐसे वक्त में जब उनकी तबीयत ठीक नहीं है। और उन्हें सहारे की जरूरत है। 

माफी चाहती हूं कि उनके कुछ दिन यहां रहने से सबको तकलीफ हुई। मैंने कभी तुम्हें तुम्हारे फर्ज निभाने से नहीं रोका। अपने सास ससुर की सेवा में भी कोई कमी नहीं रखी। तुम मुझे मेरे पिता के प्रति मेरा फर्ज निभाने से नहीं रोक सकते। उसकी आवाज में दृढ़ता थी,अनिल खामोश हो कर उसे देख रहा था। 

*💐💐शिक्षा💐💐*

हर संतान का यह फर्ज रहता है कि वो अपने माँ पिता के साथ साथ अपने सास ससुर की भी जिम्मेदारिया निभाये।जिससे दो परिवारों का रिश्ता हमेशा अटूट बना रहे।

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