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| Gayatri pariwar images |
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 311 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐माँ-बाप के लिए सीख💐💐*
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एक वकील साहब ने अपने बेटे का रिश्ता तय किया....
कुछ दिनों बाद, वकील साहब होने वाले समधी के घर गए
तो देखा कि होने वाली समधन खाना बना रही थीं।
सभी बच्चे और होने वाली बहू टी वी देख रहे थे। वकील
साहब ने चाय पी, कुशल जाना और चले आये।
एक माह बाद, वकील साहब समधी जी के घर, फिर गए।
देखा, भावी समधन जी झाड़ू लगा रहीं थी, बच्चे पढ़ रहे थे
और होने वाली बहू सो रही थी। वकील साहब ने खाना
खाया और चले आये।
कुछ दिन बाद, वकील साहब किसी काम से फिर होने
वाले समधी जी के घर गए !! घर में जाकर देखा, होने वाली
समधन बर्तन साफ़ कर रही थी, बच्चे टीवी देख रहे थे और होने
वाली #बहू खुद के हाथों में नेलपेंट लगा रही थी।
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
वकील साहब ने घर आकर, गहन सोच-विचार कर लड़की
वालों के यहाँ खबर पहुचाई, कि हमें ये रिश्ता मंजूर नहीं है"
...कारण पूछने पर वकील साहब ने कहा कि, "मैं होने वाले
समधी के घर तीन बार गया !!
तीनों बार, सिर्फ समधन जी ही घर के काम काज में व्यस्त
दिखीं। एक भी बार भी मुझे होने वाली बहू घर का काम
काज करते हुए नहीं दिखी। जो बेटी अपने सगी माँ को हर
समय काम में व्यस्त पा कर भी उन की मदद करने का न सोचे,
उम्र दराज माँ से कम उम्र की, जवान हो कर भी स्वयं की
माँ का हाथ बटाने का जज्बा न रखे,,, वो किसी और की
माँ और किसी अपरिचित परिवार के बारे में क्या
सोचेगी।
https://youtu.be/PdS8bRTJgO0
"मुझे अपने बेटे के लिए एक बहू की आवश्यकता है, किसी
गुलदस्ते की नहीं, जो किसी फ्लावर पाटॅ में सजाया
जाये !!
इसलिये सभी माता-पिता को चाहिये, कि वे इन छोटी
छोटी बातों पर अवश्य ध्यान दें ।
#बेटी कितनी भी प्यारी क्यों न हो, उससे घर का काम
काज अवश्य कराना चाहिए।
समय-समय पर डांटना भी चाहिए, जिससे ससुराल में
ज्यादा काम पड़ने या डांट पड़ने पर उसके द्वारा गलत करने
की कोशिश ना की जाये।
हमारे घर बेटी पैदा होती है, हमारी जिम्मेदारी, बेटी से
"बहू", बनाने की है।
अगर हमने, अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से नहीं निभाई,
बेटी में बहू के संस्कार नहीं डाले तो इसकी सज़ा, बेटी को
तो मिलती है और माँ बाप को मिलती हैं, "जिन्दगी भर
गालियाँ"।
हर किसी को सुन्दर, सुशील बहू चाहिए। लेकिन भाइयो,
जब हम अपनी बेटियों में, एक अच्छी बहु के संस्कार, डालेंगे
तभी तो हमें #संस्कारी_बहू मिलेगी? ?
ये # कड़वा_सच , शायद कुछ लोग न बर्दाश्त कर पाएं
....लेकिन पढ़ें और समझें, बस इतनी प्रार्थना ..।
वृद्धाआश्रम में माँ बाप को देखकर सब लोग बेटो को ही
कोसते हैं, लेकिन ये कैसे भूल जाते हैं कि उन्हें वहां भेजने में किसी की बेटी का भी अहम रोल होता है। वरना बेटे अपने माँ बाप को शादी के पहले वृद्धाश्रम क्यों नही भेजते !
https://youtu.be/Jor7ZmbYavk
*💐💐बदतमीज नई बहू💐💐👇👇*
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| Shriram Sharma Acharya quotes |
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 312 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐रिश्तों में बदलाव💐💐*
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आज सुबह से ही मानो घर में त्यौहार-सा माहौल लग रहा है। मम्मी जी के चेहरे की चमक और रसोई से आती पकवानों की महक दोनों की वजह एक ही है, आज दोपहर को खाने ( लंच ) पर उनकी एक सहेली आने वाली हैं; आज घर को पूरी तरह से सजाया जा रहा है।
कल शाम को बातों-बातों में उन्होंने बताया कि कल मेरी सहेली खाने पर आ रही है। तो उन्हीं के लिए उपहार खरीदने हम बाज़ार निकल गए, उन्होंने बाज़ार से बड़ी महंगी-सी साड़ी खरीदी अपनी सहेली के लिए।
आज तो हद ही हो गई, मम्मी जी खुशी के मारे सुबह को जल्दी उठकर मुझसे भी पहले रसोई में घुस गई और बड़े प्यार और जतन के साथ खुद से तैयार की हुई पकवानों की लिस्ट में से एक के बाद एक पकवान बनाना भी शुरू कर दिया।
मम्मी जी तो खूब खुश नजर आ रही हैं पर मैं... बेमन, बनावटी मुस्कान चेहरे पर सजाए काम में उनका हाथ बटा रही हूँ।
मायके में मेरी माँ का आज जन्मदिन है। शादी के बाद यह माँ का पहला ऐसा जन्मदिन होगा जब कोई भी उनके साथ नहीं होगा, अब मैं यहाँ, पापा ऑफिस टूर पर और भाई तो है ही परदेस में।
कल मन को बड़ा मजबूत करके मायके जाने के लिए तैयार किया था, मम्मी जी से बोलने ही वाली थी कि उन्होंने मेरे बोलने से पहले ही अपनी सहेली के आने वाली बात सामने रख दी। दोपहर में लंच और शाम को हम सभी का उनके साथ फन सिटी जाने का प्रोग्राम तय हो चुका था।
क्या कहती मन मार कर रह गई, घर को सजाया और खुद भी बेमन-सी सँवर गई। कुछ ही देर में डोर बेल बजी उनका स्वागत करने के लिए मम्मी जी ने मुझे ही आगे कर दिया।
गेट खोला, बड़े से घने गुलदस्ते के पीछे छिपा चेहरा जब नजर आया तो मेरी आँखें फटी की फटी और मुँह खुला का खुला रह गया। आपको पता है, सामने कौन था ? सामने मेरी माँ खड़ी थी! माँ मुझे गुलदस्ता पकड़ाते हुए बोली,
" सरप्राइज !"
हैरान और खुश खड़ी मैं, अपनी माँ को निहार रही थी। बर्थडे विश नहीं करोगी हमारी सहेली को?" पीछे खड़ी मम्मी जी बोली।
"माँ...आपकी सहेली?" मैंने बड़े ही ताज्ज़ुब से पूछा।
"अरे भाई झूठ थोड़ी ना कहा था और ऐसा किसने कह दिया की समधिन-समधिन दोस्त नहीं हो सकती।" मम्मी जी ने कहा।
बिल्कुल हो सकती है जो अपनी बहू को बेटी जैसा लाड़ दुलार करें, सिर्फ वही समधिन को दोस्त बना सकती है।" कहते हुए माँ ने आगे बढ़कर मम्मी जी को गले लगा लिया।
खुशी के मेरे मुँह से एक शब्द भी ना निकल पाया, बस आँखों से आँसू छलकने लगे। मैंने मम्मी जी की हथेलियों को अपनी आँखों से स्पर्श करके होठों से चूम लिया और उनको गले लगा लिया। माँ हम दोनों को देखकर भीगी पलकों के साथ मुस्कुरा पड़ीं।
रिश्तो का उत्सव बड़े प्यार से मनाते हुए, एक तरफ मेरी माँ खड़ी थी जिन्होंने मुझे रिश्तों की अहमियत बताई और दूसरी तरफ मम्मी जी जिनसे मैंने सीखा रिश्तों को दिल से निभाना। दोनों मुझे देखकर जहाँ मुस्कुरा रही थी, वही मैं दोनों के बीच खड़ी अपनी किस्मत पर इतरा रही थी। आँखों में नमी और होठों पर मुस्कुराहट थी।
https://youtu.be/Jor7ZmbYavk
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| Akhand Jyoti |
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 313 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐नाई और राजा💐💐*
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गाँव में एक नाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। नाई ईमानदार था, अपनी कमाई से संतुष्ट था। उसे किसी तरह का लालच नहीं था। नाई की पत्नी भी अपनी पति की कमाई हुई आय से बड़ी कुशलता से अपनी गृहस्थी चलाती थी। कुल मिलाकर उनकी जिंदगी बड़े आराम से हंसी-खुशी से गुजर रही थी।
नाई अपने काम में बहुत निपुण था। एक दिन वहाँ के राजा ने नाई को अपने पास बुलवाया और रोज उसे महल में आकर हजामत बनाने को कहा।
नाई ने भी बड़ी प्रसन्नता से राजा का प्रस्ताव मान लिया। नाई को रोज राजा की हजामत बनाने के लिए एक स्वर्ण मुद्रा मिलती थी। इतना सारा पैसा पाकर नाई की पत्नी भी बड़ी खुश हुई। अब उसका जीवन बड़े आराम से कटने लगा।
घर पर किसी चीज की कमी नहीं रही और हर महीने अच्छी रकम की बचत भी होने लगी। नाई, उसकी पत्नी और बच्चे सभी खुश रहने लगे।
एक दिन शाम को जब नाई अपना काम निपटा कर महल से अपने घर वापस जा रहा था, तो रास्ते में उसे एक आवाज सुनाई दी।
https://youtu.be/A5_61rrH69U
आवाज एक यक्ष की थी। यक्ष ने नाई से कहा, ‘‘मैंने तुम्हारी ईमानदारी के बड़े चर्चे सुने हैं, मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत खुश हूँ और तुम्हें सोने की मुद्राओं से भरे सात घड़े देना चाहता हूँ। क्या तुम मेरे दिये हुए घड़े लोगे ?
नाई पहले तो थोड़ा डरा, पर दूसरे ही पल उसके मन में लालच आ गया और उसने यक्ष के दिये हुए घड़े लेने का निश्चय कर लिया।
नाई का उत्तर सुनकर उस आवाज ने फिर नाई से कहा, ‘‘ठीक है सातों घड़े तुम्हारे घर पहुँच जाएँगे।’’
नाई जब उस दिन घर पहुँचा, वाकई उसके कमरे में सात घड़े रखे हुए थे। नाई ने तुरन्त अपनी पत्नी को सारी बातें बताईं और दोनों ने घड़े खोलकर देखना शुरू किया। उसने देखा कि छः घड़े तो पूरे भरे हुए थे, पर सातवाँ घड़ा आधा खाली था।
नाई ने पत्नी से कहा—‘‘कोई बात नहीं, हर महीने जो हमारी बचत होती है, वह हम इस घड़े में डाल दिया करेंगे। जल्दी ही यह घड़ा भी भर जायेगा। और इन सातों घड़ों के सहारे हमारा बुढ़ापा आराम से कट जायेगा।
अगले ही दिन से नाई ने अपनी दिन भर की बचत को उस सातवें में डालना शुरू कर दिया। पर सातवें घड़े की भूख इतनी ज्यादा थी कि वह कभी भी भरने का नाम ही नहीं लेता था।
https://youtu.be/A5_61rrH69U
धीरे-धीरे नाई कंजूस होता गया और घड़े में ज्यादा पैसे डालने लगा, क्योंकि उसे जल्दी से अपना सातवाँ घड़ा भरना था। नाई की कंजूसी के कारण अब घर में कमी आनी शुरू हो गयी, क्योंकि नाई अब पत्नी को कम पैसे देता था। पत्नी ने नाई को समझाने की कोशिश की, पर नाई को बस एक ही धुन सवार थी—सातवां घड़ा भरने की।
अब नाई के घर में पहले जैसा वातावरण नहीं था। उसकी पत्नी कंजूसी से तंग आकर बात-बात पर अपने पति से लड़ने लगी। घर के झगड़ों से नाई परेशान और चिड़चिड़ा हो गया।
एक दिन राजा ने नाई से उसकी परेशानी का कारण पूछा। नाई ने भी राजा से कह दिया अब मँहगाई के कारण उसका खर्च बढ़ गया है। नाई की बात सुनकर राजा ने उसका मेहताना बढ़ा दिया, पर राजा ने देखा कि पैसे बढ़ने से भी नाई को खुशी नहीं हुई, वह अब भी परेशान और चिड़चिड़ा ही रहता था।
एक दिन राजा ने नाई से पूछ ही लिया कि कहीं उसे यक्ष ने सात घड़े तो नहीं दे दिये हैं ? नाई ने राजा को सातवें घड़े के बारे में सच-सच बता दिया।
तब राजा ने नाई से कहा कि सातों घड़े यक्ष को वापस कर दो, क्योंकि सातवां घड़ा साक्षात लोभ है, उसकी भूख कभी नहीं मिटती।
https://youtu.be/A5_61rrH69U
नाई को सारी बात समझ में आ गयी। नाई ने उसी दिन घर लौटकर सातों घड़े यक्ष को वापस कर दिये।
घड़ों के वापस जाने के बाद नाई का जीवन फिर से खुशियों से भर गया था।
*💐💐शिक्षा💐💐*
मित्रों" हमें कभी लोभ नहीं करना चाहिए। भगवान ने हम सभी को अपने कर्मों के अनुसार चीजें दी हैं,हमारे पास जो है,हमें उसी से प्रसन्न रहना चाहिए।अगर हम लालच करे तो सातवें घड़े की तरह उसका कोई अंत नहीं होता..!!
*💐💐बड़े घर की बहू💐💐*
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 314 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐सच्चे दोस्त💐💐*
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एक वेटर अचानक उन चारों को होटल में बैठा देखकर.... मोहन हड़बड़ा सा गया....
अरे ये ....ये तो मेरे स्कूल के दोस्त है.....
राजू किशन .....और जगदीश.... और वो ....वो ....आकाश है .....ये सब यहां.......
मिलूं क्या ......इन सब से....
नहीं मोहन...पागल है क्या .....देख इनसबको .....
वो सभी सूटबूट मे है ....लगता है कामयाब आदमी बन गए है .....और तू ....तू ...यहां एक छोटे से होटल में एक मामूली सा वेटर ....पहचानेगे भी वो ....और अगर पहचान भी लिया तो .....तो चारों तुझपर हंसेंगे ....
नहीं मोहन .....नहीं.....
पर अब यहां ये हमारे होटल के कस्टमर है और मे यहां का वेटर ....तो आर्डर तो मुझे ही ....और खाना भी मुझे ही परोसना होगा .....
खैर ....मेरा काम है और पापा कहते थे कोई भी मेहनत वाला काम छोटा या शर्मिंदगी वाला नहीं होता ....
आज लगभग 15 सालों बाद मोहन के स्कूल के चारों दोस्त उसके सामने थे.....
मोहन ने चारों से आर्डर लिया और अपने काम को बखूबी अंजाम देते हुए खाना परोसने लगा .....
चारों ने उसकी और देखा तक नहीं लगभग सभी अपने अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त थे ......
पिता के आकस्मिक निधन के चलते मोहन अपनी दसवीं की पढ़ाई भी पूरी नही कर पाया था..... मगर मोहन को लगा था उसके जिगरी दोस्त उसे पहचान जाऐंगे लेकिन उन्होंने उसे पहचानने का प्रयास भी नही किया....
वे चारों खाना खा कर बिल चुका कर चले गये.....
मोहन को लगा उन चारों ने शायद उसे पहचाना नहीं या उसकी गरीबी देखकर जानबूझ कर कोशिश नहीं की....
https://youtu.be/A5_61rrH69U
उसने एक गहरी लंबी सांस ली और टेबल साफ करने लगा.....
वो टिश्यु पेपर उठाकर कचरे मे डलने ही वाला था....की उसपर कुछ लिखा हुआ सा दिखा....
ओह.....शायद उन्होने उस पे कुछ जोड़-घटाया ...
अचानक उसकी नजर उस पर लिखे हुए शब्दों पर पड़ी....
जिसपर लिखा था - अबे साले तू हमे खाना खिला रहा था तो तुझे क्या लगा तुझे हम पहचानें नही....
अबे 15 साल क्या अगले जनम बाद भी मिलता तो तुझे पहचान लेते....
तुझे टिप देने की हिम्मत हममे नही थी...
देख हमने पास ही फैक्ट्री के लिये जगह खरीदी है....
https://youtu.be/A5_61rrH69U
औरअब हमारा इधर आन-जाना तो लगा ही रहेगा....
आज तेरा इस होटल का आखरी दिन है....
हमारे फैक्ट्री की कैंटीन कौन चलाएगा बे....
तू चलायेगा ना....
https://youtu.be/A5_61rrH69U
अबे तुझसे अच्छा पार्टनर और कहां मिलेगा....
याद हैं ना स्कूल के दिनों हम पांचो एक दुसरे का टिफिन खा जाते थे...आज के बाद रोटी भी मिल बाँट कर साथ-साथ खाएंगे.....
मोहन की आंखें भर आई....
उसने डबडबाई आँखों से आसमान की तरफ देखा और उस पेपर को होंठो से लगाकर करीने से दिल के पास वाली जेब मे रख लिया.....
मेरे दोस्तो.....सच्चे दोस्त वही तो होते है...
जो दोस्त की कमजोरी नही सिर्फ दोस्त देख कर ही खुश हो जाते है..
अच्छे दोस्त किस्मत से मिलते है
हमेशा अपने अच्छे दोस्त की कद्र करे...
"दोस्तों दोस्त वादे नहीं करते, फिर भी हर मोड़ पे अपनी यारी निभाते है.....".
मोहन सोच रहा था जब कोई हाथ और साथ दोनों छोड़ देता है तो ऊपरवाला किसी ना किसी को सहारे के लिए जरूर भेज देता है ।
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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 315 💮
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*💐💐संत की शरण💐💐*
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एक गांव में एक ठाकुर थे।
उनके यहां एक नौकर काम करता था.. जिसके कुटुंब में बीमारी की वजह से कोई आदमी नहीं बचा।
केवल नौकर का लड़का रह गया। वह ठाकुर के घर काम करने लग गया..
रोजाना सुबह वह बछड़े चराने जाता था.. और लौटकर आता तो रोटी खा लेता था। ऐसे समय बीतता गया।
एक दिन दोपहर के समय वह बछड़े चरा कर आया तो ठकुरानी की नौकरानी ने उसे ठंडी रोटी खाने के लिए दे दी।
उसने कहा कि थोड़ी सी छाछ या रबड़ी मिल जाए तो ठीक है।
नौकरानी ने कहा कि, जा जा तेरे लिए बनाई है रबड़ी, जा ऐसे ही खा ले नहीं तो तेरी मर्जी।
उस लड़के के मन में गुस्सा आया कि, मैं धूप में बछड़े चरा कर आया हूं, भूखा हुँ..
पर मेरे को बाजरे की सूखी रोटी दे दी.. रबड़ी मांगी तो तिरस्कार कर दिया..
वह भूखा ही वहां से चला गया।
गांव के पास में एक शहर था.. उस शहर में संतों कि एक मंडली आई हुई थी.. वह लड़का वहां चला गया।
संतों ने उसको भोजन कराया और पूछा कि तेरे परिवार में कौन हैं।
उसने कहा कि कोई नहीं है..
संतों ने कहा तू भी साधु बन जा.. लड़का साधु बन गया।
https://youtu.be/A5_61rrH69U
संतों ने ही उसके पढ़ने की व्यवस्था काशी में कर दी.. वह पढ़ने के लिए काशी चला गया वहां पढ़कर वह विद्वान हो गया।
फिर कुछ समय बाद उसे महामंडलेश्वर महंत बन दिया गया।
महामंडलेश्वर बनने के बाद एक दिन उसको उसी शहर में आने का आमंत्रण मिला..
वह अपनी मंडली लेकर वहां आये..
जिनके यहाँ वह बचपन में काम करते थे, वे ठाकुर बूढ़े हो गए थे।
वह ठाकुर जी भी शहर में उनका सत्संग सुनने आए..
उनका सत्संग सुना और प्रार्थना की कि महाराज.. एक बार हमारी कुटिया में पधारो जिससे हमारी कुटिया पवित्र हो जाए !
महामंडलेश्वर जी ने उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया..
महामंडलेश्वर जी अपनी मंडली के साथ ठाकुर के घर पधारे।
भोजन के लिए पंक्ति बैठी, भोजन मंत्र का पाठ हुआ.. फिर सबने भोजन करना आरंभ किया।
महाराज के सामने तख़्त लगाया गया, और उस पर तरह-तरह के भोजन के पदार्थ रखे हुए थे।
अब ठाकुर जी महाराज के पास आए साथ में नौकर था जिसके हाथ में हलवे का पात्र था।
ठाकुर साहब प्रार्थना करने लगा कि महाराज कृपा करके थोड़ा सा हलवा मेरे हाथ से ले लो।
महाराज को हंसी आ गई..
ठाकुर ने पूछा कि आप हँसे कैसे ?
महाराज बोले कि, मेरे को पुरानी बातें याद आ गई इसलिए हंसा।
ठाकुर साहब बोले महाराज यदि हमारे सुनने लायक बात हो तो हमें भी बताइए।
महाराज ने सब संतो से कहा कि, भाई थोड़ा ठहर जाओ बैठे रहो, ठाकुर बात पूछता है, तो बताता हूं..
महाराज ने ठाकुर से पूछा कि, आपके कुटुंब में एक नौकर का परिवार रहा करता था उस परिवार में अब कोई है क्या ?
ठाकुर बोले कि, केवल एक लड़का था.. और हमारे यहाँ उसने कई दिन बछड़े चराए.. फिर ना जाने कहाँ चला गया।
बहुत दिन हो गए फिर कभी उसको देखा नहीं।
महाराज बोले, कि मैं वही लड़का हूं। पास के शहर में संत-मंडली ठहरी हुई थी। मैं वहां चला गया।
पीछे काशी चला गया वहां पढ़ाई की और फिर महामंडलेश्वर बन गया।
यह वही आंगन है जहां आपकी नौकरानी ने मेरे को थोड़ी सी रबड़ी देने के लिए भी मना कर दिया था।
अब मैं भी वही हुँ, आंगन भी वही है.. आप भी वही हैं..
पर अब आप अपने हाथों से मोहनभोग दे रहे हैं.. कि महाराज कृपा करके थोड़ा सा मेरे हाथ से ले लो !
मांगे मिले ना रबड़ी, करूं कहां लगी वरण।
मोहनभोग गले में अटक्या, आ संतों की शरण।।
सन्तो की शरण लेने मात्र से इतना हो गया कि जहां रबड़ी नहीं मिलती थी वहां मोहनभोग भी गले में अटक रहे हैं..
अगर कोई भगवान् की शरण ले ले, तो वह संतों का भी आदरणीय हो जाए..
लखपति करोड़पति बनने में सब स्वतंत्र नहीं हैं.. पर भगवान् की शरण होने में भगवान् का भक्त बनने में सब के सब स्वतंत्र हैं..
और ऐसा मौका इस मनुष्य जन्म में ही है।।
*💐💐बांझ पत्नी💐💐*
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