प्रेरणादायक कहानियां भाग 66 prernadayak kahaniyan part 66






💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 326 💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


💐💐 *एक कंजूस की कहानी* 💐💐

https://chat.whatsapp.com/LOU08FqtkPgBR6bbfb9awi

एक नगर के बहुत बड़े सेठ का आज देंहात हो गया, उसका एक बेटा था, जो सोचने लगा, कौन आयेंगा मेरे पिताजी की मिट्टी में, जीवन भर तो इन्होनें कोई पुण्य, कोई दान धर्म नही किया बस पैंसे के पीछे भागते रहें, सब लोग कहते है ये तो कंजूसों के भी कंजूस थे, फिर कौन इनकी अंतिम यात्रा में शामिल होगा,,
https://youtu.be/VsIa0AnZXwQ?si=gLzcxjLW-r5cBNKN

खैर जैसा तैसा कर, रिश्तेदार, कुछ मित्र मिट्टी में शामिल हुये, पर वहाँ भी वही बात, सब एक दूसरे से कहने लगे बड़ा ही कंजूस शख्स था, कभी किसी की मदद नही की, हर वक्त बस पैंसा, पैंसा, यहाँ तक की घरवालों, रिश्तेदारों, तक को भी पैंसे का एक_एक हिसाब ले लेता था, कभी कालोनी के किसी भी कार्यकम्र में एक रूपयें नही दिया, हर वक्त बस ताने दियें, खुद से कर लिया करो, आज देखों दो चार लोग, बस इनकी मिट्टी पर आये हैं,

बहुत देर मिट्टी रोकने के बाद कंजूस सेठ के बेटे को किसी ने कहा, अब कोई नही आयेंगा, इन्हें कोई पसंद नही करता था, एक नम्बर के कंजूस थे, कौन आयेगा इनकी मिट्टी पर, अब श्मशान ले जाने की तैयारी करो, बेटे ने हामी भर दी, शरीर को लोग उठाने लगें,
https://youtu.be/VsIa0AnZXwQ?si=gLzcxjLW-r5cBNKN

पर एकाएक उनकी नजर सामने आती भीड़ पर पड़ी, कोई अंधा, कोई लगड़ा, हजारो की संख्या में महिलाए, बुजर्ग बच्चें, सामने नजर आने लगें, और उस कंजूस सेठ के शरीर के पास आकर फूट_फूट कर रोने लगे, ये कहकर मालिक अब हमारा क्या होगा, आप ही तो हमारे माई_बाप थे, कैसें होगा अब, सारे बच्चों ने उस कंजूस सेठ का पैर पकड़ लिया और बिलख_बिलख कर रोने लगे,,, सेठ के बेटे से रहा नही गया, उसने पूछ बैठा कौन है आप सब और क्यूं रो रहें हैं, 

पास ही खड़े कंजूस सेठ के मुनीम ने कहा, ये है तुम्हारे पिता की कमाई, कंजूसीयत, ये लोग देख रहें हो,, कोई अंधा कोई अपहिज, लड़कीयाँ, महिलाए, बच्चें तुम्हारे पिता ने ये कमाया है सारी उम्र,,, 
तुम जिसें कंजूस कहते हो ये रिश्तेदार, पड़ोसी मित्र जिसे महाकंजूस कहता हैं,,, इन झुग्गी झोपड़ी वालो से पूछो, की बताएंगे, ये कितने दानी थे,
कितने वृध्दाआश्रम, कितने स्कूल, कितनी लड़कियों की शादी, कितनो को भोजन कितनो को नया जीवन आपके इस कंजूस बाप ने दिया हैं, ये वो भीड़ है जो दिल से आयी हैं,, आपके रिश्तेदार पडोसी जैसे नही, जो रस्म पूरी करने के लिए आये हैं,

फिर उसके बेटे ने पूछा पिताजी ने मुजे ये सब क्यू नही बताया, क्यूं हमें एक_एक पैंसे के लिए तरसतें रहे, क्यू, कालोनी के किसी भी कार्यकम्र में एक भी मदद नही की
मुनीम ने कहा, तुम्हारे पिताजी चाहते थे, तुम पैंसों की कीमत समझों, अपनी खुद की कमाई से सारा बोझ उठाओ, तभी तुम्हें लगें की हाँ पैसा कहा खर्च करना है और क्यूं,
फिर मुनीम ने कहा, ये कालोनी वाले ये मित्र, ये रिश्तेदार,
कभी स्वीमिंग पूल के लिए, कभी शराब, शबाब के लिए, कभी अपना नाम ऊंचा करने के लिए, कभी मंदिरों में अपना नाम लिखवाने के लिए, चंदा मांगते थे, पूछों इन सब से कभी वो आयें इनके पास की सेठ किसी गरीब, बच्ची की शादी, पढाई, भोजन अंधा की ऑख, अपहिजों की साईकिल, किसी गरीब की छत, इनके लिए कभी नही आये, ये तो आये बस खुद को दूसरो से ऊंचा दिखाने के लिए, मौज मस्ती में पैसा उड़ाने के लिए,,,

आज ये भीड़ है ना वो दिल से रो रही हैं, क्यूकि उन्होने वो इंसान खोया हैं, जो कई बार खुद भूखे रहकर, इन गरीबों को खाना खिलाया है, ना जाने कितनी सारी बेटियों की शादी करवाई, कितने बच्चों का भविष्य बनाया, 
पर हाँ तुम्हारे कालोनी वालो की किसी भी फालतू फरमाईश में साथ नही दिया,,,

गर तुम समझते हो ये कंजूस हैं,,, तो सच हैं,,, इन्होने कभी किसी गरीब को छोटा महसूस नही होने दिया, उनकी इज्जत रखी, ये कंजूसीयत ही हैं,,,,
आज हजारों ऑखें रो रही हैं, इन चंद लोगो से तुम समझ रहें हो तुम्हारे पिता कंजूस है तो तुम अभागें हो,,,,

बेटे ने तुरंत अपने पिता के पैर पकड़ लिए,, और पहली बार दिल से रो कर कहने लगा, बाबूजी आप सच में बहुत कंजूस थे, आपने अपने सारे नेक काम कभी किसी से नही बाँटे आप बहुत कंजूस थे 😓
किसी महान आदमी ने कहा हैं नेकी कर और दरिया में डाल .......नेक काम ऐसा होना चाहिए की एक हाथ से करें, तो दूसरे को पता ना चलें .....

*💐💐सरकारी स्कूल के बच्चें💐💐*
👇👇👇👇👇👇

https://youtu.be/X6YAPa4DUGc

*ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।*
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
https://chat.whatsapp.com/I56fJ4cMr8RIcXAHjOBtAU

*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1

*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/seiTZ_vK2gs

*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5


*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏





💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 327 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐शक💐💐*

https://chat.whatsapp.com/LOU08FqtkPgBR6bbfb9awi

सुधा अभी सब्जी खरीदकर घर की तरफ मुड़ी ही थी की मोहन के पीछे बाइक पर किसी और को बैठा देख कर ठिठक गई..... एक सुंदर सी औरत चिपककर मोहन के पीछे बैठी थी और उसका एक हाथ मोहन के कंधे पर था....

सुधा के तनबदन में आग लग गई वह नागिन की तरह फुफकारी -अच्छा .....तो इस उम्र में ये गुल खिला रहे हो ...

रोज पैदल चलकर सब्जी खरीदने वाली सुधा ने तुरंत आटो किया और आनन फानन में घर पहुंची मोहन अबतक घर नही पहुंचा था इंतजार करते शाम के सात बजे चुके थे इस टाइम से पहले तो रोज घर आ जाया करता था सुधा गुस्से मे बाहर गैलरी में चक्कर लगाने लगी और हांफने लगी.......क्या हुआ मम्मी...
बड़ी बेटी आरध्या ने मां को इस तरह बैचेन देख कर पूछ लिया....कालेज से लौटी आराध्या के साथ उसकी कॉलेज की सहेली भी साथ थी 

इस कारण सुधा ने कहा....कुछ नही....
जरा जी सा घबराया.... इस कारण टहल रही हूं.....

घुमा करो मम्मी, सुबह भी.. कितनी मोटी हो गई हो......इतना कहकर आराध्या अपने कमरे में चली गई

"मोटी....
शब्द वैसे तो बच्चे बहुत बार सुधा के लिए इस्तेमाल कर लेते थे मगर आज ये शब्द भी सुधा को तीर जैसे चुभ रहे थे वह अंदर कमरे में जाकर आईने के सामने खड़ी हो गई खुद को आज बहुत गौर से देखने लगी और सोचने लगी "सचमुच वह बहुत मोटी हो गई है...
कमर और पेट की चर्बी को दबा दबाकर देखने लगी फूलते हुए गालों में भागती हुई उम्र को तलाश करने लगी उसे अहसास हुआ कि 35 की उम्र में वो 50 की नजर आने लगी है वह सोचने लगी कितनी छरहरी थी जवानी में.. ..
मग़र गृहस्थी और बच्चों को संभालते-संभालते सारा सौंदर्य खो गया.... 
ओह......तो इसीलिए मोहन का मन भर गया तभी तो वो कलमुँही चिपक कर बैठी थी मोहन तो आज भी 40 की उम्र में हैंडसम है......
फांस लिया उसने मेरे भोले भाले पति को...हे भगवान अब क्या करूँ......

होती घबराहट में बीपी बढ़ने लगा तो जल्दी सी टेबलेट ली और अचानक ही कुछ कठोर निर्णय ले लिया सुधा ने और फिर उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए

मोहन 8 बजे तक घर पहुंचा सुधा ने उसे आभास भी नही होने दिया कि वह गुस्से में है अगले दिन से तो घर के सभी मेम्बर आश्चर्य में पागल ही हो गए सुधा ने एक्सरसाइज शुरू कर दी थी 7 बजे उठनेवाली सुबह चार बजे उठ कर कपालभाति, प्राणायाम, सूर्यनमस्कार और भी वे सभी योगासन और एक्सरसाइज जो रात भर नेट पर खोज की थी सभी को बारी बारी से कर रही थी
https://youtu.be/61UnSrnNfYE?si=8lFwjnnIy9eiUmNy

घण्टे भर की हाड़तोड़ मेहनत के बाद वह पलंग पर आकर पसर गई..... 
हाथ पैर सहित पूरा शरीर दुखने लगा था कुछ देर मे बुखार ने ऐसा जोर पकडा की शरीर भी सूजने लगा हालत गंभीर होते देख बडी बेटी आराध्या ने पिता मोहन को फोन किया और सुधा को लेकर परिवार वाले अस्पताल भागे 

हालत खराब देखकर डाक्टरो ने तुरंत सुधा को एडमिट कर दिया घर के बडे ...बच्चे ....
सभी सुधा को डांट रहे थे की आखिर अचानक उसे इतनी एकसासाइज कयो करनी थी अब भीगी आँखें लिए सुधा कहे भी तो कया किसी से की उसका मोटापा ....
उसका वर्षों का प्यार उसकी खुशियां उसका पति मोहन उससे छीन रहा था

सभी घर वाले सुधा को डांट रहे थे कि क्या जरूरत थी एक साथ इतना सब करने की। 

बेचारी सुधा अब कहे भी तो क्या कहे....

कैसे कहे कि मोहन बदल गया उसका प्यार ...
उसकी खुशी उसका संसार उसका पति अब किसी जवान स्लिम सी लडकी के साथ अफेयर .....
कैसे बताए की इस घर मे उसकी सौतन आने वाली है उसी से इस घर को बचाने के लिए वो खुद को स्लिम कर रही थी ताकि उसका पति परमेश्वर मोहन उस चूडैल तो कया किसी और की तरफ ना ताके...

इधर मोहन भी आँफिस से छुट्टी लेकर अस्पताल आ गया था लेकिन उसने सुधा को जरा भी नही डांटा सब घर के लोग धीरे धीरे वापस चले गए बस मोहन और सुधा ही बचे थे अस्पताल मे तब मोहर ने पूछा ....
परेशान दिख रही हो...कल रात से ही...क्या बात है...

सुधा ने कोई जवाब नही दिया बस मुँह फेर लिया...

शरीर अब भी तवे की तरह तप रहा था सुधा का मोहन ने कोई बहस नही की... वह ठंडी पट्टी बार बार उसके माथे पर रखता रहा यह सिलसिला रात भर चला इसके चलते एक पल भी नही सोया...
सुधा भी दर्द और बुखार में बेहोश सी रही पूरी रात...डॉक्टरों ने कहा कि इनका बीपी कंट्रोल नही हो रहा अगर यही हालत रही तो फेफड़ो और हार्ट को खतरा है...

फिर सुबह वह सुंदर औरत भी उससे मिलने आई उसे देख कर सुधा ने मुँह फेर लिया तब मोहन ने परिचय कराया -अरे सुधा.... इधर देखो ....
ये सोनिया दीदी है इनका कई बार तुम्हारे सामने जिक्र भी कर चुका हूं दो दिन पहले ही इनका ट्रांसफर मेरे ऑफिस में हुआ है ....कल दीदी ने ज्वाइंन किया ..

कल ही समान भी शिफ्ट किया ..हमारे पास वाली कालोनी मे ...
शाम को चाय पर बुलाया था दीदी ने
हमें परिवार सहित .....
मगर तुमहारी तबीयत ...
सुधा तो यह सुनकर शर्म के मारे जैसे धरती में समा गई 
उफ्फ कितनी पागल और मूर्ख हूँ मैं....
https://youtu.be/61UnSrnNfYE?si=8lFwjnnIy9eiUmNy

अपने देवता जैसे पति पर शक किया।
उसने नजर झुकाए हुए ही सोनिया दीदी से नमस्कार किया...

फिर चमत्कार हुआ अगले दस मिनिट में उसका बीपी नॉर्मल हो गया.... बुखार उतर गया...
दवाई जो मिल गई थी बस दर्द बचा था जो धीरे धीरे ठीक होने वाला था शाम तक सुधा को छुट्टी मिल गई वह घर आकर बार बार तुलसी के पौधे और देवी देवताओं से माफी मांगती रही पगली कहीं की....
एक घरेलू भावनाओं से ओतप्रोत रचना...


*💐💐सरकारी स्कूल के बच्चें💐💐*
👇👇👇👇👇👇

https://youtu.be/X6YAPa4DUGc

*ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।*
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
https://chat.whatsapp.com/I56fJ4cMr8RIcXAHjOBtAU

*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1

*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/seiTZ_vK2gs

*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5


*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏





💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 328 💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐संगत💐💐*

https://chat.whatsapp.com/LOU08FqtkPgBR6bbfb9awi

आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा--"सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।"

 आइंस्टीन हैरान !!!

उन्होंने कहा- "ठीक है, अगले आयोजक मुझे नहीं जानते।आप मेरे स्थान पर वहां बोलिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।

ऐसा ही हुआ, बैठक में अगले दिन ड्राइवर मंच पर चढ़ गया।और भाषण देने लगा...

उपस्थित विद्वानों ने जोर-शोर से तालियां बजाईं।

उस समय एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा - "सर, क्या आप उस सापेक्षता की परिभाषा को फिर से समझा सकते हैं ?"

असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा !!! 

इस बार वाहन चालक पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वे हैरान रह गए...

ड्राइवर ने जवाब दिया- "क्या यह आसान बात आपके दिमाग में नहीं आई ? 

मेरे ड्राइवर से पूछिए,---वह आपको समझाएगा।

*💐💐शिक्षा💐💐*

यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही सदा उठेंगे-बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी..!!


*💐💐सरकारी स्कूल के बच्चें💐💐*
👇👇👇👇👇👇

https://youtu.be/X6YAPa4DUGc

*ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।*
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
https://chat.whatsapp.com/I56fJ4cMr8RIcXAHjOBtAU

*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1

*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/seiTZ_vK2gs

*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5


*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏




💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 329 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐 क्षमा💐💐*

https://chat.whatsapp.com/LOU08FqtkPgBR6bbfb9awi

एक सेठ जी ने अपने छोटे भाई को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रूपये बड़े भाई को वापस नहीं लौटाये।
     
आखिर दोनों में झगड़ा हो गया, झगड़ा भी इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। सेठ जी, हर समय हर संबंधी के सामने अपने छोटे भाई की निंदा-निरादर व आलोचना करने लगे।
      
सेठ जी अच्छे साधक भी थे, लेकिन इस कारण उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन- पूजन के समय भी उन्हें छोटे भाई का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा सुनायी।
     https://youtu.be/cFaB0OMDS2I?si=Lj65nct7ZTdKdXvE

संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वर कृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयां लेकर अपने छोटे भाई के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, 'अनुज ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे "क्षमा" कर दो।'

     सेठ जी ने कहाः- "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और "क्षमा" भी मैं ही माँगू!"
     https://youtu.be/cFaB0OMDS2I?si=Lj65nct7ZTdKdXvE

संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"
     सेठ जी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई?"

    बेटा ! तुमने मन ही मन अपने छोटे भाई को बुरा समझा– यही है तुम्हारी पहली भूल।
      तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया– यह है तुम्हारी दूसरी भूल
     क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा– यह है तुम्हारी तीसरी भूल।
   अपने कानों से उसकी निंदा सुनी– यह है तुम्हारी चौथी भूल।
  तुम्हारे हृदय में छोटे भाई के प्रति क्रोध व घृणा है– यह है तुम्हारी आखिरी भूल।
     अपनी इन भूलों से तुमने अपने छोटे भाई को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना होकर तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए "क्षमा" माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है। ओर तुम तो एक बहुत अच्छे साधक हो।"
     
सेठ जी की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे छोटे भाई के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके भतीजे ने खोला। सामने ताऊ जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये हैं ! ताऊ जी आये हैं, ताऊ जी आये हैं।"
     
माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' छोटा भाई हर्ष से पुलकित हो उठा, 'अहा ! पन्द्रह वर्ष के बाद आज बड़े भैया घर पर आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सका। सेठ जी ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर छोटे भाई को कहाः- "भाई ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।"

     “क्षमा"शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। छोटा भाई उनके चरणों में गिर गया और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगा। बड़े भाई के प्रेमाश्रु छोटे भाई की पीठ पर और छोटी भाई के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु बड़े भाई के चरणों में गिरने लगे।

     क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप, सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। छोटा भाई उठ कर गया और रुपये लाकर बड़े भाई के सामने रख दिये। बडे भाई ने कहा "भाई! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ।
     
मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।"

    छोटे भाई ने कहाः- "भैया ! जब तक आप ये रुपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।

     सेठ जी ने छोटे भाई से रूपये लिये और अपने इच्छानुसार अनुज बधू , भतीजे व भतीजी में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे।

      पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब पूरे परिवार का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो।
                    
           सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। "क्षमा" माँगने के बाद उस सेठ जी के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशा रूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी।



*💐💐सरकारी स्कूल के बच्चें💐💐*
👇👇👇👇👇👇

https://youtu.be/X6YAPa4DUGc

*ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।*
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
https://chat.whatsapp.com/I56fJ4cMr8RIcXAHjOBtAU

*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1

*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/seiTZ_vK2gs

*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5


*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏




💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 330 💮




*🌳🦚आज की कहानी 🦚🌳*

*💐💐 योजक 💐💐*

https://chat.whatsapp.com/LOU08FqtkPgBR6bbfb9awi

एक गांव में एक किसान रहता था। वह रोज सुबह झरनों से साफ पानी लाने के लिए दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वह डंडे में बांधकर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था। उनमें से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एकदम सही था । इस तरह रोज घर पहुंचते-पहुंचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था।
https://youtu.be/dV5icVyeQJQ?si=cuWsCwghsg5AY_Lz

सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है। दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पहुंचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार जाती है।

 फूटा घड़ा ये सब सोचकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया। उसने किसान से कहा, 'मैं खुद पर शर्मिंदा हूं और आपसे माफी मांगना चाहता हूं।'


किसान ने पूछा, 'क्यों ❓ तुम किस बात से शर्मिंदा हो❓' 

फूटा घड़ा बोला, 'शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूं, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुंचाना चाहिए था, बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूं। मेरे अंदर ये बहुत बड़ी कमी है और इस वजह से आपकी मेहनत बर्बाद होती रही है।' 

किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुख हुआ और वह बोला, 'कोई बात नहीं, मैं चाहता हूं कि आज लौटते वक्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो। घड़े ने वैसा ही किया। वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया। 

ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुंचते-पहुंचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था।' वह मायूस होकर किसान से माफी मांगने लगा।

किसान बोला, 'शायद तुमने ध्यान नहीं दिया। पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे।' वो बस तुम्हारी तरफ ही थे। सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अंदर की कमी को जानता था, और मैंने उसका फायदा उठाया। मैंने तुम्हारी तरफ वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे।

तुम रोज थोड़ा-थोड़ा कर उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया। आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूं और अपने घर को सुन्दर बना पाता हूं। तुम्हीं सोचो, 'यदि तुम जैसे हो, वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता ❓

हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं। यानी आप जैसे हैं वैसे ही रहिए। उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वैसा ही स्वीकारना चाहिए जैसा वह है। उसकी अच्छाई पर ध्यान देना चाहिए। जब हम ऐसा करेंगे तब फूटा घड़ा भी अच्छे घड़े से कीमती हो जाएगा ll


*💐💐सरकारी स्कूल के बच्चें💐💐*
👇👇👇👇👇👇

https://youtu.be/X6YAPa4DUGc

*ऐसी ही और अच्छी,प्रेरणादायक कहानियों के लिए समूह जॉइन करें।ग्रुप केवल धार्मिक" भावनात्मक,व प्रेरणादायक पोस्टों से संबंधित है।*
👇👇👇👇👇👇👇👇👇
https://chat.whatsapp.com/I56fJ4cMr8RIcXAHjOBtAU

*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*


*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/+w7I4LBTYBsU4NTg1

*यूट्यूब चैनल💐💐*
https://youtu.be/seiTZ_vK2gs

*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5


*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏





एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.