प्रेरणादायक कहानियां भाग 67 prernadayak kahaniyan part 67




💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 331 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐थैंक्यू भइया💐💐*

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किदवईनगर चौराहे पर टेम्पो से उतर कर जैसे ही आगे बढ़ा तो तीन चार रिक्शे वाले मेरी तरफ बढ़ते हुए बोले, "आओ बाबू, के-ब्लॉक"

सुबह शाम की वही सवारियाँ और चौराहे के वही रिक्शेवाले। सब एक दूसरे के चेहरे को पहचानने लगते हैं। जिन रिक्शो पर बैठ कर मैं शाम को घर तक पहुँचता था वे तीन चार ही थे। स्वभाव से मैं अपनी दुकान, सवारी या मित्र चुनिंदा रखता हूँ , इन पर विश्वास करता हूँ और इन्हें बार बार बदलता भी नहीं हूँ।

एक रिक्शे पर मैं बैठ गया। आज ऑफिस में निदेशक ने अकारण ही मुझ पर नाराजगी जाहिर की थी इसलिए मस्तिष्क विचलित और हृदय भारी था। कब रिक्शा मुख्य सड़क से मुड़ा और कब मेरे घर के सामने आ खड़ा हुआ .. मैं नहीं जान पाया।

"आओ, बाबू जी, आपका घर आ गया।" रिक्शेवाले का स्वर सुनकर मैं सचेत हुआ। रिक्शे को गेट के सामने खड़ा पाकर मैं उतरा और जेब से पैसे निकाल कर रिक्शेवाले को दिये और पलट कर घर की तरफ बढ़ गया।

"बाबू जी" 
रिक्शेवाले की आवाज़ सुनकर मैं पलटा और प्रश्नवाचक दृष्टि से उसे देखते हुए कहा- "क्या पैसे कम दिए मैंने?"
"नहीं बाबू जी"
"तो फिर क्या बात है? प्यास लगी है क्या?"
"नहीं बाबू जी"
"तो भइया बताइए, क्या बात है?"
"बाबू जी, क्या दफ्तर में कुछ बात हुई है?"
"हाँ... मगर तुम कैसे जान पाए!" मैंने आश्चर्य से पूछा।
"बाबू जी। आज आप रिक्शे में बैठ कर मुझसे कोई बात नहीं की। मेरे घर परिवार क्व विषय में कुछ पुछभी नहीं। पूरे रास्ते चुपचाप गुमसुम बने रहे।"

"हाँ, भाई आज कुछ मन मे अशांति सी है इसलिए चुपचाप रहा मैं। पर पैसे तो तुम्हे पूरे दिए न!"
"बाबू जी, पैसे तो दिए पर ..."
"पर और क्या ...?"
"बाबू जी, थैंक्यू नहीं दिया आज आपने.. बाबू जी, हम रिक्शेवालों की ज़िंदगी में सम्मान कहाँ मिलता है। लोग तो भाड़ा भी नहीं देते हैं। कुछ तो मारपीट भी कर देते हैं। एक आप हैं जो रिक्शे में बैठते ही हमसे हमारा हालचाल पूछते हैं, घरपरिवार के विषय में, बच्चोँ की पढ़ाई आदि के विषय में पूछते हैं। बाबू जी, अच्छा लगता है जब कोई अपना बन जाता है तब। इस सबसे ऊपर यह है कि आप किराया तो पूरा देते ही हैं, घर आकर ठण्डा पानी पिलाते हैं और साथ ही हम लोगो को थैंक्यू भी कह देते हैं। हम लोग चौराहे पर आपके बारे में "थैंक्यू वाले बाबूजी" के नाम से बात करते हैं... पर आज तो..."
उसका स्वर भीग गया था।

मैने अपना पिट्ठू बैग उतार कर गेट के पास रखा। उसके कंधे पर हाथ रखा और धीरे से कहा,"भाई मुझे क्षमा करना। मन भारी होने के कारण सब गड़बड़ हो गयी। मेरे घर तक छोड़ने के लिए तुम्हारा हृदय से आभार औऱ धन्यवाद। थैंक्यू भइया।"

वह मुस्कुरा पड़ा और पैडल पर दबाव डाल कर आगे बढ़ गया।



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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 332 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐बाज की सीख💐💐*

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एक बार एक शिकारी जंगल में शिकार करने के लिए गया। बहुत प्रयास करने के बाद उसने जाल में एक बाज पकड़ लिया। शिकारी जब बाज को लेकर जाने लगा तब रास्ते में बाज ने शिकारी से कहा, “तुम मुझे लेकर क्यों जा रहे हो?”

शिकारी बोला, “मैं तुम्हें मारकर खाने के लिए ले जा रहा हूँ।” बाज ने सोचा कि अब तो मेरी मृत्यु निश्चित है। वह कुछ देर यूँ ही शांत रहा और फिर कुछ सोचकर बोला, “देखो, मुझे जितना जीवन जीना था मैंने जी लिया और अब मेरा मरना निश्चित है, लेकिन मरने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा है।” “बताओ अपनी इच्छा?”, शिकारी ने उत्सुकता से पूछा।

बाज ने बताना शुरू किया- मरने से पहले मैं तुम्हें दो सीख देना चाहता हूँ, इसे तुम ध्यान से सुनना और सदा याद रखना। पहली सीख तो यह कि किसी कि बातों का बिना प्रमाण, बिना सोचे-समझे विश्वास मत करना। और दूसरी ये कि यदि तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो या तुम्हारे हाथ से कुछ छूट जाए तो उसके लिए कभी दुःखी मत होना।

शिकारी ने बाज की बात सुनी और अपने रस्ते आगे बढ़ने लगा। कुछ समय बाद बाज ने शिकारी से कहा- “शिकारी, एक बात बताओ…अगर मैं तुम्हें कुछ ऐसा दे दूँ जिससे तुम रातों-रात अमीर बन जाओ तो क्या तुम मुझे आज़ाद कर दोगे?”

शिकारी फ़ौरन रुका और बोला, “क्या है वो चीज, जल्दी बताओ?” बाज बोला, “दरअसल, बहुत पहले मुझे राजमहल के करीब एक हीरा मिला था, जिसे उठा कर मैंने एक गुप्त स्थान पर रख दिया था। अगर आज मैं मर जाऊँगा तो वो हीरा ऐसे ही बेकार चला जाएगा, इसलिए मैंने सोचा कि अगर तुम उसके बदले मुझे छोड़ दो तो मेरी जान भी बच जायेगी और तुम्हारी गरीबी भी हमेशा के लिए मिट जायेगी।” यह सुनते ही शिकारी ने बिना कुछ सोचे समझे बाज को आजाद कर दिया और वो हीरा लाने को कहा।

बाज तुरंत उड़ कर पेड़ की एक ऊँची शाखा पर जा बैठा और बोला, “कुछ देर पहले ही मैंने तुम्हें एक सीख दी थी कि किसी के भी बातों का तुरंत विश्वास मत करना लेकिन तुमने उस सीख का पालन नहीं किया। दरअसल, मेरे पास कोई हीरा नहीं है और अब मैं आज़ाद हूँ।

यह सुनते ही शिकारी मायूस हो पछताने लगा… तभी बाज फिर बोला, तुम मेरी दूसरी सीख भूल गए कि अगर कुछ तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो तो उसके लिए तुम कभी पछतावा मत करना।

*💐💐शिक्षा:-💐💐*
हमें किसी अनजान व्यक्ति पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए और किसी प्रकार का नुकसान होने या असफलता मिलने पर दुःखी नहीं होना चाहिए, बल्कि उस बात से सीख लेकर भविष्य में सतर्क रहना चाहिए।

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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 333 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐भाग्यशाली पश्चाताप💐💐*

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घर का सारा कचरा इकट्ठा किया और बड़बड़ाती हुई बाहर निकली- 'संगीत के नाम पर बस अब यही आवाज शेष रह गई है जीवन में, बीस दिन हो गए स्पीकर खराब हुए, पर यहां किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता, कितनी बार कहा कि ठीक करवा दो, पर नहीं...।'

रिया ने देखा कि पति अखबार में डूबा हुआ है, पर ऐसा तो नहीं था। वह चश्मे की ओट से उसे ताक रहा है और खुद से कह रहा है- ' घर आजकल घर कम और जंग का मैदान हो गया है।'

https://youtu.be/Wm_8cGBFenM?si=sGgpJVMMfBUZ4j-O

घर मे सुबह सुबह भजन लगाकर घर का सारा काम करने की आदत थी रिया की। सुबह बिना संगीत सुने उसकी दिनचर्या अधूरी सी थी। "अगर इस पुराने डब्बे को ठीक नही करा के दे सकते तो मुझे सस्ते ईयर फ़ोन ही ला दो"-रिया का रेडियो आज सुबह से लगातार पटर पटर चल रहा था
https://youtu.be/Wm_8cGBFenM?si=sGgpJVMMfBUZ4j-O

दरअसल कुछ दिनों पहले रिया ने शादी की सालगिरह पर बतौर तोहफा साड़ी की मांग रखी थी। रोहित ने यह कहते हुए मना कर दिया कि करीबी रिश्तेदारों में बहुत सारी शादियां हैं। उनके लिए उपहार भी लेना होगा, तो बजट गड़बड़ा सकता है। बस रिया तब से खफा थी। आए दिन किसी न किसी बात पर तकरार हो जाती।

इसी से बचने के लिए आजकल रोहित ऑफिस के लिए जल्दी ही निकल जाता था। वैसे एक वजह यह भी थी कि ऑफिस में उसका मन ज्यादा लगने लगा था। अच्छी लगने लगी थी सरिता। नई जॉइनिंग थी दफ्तर में उसकी।

आज तो रोहित और सरिता ने ऑफिस से हाफ-डे ले लिया। सरिता को सालगिरह पर खरीदारी जो करानी थी। रोहित पेमेंट करने लगा तो उसका ध्यान पास खड़े राकेश पर गया।
राकेश रिया के दूर के रिश्ते का भाई लगता है।

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राकेश ने तंज कसते हुए कह ही दिया- 'बहुत शॉपिंग हो रही है जीजू आजकल... ' फिर कान में फुसफुसाते हुए बोला- 'दीदी को....। '



रोहित के चेहरे पर हवाइयां उडऩेे लगीं। अचानक उसे लगा कि आखिर वह क्या कर रहा है? रिया को पता चल गया तो? कितना भी झागड़ा हो, पर उसे खोने के डर से ही वह घबरा गया। घर जाने से पहले उसने रिया के लिए एक ईयर फोन खरीदा।

घर में कदम रखते ही रिया से कहा, 'आज बाहर ही पाव भाजी खा कर आएंगे रिया। ' और रिया के हाथ में ईयर फोन थमा दिया। ईयर फोन देखकर और पति के नरम पड़ते हुए तेवर देखकर वह भी खुश हो गई।


बाइक पर बैठने से पहले ही रिया ने कानों में ईयर फोन ठूंस लिए। इधर वह गाने में खोई थी, उधर रोहित पश्चाताप में अपनी भूल की क्षमा मांग रहा था। रिया से वो अपनी हल्की नम हुई आंखों के साथ साथ लगातार क्षमा मांगे जा रहा था। बाइक चलाते-चलाते वह गर्दन को मोड़कर जरा देखता, पर उसे समझा न आया कि रिया के कानों में तो ईयर फोन लगे हैं!

रिया को महसूस हुआ कि रोहित कुछ कह रहा है, पर उसे अभी सिर्फ संगीत सुनना था। ईयर फोन तब कान से निकले, जब बाइक पाव भाजी के ठेले के पास जाकर रुकी।

बाइक रोकते ही रोहित ने रिया का हाथ बड़े प्यार से अपने हाथ में लिया और बोला, 'सॉरी रिया, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी।'

भारतीय ग्रहणी के सुंदर मनोभाव रखने वाली रिया ने तुंरन्त पति को बड़ा बनाते हुए कहा- 'मेरी भी तो गलती है, बहुत गुस्सा करती हूं न! अब नहीं करूंगी।'

दोनो के मन शांत थे। दोनो को अहसास था कि परिवार को चलाने में उनके जीवन साथी ने बहुत मेहनत की है। दोनो ने मन मे अब से ये गलती दुबारा न होगी ऐसा निश्चय कर लिया था। तब तक पाव भाजी की प्लेट उनके सामने आ चुकी थी और मुस्कुराता से पश्चाताप का ईयरफोन कंधे पर झाूल रहा था। रोहित अपनी गलती कह चुका था और रिया अपनी मान चुकी थी, दोनो संतुष्ट थे।

जीवन के सफर में पश्चाताप या अफसोस करना दो भावनाएं ऐसी दु:खदायी हैं जिसका असर बाहर से दिखाई नहीं देता, लेकिन अंदर अजीब सी घुटना महसूस होती है या अपना मन अंदर ही अंदर दु:खी होता है। पश्चाताप की भावना में बुद्धि का सोचना बंद हो जाता है। निराश होकर कभी भी हम अतीत की बीती हुई बातों को परिवर्तित नहीं कर सकते।प्रायश्चित व्यक्ति के मन को निर्मल बनाता है यधपि व्यक्ति का मान कुलशित, संकुचित हो जाता है और वह खुद को जीवनभर पापी ही समझता रहता है इसलिये प्रायश्चित करके अपने पापों को भुलकर पुण्य पर ही ध्यान देना जरूरी है। इसको लेकर जीवनभर अपराधबोध नहीं पालना चाहिए।

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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 334 💮



*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐अपनी क्षमता पहचानो💐💐*

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 एक गाँव में एक आलसी आदमी रहता था, वह कुछ काम-धाम नहीं करता था।बस दिन भर निठल्ला बैठकर सोचता रहता था कि किसी तरह कुछ खाने को मिल जाये।

एक दिन वह यूं ही घूमते-घूमते आम के एक बाग़ में पहुँच गया। वहाँ रसीले आमों से लदे कई पेड़ थे।

 रसीले आम देख उसके मुँह में पानी आ गया और आम तोड़ने वह एक पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन जैसे ही वह पेड़ पर चढ़ा, बाग़ का मालिक वहाँ आ पहुँचा।

बाग़ के मालिक को देख आलसी आदमी डर गया और जैसे-तैसे पेड़ से उतरकर वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

 भागते-भागते वह गाँव में बाहर स्थित जंगल में जा पहुँचा, वह बुरी तरह से थक गया था। इसलिए एक पेड़ के नीचे बैठकर सुस्ताने लगा।

तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी (Fox) पर पड़ी, उस लोमड़ी की एक टांग टूटी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रही थी।
 लोमड़ी को देख आलसी आदमी सोचने लगा कि ऐसी हालत में भी इस जंगली जानवरों से भरे जंगल में ये लोमड़ी बच कैसे गई? इसका अब तक शिकार कैसे नहीं हुआ?

जिज्ञासा में वह  एक पेड़ पर चढ़ गया और वहाँ बैठकर देखने लगा कि अब इस लोमड़ी के साथ आगे क्या होगा?

कुछ ही पल बीते थे कि पूरा जंगल शेर (Lion) की भयंकर दहाड़ से गूंज उठा, जिसे सुनकर सारे जानवर डरकर भागने लगे, लेकिन लोमड़ी अपनी टूटी टांग के साथ भाग नहीं सकती थी, वह वहीं खड़ी रही।

शेर लोमड़ी के पास आने लगा, आलसी आदमी ने सोचा कि अब शेर लोमड़ी को मारकर खा जायेगा,लेकिन आगे जो हुआ, वह कुछ अजीब था।

 शेर लोमड़ी के पास पहुँचकर खड़ा हो गया,उसके मुँह में मांस का एक टुकड़ा था, जिसे उसने लोमड़ी के सामने गिरा दिया।
 लोमड़ी इत्मिनान से मांस के उस टुकड़े को खाने लगी, थोड़ी देर बाद शेर वहाँ से चला गया।

यह घटना देख आलसी आदमी सोचने लगा कि भगवान सच में सर्वेसर्वा है,उसने धरती के समस्त प्राणियों के लिए, चाहे वह जानवर हो या इंसान, खाने-पीने का  प्रबंध कर रखा है, वह अपने घर लौट आया।

घर आकर वह २-३ दिन तक बिस्तर पर लेटकर प्रतीक्षा करने लगा कि जैसे भगवान ने शेर के द्वारा लोमड़ी के लिए भोजन भिजवाया था, वैसे ही उसके लिए भी कोई न कोई खाने-पीने का सामान ले आएगा।

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लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, भूख से उसकी हालात ख़राब होने लगी। आख़िरकार उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ा। घर के बाहर उसे एक पेड़ के नीचे बैठे हुए बाबा दिखाए पड़े। वह उनके पास गया और जंगल का सारा वृतांत सुनाते हुए वह बोला, “बाबा जी! भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनके पास जानवरों के लिए भोजन का प्रबंध है, लेकिन इंसानों के लिए नहीं।

बाबा जी ने उत्तर दिया, “बेटा! ऐसी बात नहीं है,भगवान के पास सारे प्रबंध है। दूसरों की तरह तुम्हारे लिए भी, लेकिन बात यह है कि वे तुम्हें लोमड़ी नहीं शेर बनाना चाहते हैं।

*💐💐सीख💐💐*

 हम सबके भीतर क्षमताओं का असीम भंडार है,बस अपनी अज्ञानतावश हम उन्हें पहचान नहीं पाते और स्वयं को कमतर समझकर दूसरों की सहायता की प्रतीक्षा करते रहते हैं।स्वयं की क्षमता पहचानिए। दूसरों की सहायता की प्रतीक्षा मत करिए।
इतने सक्षम बनिए कि आप दूसरों की सहायता कर सकें।


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💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 335 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐भक्त की रक्षा💐💐*

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सूरज लगभग आठ वर्ष का बेहद ही दुर्बल बालक था। उसका पारिवारिक व्यवसाय लकड़ी काटना और उन्हें बाजार में बेचना था। एक दिन सूरज यमुना के किनारे लकड़ियां काट रहा था। एक पेड़ की सूखी टहनियां यमुना नदी की ओर झुकी हुई थी।

सूरज की एक एक विशेषता थी वह हरे-भरे टहनियों को नहीं काटता था।

सुखी टहनी देखकर उसने सोचा क्यों ना आज इसे काटा जाए ! तुरंत ही अपनी कुल्हाड़ी लेकर उस टहनी को काटने लगा। क्योंकि वह टहनी यमुना नदी में झुकी हुई थी,अंतिम प्रहार से वह टहनी टूट कर नदी में गिर गई। उस टहनी को बचाने के प्रयास में सूरज यमुना नदी में गिर गया।यमुना नदी की धारा तीव्र थी क्योंकि उस समय बरसात का मौसम था।

वह अनेकों प्रयास के बावजूद भी उस धारा में बहने से ना बच सका।

काफी देर मशक्कत के बावजूद भी सफल नहीं हो सका और धारा में बहता चला गया।

उसने अपने इस कठिन क्षणों में अपने आराध्य श्री कृष्ण को मदद के लिए पुकारा।
इससे पहले उसने कृष्ण को कभी अपने निजी हितों के लिए नहीं पुकारा था। श्री कृष्ण अपने भक्त की पुकार सुनते ही वहां उपस्थित हुए। कृष्ण जी ने देखा सूरज बेहोश और अचेत अवस्था में है। उन्होंने सूरज को किनारे सकुशल लाकर लिटाया। सूरज को यह अहसास था कि उसे किसी ने बीच नदी से उठाकर किनारे पर लाया और उसकी देखरेख की।

नींद खुला तो वहां कोई मौजूद नहीं था।

उसने अपने पास मोरपंख देखा तो जान गया उसके प्रभु उसकी रक्षा के लिए आए थे।

वह सकुशल बच गया था।

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