प्रेरणादायक कहानियां भाग 37 prernadayak kahaniyan part 37




 💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 181 💮




*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐बुढ़िया की सुई💐💐*


एक बार किसी गाँव में एक बुढ़िया रात के अँधेरे में अपनी झोपडी के बहार कुछ खोज रही थी .तभी गाँव के ही एक व्यक्ति की नजर उस पर पड़ी , “अम्मा इतनी रात में रोड लाइट के नीचे क्या ढूंढ रही हो ?” , व्यक्ति ने पूछा।

” कुछ नहीं मेरी सुई गम हो गयी है बस वही खोज रही हूँ .”, बुढ़िया ने उत्तर दिया।

फिर क्या था, वो व्यक्ति भी महिला की मदद करने के लिए रुक गया और साथ में सुई खोजने लगा।

कुछ देर में और भी लोग इस खोज अभियान में शामिल हो गए और देखते- देखते लगभग पूरा गाँव ही इकठ्ठा हो गया।

सभी बड़े ध्यान से सुई खोजने में लगे हुए थे कि तभी किसी ने बुढ़िया से पूछा ,” अरे अम्मा ! ज़रा ये तो बताओ कि सुई गिरी कहाँ थी?”

” बेटा , सुई तो झोपड़ी के अन्दर गिरी थी .”, बुढ़िया ने ज़वाब दिया .

ये सुनते ही सभी बड़े क्रोधित हो गए और भीड़ में से किसी ने ऊँची आवाज में कहा , ” कमाल करती हो अम्मा ,हम इतनी देर से सुई यहाँ ढूंढ रहे हैं जबकि सुई अन्दर झोपड़े में गिरी थी , आखिर सुई वहां खोजने की बजाये यहाँ बाहर क्यों खोज रही हो ?”

” क्योंकि रोड पर लाइट जल रही है…इसलिए .”, बुढ़िया बोली।

*💐💐शिक्षा💐💐*

मित्रों, शायद ऐसा ही आज के युवा अपने भविष्य को लेकर सोचते हैं कि लाइट कहाँ जल रही है वो ये नहीं सोचते कि हमारा दिल क्या कह रहा है ; हमारी सुई कहाँ गिरी है , हमें चाहिए कि हम ये जानने की कोशिश करें कि हम किस फील्ड में अच्छा कर सकते हैं और उसी में अपना करीयर बनाएं ना कि भेड़ चाल चलते हुए किसी ऐसी फील्ड में घुस जाएं जिसमे बाकी लोग जा रहे हों या जिसमे हमें अधिक पैसा नज़र आ रहा हो।


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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*



*💐💐राजा और मंत्री💐💐*

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एक राजा जिसका बहुत बडा राज्य था। कोई कमी नहीं थी जो भी हुक्म करते वही हो जाता था। लेकिन राजा में एक आदत थी कि वह जो भी कोई थोड़ी सी गलती करता उसे तुरंत दस बडे खुंखार कुत्तों के सामने डालकर उसे कुत्तों से नुचवाता। राजा बडे गुस्से वाला था।

राजा की इस आदत से सभी परेशान थे। राजा का मंत्री भी राजा की इस आदत की आलोचना करता था। एक दिन उसी मंत्री से कोई गलती हो गयी। राजा को गलती का पता चला तो राजा ने तुरंत हुक्म दिया कि जाओ मंत्री को कुत्तों के सामने ले जाओ।

मंत्री ने राजा से गलती मानी, माफी मांगी लेकिन राजा ने कुछ नहीं सुना। और कहा कि जो कह दिया सो कह दिया। और सिपाहियों से कहा ले जाओ कुत्तों के बाडे में। मंत्री ने कहा ठीक है राजा जी लेकिन मेरी आखिरी इच्छा तो मान लो। राजा ने कहा ठीक है बताओ अपनी आखिरी इच्छा। मंत्री ने कहा मुझे दस दिन की महौलत दे दीजिए बस। राजा ने कहा ठीक है दस दिन की महौलत दे देते हैं।

लेकिन ग्यारहवें दिन सजा जरूर मिलेगी। मंत्री दस दिन तक राजा के पास नहीं आया। और ग्यारहवें दिन राजा के सामने पेश हो गया। राजा ने मंत्री को देखा और सिपाहियों से कहा जो सजा रखी थी मंत्री के लिए उसे पूरी की जाए। सिपाही मंत्री को कुत्तों के बाडे में लेकर गये, कुत्तों को भी खोल दिया गया। लेकिन कुत्ते मंत्री पर प्रहार करने के बजाय मंत्री से प्यार से पेश आ रहे थे।

यह देखकर राजा चौंक गया कि जिन कुत्तों को प्रहार करने के लिए ट्रेन किया गया है वे इतने प्यार से पेश आ रहे हैं। राजा ने मंत्री से कहा कि ये चमत्कार कैसे हो गया! इन कुत्तों को क्या हो गया है। मंत्री ने जवाब दिया कि इन दस दिनों में मैंने इन कुत्तों की बहुत सेवा की है। इन्हें खाना खिलाया, नहलाया अब ये कुत्ते जान चुके हैं कि मैं इनके लिए कुछ अच्छा करता हूँ ना कि बुरा। ये मुझ पर प्रहार नहीं करेंगे। मैंने आपकी इतने दिनों से सेवा की है, फिर भी आप मेरी एक गलती को माफ नहीं कर सके। आपसे ज्यादा अच्छे तो ये कुत्ते हैं जो अच्छा और बुरे को पहचानते हैं। राजा यह सब देखकर बड़ा शर्मिन्दा हुआ।

*💐💐शिक्षा:-💐💐*

हमें हमेशा सोच समझ कर फैसले लेने चाहिए। किसी की एक गलती को लेकर ही उसे जिन्दगी भर के लिए सजा नहीं देनी चाहिये बल्कि उसे माफ करने की हिम्मत रखनी चाहिए..!!

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 💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 183 💮








🌳🦚आज की कहानी🦚🌳


💐💐एक बाल्टी दूध💐💐



एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा! तुम्हारी राजधानी के बीचों बीच जो पुराना सूखा कुंआ है, अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक-एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है। 

अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था। उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे, अगर मैं अकेली एक बाल्टी पानी डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुई थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं। 

दरअसल ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला। 

💐💐शिक्षा:-💐💐

मित्रों, जैसा इस प्रसंग में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं। अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जायें तो पूरे देश की जनता ऐसा बदलाव ला सकती हैं जिसकी आज हमें ज़रूरत है। 

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 💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 184 💮


*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐एकता💐💐*


किसी जंगल में एक शेर रहता था जिससे सभी पशु-पक्षी बहुत डरते थे। शेर रोज किसी एक जानवर को मार कर अपना पेट भरता था। उसी जंगल में खरगोश, कछुआ, बंदर और हिरण, ये चारों पक्के और सच्चे दोस्त थे, जो हमेशा हर जानवर की मदद करने को तैयार रहते थे।

एक दिन एक भेड़िया उस जंगल में पहुंचा। रास्ते में उसे भालू मिला। भालू ने उसको जंगल के सारे कायदे कानून बताए कि यहां का राजा शेर रोज एक जानवर को मारकर खाता है, उससे बच कर रहना। चालाक भेड़िये ने सोचा, शेर से मित्रता करके उसका हितैषी बनकर, उसका दिल जीतना चाहिए, इससे मेरी जान तो बच जाएगी। 

भेड़िया शेर की गुफा में गया और सोए हुए शेर के पास बैठ गया। शेर नींद से जब जागा तो भेड़िए को खाने को उद्यत हुआ। भेड़िए ने कहा, महाराज, पशुलोक से पशु देवता ने आपकी सेवा के लिए मुझे भेजा है। अब आपको शिकार पर जाने की जरूरत नहीं। आज से आपको मैं शिकार लाकर दूंगा। शेर ने भेड़िए की बात मान ली।

भेड़िए ने जंगल में यह ढिंढोरा पिटवाया कि मैं पशुलोक से राजा शेर का सेवक बन कर आया हूं। प्रतिदिन जंगल के राजा की भूख मिटाने के लिए एक प्राणी मेरे साथ चलेगा। जंगल के सभी जानवर डर गए और भेड़िए की बात मानने को तैयार हो गए।

शेर के पास जाने के क्रम में एक दिन खरगोश की बारी आई और भेड़िया उसे ले जाने लगा। तभी वहां हिरण, बंदर और कछुआ भी आ पहुंचे और उसके साथ जाने की जिद करने लगे। शेर के सामने पहुंचकर चारों ने बारी-बारी अपनी बात शेर से कहीं। सबसे पहले खरगोश बोला, महाराज आज मैं आपका भोजन हूं। कछुआ बोला, नहीं महाराज आप अकेले खरगोश को नहीं खाइए, मुझे भी खाइए। तभी बंदर कहता है, महाराज इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं बड़ा हूं, मुझे अपना भोजन बना लीजिए। इतने में हिरण बोल पड़ा, महाराज, इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं अकेला ही तीनों के बराबर हूं, आप मुझे अपना शिकार बना लीजिए।

भेड़िया यह सब सुन रहा था। उसने कहा, महाराज, देर ना करें इन चारों की बातों में ना आए, एक झटके में इनको खत्म करके अपनी भूख मिटायें। तभी शेर ने चारों को अपने पास बुलाया और कहा, मैं तुम्हारी सच्ची एकता, मित्रता और त्याग देख कर बहुत खुश हुआ। यह कह कर शेर ने भेड़िए को अपना शिकार बना दिया।

*💐💐शिक्षा:-💐💐*

किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए आपसी एकता होना बहुत जरूरी है। एकता के लिए चाहिए आपसी स्नेह और विश्वास। स्नेह के आधार से ही सहयोगी बन पाते हैं। सहयोगी बनने के लिए अपने को मिटाना पड़ता है अर्थात् अपने पुराने संस्कारों को मिटाना होता है। इसलिए आप हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करते रहो।


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 💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 185 💮






*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐वाणी पर नियंत्रण💐💐*

एक बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह फैलाई कि उसके पड़ोस में रहने वाला नौजवान चोर है।

यह बात दूर - दूर तक फैल गई आस - पास के लोग उस नौजवान से बचने लगे।

नौजवान परेशान हो गया कोई उस पर विश्वास ही नहीं करता था।

तभी गाँव में चोरी की एक वारदात हुई और शक उस नौजवान पर गया उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

लेकिन कुछ दिनों के बाद सबूत के अभाव में वह निर्दोष साबित हो गया।

निर्दोष साबित होने के बाद वह नौजवान चुप नहीं बैठा उसने बूढ़े आदमी पर गलत आरोप लगाने के लिए मुकदमा दायर कर दिया।

पंचायत में बूढ़े आदमी ने अपने बचाव में सरपंच से कहा..

मैंने जो कुछ कहा था, वह एक टिप्पणी से अधिक कुछ नहीं था किसी को नुकसान पहुंचाना मेरा मकसद नहीं था।

सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा... आप एक कागज के टुकड़े पर वो सब बातें लिखें, जो आपने उस नौजवान के बारे में कहीं थीं..

...और जाते समय उस कागज के टुकड़े - टुकड़े करके घर के रस्ते पर फ़ेंक दें कल फैसला सुनने के लिए आ जाएँ..

बूढ़े व्यक्ति ने वैसा ही किया..

अगले दिन सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा कि फैसला सुनने से पहले आप बाहर जाएँ और उन कागज के टुकड़ों को...

जो आपने कल बाहर फ़ेंक दिए थे, इकट्ठा कर ले आएं...

बूढ़े आदमी ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता.. उन टुकड़ों को तो हवा कहीं से कहीं उड़ा कर ले गई होगी...

अब वे नहीं मिल सकेंगें... मैं कहाँ - कहाँ उन्हें खोजने के लिए जाऊंगा ?

सरपंच ने कहा 'ठीक इसी तरह, एक सरल - सी टिप्पणी भी किसी का मान - सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है...

जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता।

इसलिए यदि किसीके बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें।

वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए,ताकि हम शब्दों के दास न बनें..!!



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