🌺 ऋषि चिंतन से 16 🌺 Rishi chintan se 16 🌺
*🥀२६ जनवरी २०२३ गुरुवार🥀*
*🍁माघ शुक्लपक्ष पंचमी २०७९🍁*
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*🇳🇪🌹 गणतंत्र-दिवस 🌹🇳🇪*
*➖तथा➖*
*🪴 ➖बसंत पंचमी➖ 🪴*
*〰️की〰️*
*🙏बहुत बहुत शुभकामनाएँ🙏*
*🙏🙏 बहुत बहुत बधाई🙏🙏*
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*‼ऋषि चिंतन‼*
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*🍂अपनी गलती आप सुधारें🍂*
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👉 *यह स्वाभाविक ही है कि प्रयत्न करने पर भी कभी-कभी व्यवहार कुशलता में मनुष्य चूक जाता है और कुछ न कुछ गलती कर बैठता है, किंतु इसके लिए अपने दोष और गलतियों को विनम्र भाव से स्वीकार कर लेना आवश्यक है ।* जिसके साथ आपने कुछ अव्यावहारिकता की हो उसके पास जाकर आप अपनी धृष्टता को स्वीकार करते हुए उसके लिए क्षमा याचना कीजिए । इससे लोग आपके हो जाएँगें । *अपनी गलती को स्वीकार कर लेने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए, न किसी तरह का भय ही ।*
👉 अपनी अव्यावहारिकता के लिए न केवल स्वीकार अथवा क्षमा याचना करके ही रह जाना चाहिए, वरन् भविष्य में भी उस प्रकार की हरकत न करने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए तथा उसके प्रायश्चित के लिए स्वयं को कुछ-न-कुछ दंड भी देना चाहिए, *ताकि भविष्य में ऐसा कभी भी न हो ।*
👉 अपने स्वभाव, विचार में स्थित ईर्ष्या, द्वेष एवं तत्संबंधी भावनाओं को निकालकर प्रेम का स्रोत बहाइए । *मानव मात्र से, प्राणी मात्र से प्रेम कीजिए ।* प्रेम भी नि:स्वार्थ हो । उनसे आत्म संबंध कायम करके एक दूसरे के दु:ख-दर्द में आवश्यकता पड़ने पर काम आइए । *परस्पर प्रेम, सहानुभूति, सहायता, विनम्रता और सेवा के पवित्र सूत्रों से संबंध बनाइए ।* इस संसार रूपी नाव में हम सब यात्रा कर रहे हैं । अपने अपने गंतव्य स्थान पर सब उतर जायेंगे । कोई कुछ भी एक दूसरे से छीन कर नहीं ले जाएगा । *जो जैसे आया है वैसे ही जाएगा । अतः फिर क्यों खींचातानी ? ईर्ष्या-द्वेष, डाह-जलन, कुढ़न हो ?* इन दूषित तत्वों को निकाल फेंकिये । आपका जीवन शुद्ध प्रेम से सराबोर हो । आप देखेंगे कि हिंसक प्राणी भी आपके सहयोगी, सहायक हो जाएँगें । सारी विपरीतता अनुकूलता में परिणत हो जाएगी । *आपके कदम प्रगति, सफलता एवं विकास की ओर अग्रसर हो उठेंगे । आप जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे । आत्मलक्ष्य प्राप्त करेंगे और वह सब कुछ प्राप्त करेंगे जिसके लिए आपका अवतरण इस वसुंधरा के पवित्र अंक में हुआ है ।*
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*हम बदलें, तो दुनिया बदले । पृष्ठ-१४६*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
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🌺 ऋषि चिंतन से 17 🌺 Rishi chintan se 17🌺
*🥀२५ जनवरी २०२३ बुधवार🥀*
*🍁माघ शुक्लपक्ष चतुर्थी २०७९🍁*
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*‼ऋषि चिंतन‼*
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*➖❗निरहंकारी बनिए❗➖*
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👉 *व्यवहार कुशलता के लिए "निरहंकारिता" का होना भी आवश्यक है ।* मनुष्य की यह एक मानसिक कमजोरी है कि वह अपने शरीर, स्वरुप, धन, वैभव, विद्या, संपन्नता, कीर्ति आदि का गर्व करके अपने बड़प्पन और अहंकार के समक्ष दूसरों को तुच्छता की दृष्टि से देखता है । यह अव्यावहारिक एवं तुच्छता का चिन्ह माना गया है । संसार में एक से एक बड़े धनी मानी, संपन्न, विद्वान-योग्य बैठे हुए हैं । *फिर किस बात की अहमन्यता !* इस प्रकार की अहंकारिता प्रगतिशीलता के मार्ग को अवरुद्ध कर देती है और मनुष्य को आगे नहीं बढ़ने देती । साथ ही इस प्रकार का अहंकार समाज में सम्मानास्पद न माना जाएगा । उसके कारण दूसरे असंतुष्ट होंगे और उदास होकर असहयोग करने लगेंगे । *इसलिए मिथ्या अहंकार का त्याग कीजिए ।* अपनी योग्यता, संपन्नता आदि को छोटा मानकर और वृद्धि के लिए प्रयत्न कीजिए, *अहंकारशून्य होकर दूसरों को बड़प्पन, महत्व प्रदान कीजिए, इसी में आपका भी बड़प्पन और महत्व है ।*
👉 *निरहंकारिता के लिए आवश्यक है कि दूसरों के दृष्टिकोण का आदर एवं सम्मान करना सीखा जाए ।* कोई उत्तम बात कहे तो उसे स्वीकार करना ही चाहिए, किंतु अन्य कोई व्यक्ति अपनी हठधर्मी एवं अहमन्यतावश अपने गलत दृष्टिकोण पर भी जोर दे रहा हो तो उस समय उसका भी सम्मान कीजिए और सद्भावना प्रकट कीजिए, फिर एकांत में उससे मिलकर विचार-परामर्श कीजिए । वह अपने गलत दृष्टिकोण को वापस लेकर आपका सहयोगी बन जाएगा । *अतः दूसरों के दृष्टिकोण का आदर कीजिए ।*
👉 *बरबस, जबरन आपका सही दृष्टिकोण भी किसी पर थोपने की चेष्टा न कीजिए । यह भी अहंकार वृत्ति का सूचक है ।* आप केवल नम्रता भरे शब्दों में अपना सुझाव एवं राय दे सकते हैं । उस पर आप भी व्यक्तिगत कोई जोर न दें । *दूसरे व्यक्तियों को तर्क से आप के विषय अथवा सुझाव को मानने दीजिए ।* इस प्रकार की वृत्ति सफल जीवन एवं दूसरों के सहयोग और मित्रता की वृद्धि करती है ।
👉 *अनावश्यक उपदेश देने का प्रयत्न भी मत करिए, समाज आपसे जबरन उपदेश ग्रहण नही करेगा, न उसका आदर ही करेगा ।* आप अपना सुझाव और विचार पेश कीजिए, जनता को तर्क एवं विचार बल से उस पर अमल करने दीजिए ।
👉 *दूसरों के साथ अनधिकार चेष्टा करना भी अहंकार में ही सम्मिलित है ।* बिना मतलब, अपनी योग्यता का प्रदर्शन करने के लिए या दूसरों को अपने कार्य में अयोग्य समझते हुए अनावश्यक हस्तक्षेप मत कीजिए । इसे प्रतिपक्षी लोग कभी अच्छा न समझेंगे और आपके प्रति उनके विचार अच्छे न होंगे ।
👉 *आवश्यकता से अधिक न बोलिए ।* ज्यादा बोलना मूर्खता एवं घमंड का प्रदर्शन करना है । *बातूनी, शेखीखोर, टीपटाप लगाकर बोलने वाला व्यक्ति घटिया दर्जे का माना जाता है ।* ऐसा व्यक्ति काम भी कम करता है, *अत: इतना बोलिए, जो अवश्यक हो, जिससे आपका तथा दूसरों का कुछ हित साधन हो सके ।* बेकार बकवास करने से आपके व्यक्तित्व का मूल्य घट जाएगा और आपकी शक्तियों का क्षय होगा ।
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*हम बदलें, तो दुनिया बदले । पृष्ठ-१४४*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
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🌺 ऋषि चिंतन से 18 🌺 Rishi chintan se 18🌺
*🥀२४ जनवरी २०२३ मंगलवार🥀*
*🍁माघ शुक्लपक्ष तृतीया २०७९🍁*
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*‼ऋषि चिंतन‼*
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*➖❗सहिष्णु बनिए❗➖*
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👉 *"व्यवहार कुशल" बनने के लिए "सहिष्णु" बनना आवश्यक है ।* दैनिक व्यवहार में सहनशील बनिए । *आप में जितनी "सहनशीलता" होगी उतना ही आप सफल जीवन का निर्माण कर सकेंगे ।* मानव जीवन में भिन्न-भिन्न परिस्थितियाँ, वातावरण, उतार--चढ़ाव, संयोग- वियोग आते रहते हैं । तरह-तरह के व्यक्तियों से संपर्क होता है, क्रोधी, उत्तेजित, झगड़ालू, विरोधी दुष्ट प्रकृति के व्यक्तियों से लेकर अच्छे भले व्यक्तियों से आपका पाला पड़ता है । *घर, घर से बाहर समाज आपकी बात में आपकी अव्यवस्था नजर आती है, लोग आप की आलोचना करते हैं, गंभीर समस्याएंँ आपको रुकावट डालती हैं, किंतु इन सबको अपने विस्तृत ह्रदय में दृढ़ता और साहस में, क्षमाशीलता में मानसिक गंभीरता में समा लीजिए, सहनशीलता में परिणत कर दीजिए, इनसे उत्तेजित न होइए ।*
👉 चिड़चिड़ाहट न लाइए । उक्त विषय आपकी शांति, आपकी आत्मनिर्भरता, गंभीरता, दृढ़ता एवं सहनशीलता को विचलित न कर सके, इसके लिए पूरा पूरा ध्यान रखें । *आप देखेंगे कि यह "सहिष्णुता" "सहनशीलता" आपके उज्जवल भविष्य का मार्ग खोल देगी ।* परिस्थितियों, समस्याओं के वातावरण, संयोग-वियोग आदि में विचलित हो जाना, उनके प्रवाह से अपने आप को विचलित कर देना मानसिक कमजोरी है, जो आपको सफलता से दूर करती है । अतः इसे छोड़िए । *प्रत्येक वस्तु, प्रत्येक परिस्थिति में, प्रत्येक वातावरण में अपने आप को ढालने की क्षमता रखिए ।*
👉आप देखेंगे कि शुरु से अंत तक आपकी स्थिति, प्रगति-प्रवाह की ओर बढ़ती रहेगी । *सारी विपरीतता विरोधी परिस्थितियाँ अंधकार के गर्त में समाप्त हो जाएँगी और आप सफल जीवन की उच्च मंजिल को पार कर लेंगे ।*
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*हम बदलें, तो दुनिया बदले । पृष्ठ-१४३*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
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🌺 ऋषि चिंतन से 19 🌺 Rishi chintan se 19🌺
*🥀२३ जनवरी २०२३ सोमवार🥀*
*🍁माघ शुक्लपक्ष द्वितीया२०७९🍁*
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*‼ऋषि चिंतन‼*
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*सद्गुण अवलोकन की दृष्टि विकसित करें*
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👉 मानव एक सामाजिक प्राणी है उसका संबंध विस्तृत मानव समाज से होता है । इतना ही नहीं भूमंडल के व्याप्त वातावरण से उसका संबंध होता है । ज्यों-ज्यों व्यक्तित्व का विकास होता जाता है, उसके साथ-साथ ही यह संबंध सूत्र भी विस्तृत होता जाता है । समाज और व्यक्ति दोनों पर परस्पर एक दूसरे का प्रभाव पड़ता है । दोनों के उत्थान, पतन, सफलता आदि का भी उतना ही प्रभाव पड़ता है । व्यवहार कुशलता इन दोनों को मिलाकर प्रगति-पथ एवं सफलता की ओर अग्रसर करती है । *तात्पर्य यह है कि व्यवहार कुशलता से व्यक्ति स्वयं तो उन्नत एवं सफल होता ही है, किंतु साथ ही साथ समाज पर भी इसका काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है । अतः सभी संस्कृतियों ने व्यवहारकुशलता एवं उसके लिए आवश्यक गुणों को मुक्त कंठ से स्वीकार किया है ।*
👉 अधिकांश मनुष्यों में कुछ न कुछ कमजोरियाँ, बुराइयाँ एवं दोष आदि रहते हैं , इसके साथ अनेकों गुण भी । सर्वथा दोषमुक्त अथवा निर्बलतामुक्त व्यक्ति मिलना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य ही है, इसी प्रकार सर्वगुण संपन्न व्यक्ति भी । *किंतु श्रेष्ठता इसी में है कि दूसरों के अवगुणों, दोषों की उपेक्षा कर उनके गुणों को देखा जाए और उन्हें ग्रहण किया जाए, दूसरों के सब गुणों को जाने और उन्हें दाद दें, उनकी प्रशंसा करें ।* दूसरों का दोष दर्शन अथवा उनमें बुराइयाँ निकालना सरल कार्य है, *साथ ही यह एक घटिया मानसिक रोग है*, जो व्यक्ति को तुच्छता एवं पतन की ओर ले जाता है । ऐसा व्यक्ति जीवन में सफल एवं उन्नत नहीं हो सकता, न उसे किसी का सहयोग अथवा सहायता मिल सकती है । *अतः दूसरों में सद्गुणों, श्रेष्ठता आदि का दर्शन कीजिए । उसकी विशेषताओं को समझकर उसकी प्रशंसा कीजिए और अपने जीवन में उन्हें उतारिए भी ।* इससे आदर्श एवं उन्नतिशील जीवन का निर्माण होगा , दूसरों का आपको सहयोग मिलेगा और आपको सच्चे मित्र भी प्राप्त होंगे । *स्वभाव वश किसी की बुराई भी ध्यान में आए तो उसे भुला कर उसके सदगुणों पर विचार कीजिए, जिससे अपना दृष्टिकोण परिमार्जित बनेगा ।*
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*हम बदलें तो दुनिया बदले पृष्ठ-१४२*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
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🌺 ऋषि चिंतन से 20 🌺 Rishi chintan se 20🌺
*🥀२२ जनवरी २०२३ रविवार🥀*
*🍁माघ शुक्लपक्ष प्रतिपदा२०७९🍁*
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*‼ऋषि चिंतन‼*
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*गलती की ओर से आँख न मूंदे*
*☝️ ➖आवाज उठाएँ➖ ☝️*
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👉 *हमें स्मरण रखना चाहिए कि स्वयं अपराध न करना ही हमारी निर्दोषिता का प्रमाण नहीं है ।* अपराधों और बुराइयों को रोकना भी प्रत्येक सभ्य एवं प्रबुद्ध नागरिक का कर्तव्य है । *यदि किसी की आँखों के आगे हत्या, लूट, चोरी, बलात्कार आदि नृशंस कृत्य होते रहें और वह मौन पत्थर की तरह चुपचाप खड़े देखते रहें, कोई प्रतिरोध न करें तो यह निष्क्रियता एवं अकर्मण्यता भी कानूनन अपराध मानी जाएगी और न्यायाधीश इस जड़ता के लिए भी दंड देंगे ।* इसे कायरता और मानवीय कर्तव्यों की उपेक्षा माना जाएगा । गाँवों में जिनके पास बंदूकें रहती हैं, उनका यह कर्तव्य भी हो जाता है कि यदि गाँव में दूसरों के यहाँ डकैती पड़े, तो डाकूओं से मुकाबला करने के लिए उन बंदूकों का उपयोग करें । यदि वे बंदूक वाले डर के मारे अपने घरों में चुपचाप जान बचाये बैठे रहें और डकैती बिना प्रतिरोध पड़ती रहे, तो इस कांड में डकैतों की तरह उन डरपोक बंदूकधारियों को भी अपराधी माना जाएगा और सरकार उनकी बंदूकें जब्त कर लेगी ।
👉समाज शास्त्र के अनुसार प्रत्येक सभ्य नागरिक का यह पवित्र कर्तव्य है कि बुराइयों से वह स्वयं बचे और दूसरों को बचाये । *अपराध न तो स्वयं करें और न करने दें, जो स्वयं तो पाप नहीं करता, पर पापियों का प्रतिरोध नहीं करता है , वह एक प्रकार से पाप का पोषण ही करता है, क्योंकि जब कोई बाधा देने वाला ही न होगा तो पाप और भी तीव्र गति से बढ़ेगा ।* हम सब एक नाव में बैठे हैं, यदि इन बैठने वालों में से कोई नाव के पेंदे में छेद करें या उछल-कूद मचा कर नाव को डगमगाये, *तो बाकी बैठने वालों का कर्तव्य है कि उसे ऐसा करने से रोके ।* यदि न रोका जाएगा तो नाव का डूबना और सब लोगों का संकट में पड़ना संभव है । यदि उस उपद्रवी व्यक्ति को अन्य लोग नहीं रोकते हैं, *तो उन्हें यह कहने का अधिकार नहीं है कि क्या करें, हमारा क्या कसूर है, हमने नाव में छेद थोड़े ही किया था । छेद करने वाले को न रोकना भी स्वयं छेद करने के समान ही घातक है ।* मनुष्य समाज परस्पर इतनी घनिष्ठता से जुड़ा हुआ है कि अपना स्वयं का पाप ही नहीं, दूसरों का पाप भी उनको भुगतना पड़ता है । *जयचंद और मीर जाफर की गद्दारी से सारे भारत की जनता को कितने लंबे समय तक की गुलामी की यातनाएं सहनी पड़ी ।*
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*हम बदलें तो दुनिया बदले, पृष्ठ-५०*
*🪴पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🪴*
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