💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 210. 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐अज्ञानता और लोभ का परिणाम💐💐*
https://chat.whatsapp.com/DUxTq82fjNx43YpKBz0l1U
एक कुम्हार को मिट्टी खोदते हुए अचानक एक हीरा मिल गया। उसने उसे अपने गधे के गले में बांध दिया। एक दिन एक बनिए की नजर गधे के गले में बंधे उस हीरे पर पड़ गई। उसने कुम्हार से उसका मूल्य पूछा। कुम्हार ने कहा, सवा सेर गुड़। बनिए ने कुम्हार को सवा सेर गुड़ देकर वह हीरा खरीद लिया। बनिए ने भी उस हीरे को एक चमकीला पत्थर समझा था लेकिन अपनी तराजू की शोभा बढ़ाने के लिए उसकी डंडी से बाँध दिया।
एक दिन एक जौहरी की नजर बनिए के उस तराजू पर पड़ गई। उसने बनिए से उसका दाम पूछा। बनिए ने कहा, पांच रुपए। जौहरी कंजूस व लालची था। हीरे का मूल्य केवल पांच रुपए सुनकर समझ गया कि बनिया इस कीमती हीरे को एक साधारण पत्थर का टुकड़ा समझ रहा है। वह उससे भाव-ताव करने लगा-पांच नहीं, चार रुपए ले लो। बनिये ने मना कर दिया क्योंकि उसने चार रुपए का सवा सेर गुड़ देकर खरीदा था। जौहरी ने सोचा कि इतनी जल्दी भी क्या है ? कल आकर फिर कहूँगा, यदि नहीं मानेगा तो पांच रुपए देकर खरीद लूँगा।
संयोग से दो घंटे बाद एक दूसरा जौहरी कुछ जरूरी सामान खरीदने उसी बनिए की दुकान पर आया। तराजू पर बंधे हीरे को देखकर वह चौंक गया। उसने सामान खरीदने के बजाए उस चमकीले पत्थर का दाम पूछ लिया। बनिए के मुख से पांच रुपए सुनते ही उसने झट जेब से निकालकर उसे पांच रुपये थमाए और हीरा लेकर खुशी-खुशी चल पड़ा। दूसरे दिन वह पहले वाला जौहरी बनिए के पास आया। पांच रुपए थमाते हुए बोला- लाओ भाई दो वह पत्थर।
बनिया बोला- वह तो कल ही एक दूसरा आदमी पांच रुपए में ले गया। यह सुनकर जौहरी ठगा सा महसूस करने लगा। अपना गम कम करने के लिए बनिए से बोला- "अरे मूर्ख ! वह साधारण पत्थर नहीं, एक लाख रुपए कीमत का हीरा था।"
बनिया बोला, "मुझसे बड़े मूर्ख तो तुम हो। मेरी दृष्टि में तो वह साधारण पत्थर का टुकड़ा था, जिसकी कीमत मैंने चार रुपए मूल्य के सवा सेर गुड़ देकर चुकाई थी। पर तुम जानते हुए भी एक लाख की कीमत का वह पत्थर, पांच रुपए में भी नहीं खरीद सके।"
https://chat.whatsapp.com/DUxTq82fjNx43YpKBz0l1U
*💐💐शिक्षा:-💐💐*
मित्रों, हमारे साथ भी अक्सर ऐसा होता है हमें हीरे रूपी सच्चे शुभ् चिन्तक मिलते हैं लेकिन अज्ञानतावश पहचान नहीं कर पाते और उसकी उपेक्षा कर बैठते हैं, जैसे इस प्रसंग में कुम्हार और बनिए ने की। और कभी पहचान भी लेते हैं अपने अहंकार के चलते तुरन्त स्वीकार नहीं कर पाते और परिणाम पहले जौहरी की तरह हो जाता है और पश्चाताप के अतिरिक्त कुछ हासिल नहीं हो पाता..!!
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 211. 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐एक अनोखा पात्र💐💐*
एक साधु ने एक सम्राट के द्वार पर दस्तक दी सुबह का समय था। और सम्राट बगीचे में घूमने निकला था। संयोग की बात है साधु को सामने ही सम्राट मिल गया।
https://chat.whatsapp.com/DUxTq82fjNx43YpKBz0l1U
साधु ने अपना पात्र उस के सामने कर दिया। सम्राट ने कहा क्या चाहते हो? साधु ने कहा कुछ भी दे दो “शर्त यही है,” कि मेरा पात्र पूरा भर जाए। मैं थक गया हूँ, यह पात्र कभी भरता ही नहीं। सम्राट हंसने लगा, और कहा तुम पागल मालुम होते हो। साधु ने कहा पागल न होते तो, साधु ही क्यों होते सम्राट । यह छोटा सा पात्र भरता ही नहीं? फिर सम्राट ने अपने वजीर से कहा लाओ इसे सोने की मोहरों से भर दो। और इस साधु का मुंह सदा के लिए बंद कर दो। साधु ने कहा मैं फिर याद दिला दूं कि भरने की कोशिश अगर आप करते हैं। तो शर्त यह है कि जब तक पात्र भरेगा नहीं मैं पीछे नहीं हटाऊंगा। सम्राट ने घमण्ड से कहा- तू घबरा मत ! इसे हम सोने से भर देंगे, हीरे जवाहरातों से भर देंगे। लेकिन जल्द ही सम्राट को अपनी भूल समझ में आ गई जब सोने की मोहरें डाली गईं और वह गुम हो गईं, हीरे डाले गये और वह भी खो गये। लेकिन सम्राट भी जिद्दी था, और फिर वह साधु से हार माने। यह भी तो उसे जचता नही था, इसलिए अपनी राजधानी में सूचना पहुंचाई। सूचना सुन कर हजारों लोग इकट्ठे हो गए, सम्राट अपना ख़जाना खाली करता चला गया। उस ने कहा आज दांव पर लग जाना हैं, सब डूबा दूंगा, मगर उस का पात्र भर कर ही रहूंगा। शाम हो गई सूरज ढलने लगा, सम्राट के कभी ना खाली होने वाले खजाने खाली हो गए, लेकिन पात्र नहीं भरा सो नहीं भरा, वह गिर पड़ा साधु के चरणों में और कहा मुझे क्षमा कर दो। मेरी अकड़ निकल दी आप ने, अच्छा किया। मैं तो सोचता था कि मेरे पास अक्षय खजाना है, लेकिन यह आप के छोटे से पात्र को भी न भर पाया। बस अब एक ही प्रार्थना है, मैं तो हार गया मुझे क्षमा कर दें। मैंने व्यर्थ ही आप को वचन दिया था आप का पात्र भरने का। मग़र जाने से पहले एक छोटी सी बात मुझे बताते जाओ। मेरे मन में बार बार यही प्रश्न उठेगा, कि यह पात्र क्या है। किस जादू से बना है, साधु हंसने लगा। उस ने कहा किसी जादू से नहीं ‘इसे आदमी के ह्रदय से बनाया गया है। ना आदमी का ह्रदय भरता है, और ना ही यह पात्र भरता है। इस जिंदगी में कोई और चीज तुम्हे छका नहीं सकेगी। तुम्हारा पात्र खाली का खाली रहेगा, कितना ही धन डालो इस में सब इस में खो जाएगा। यह पात्र खाली का खाली ही रहेगा, भरे नहीं भरता, ना कभी भरेगा, यह तो केवल परमात्मा से ही भरेगा। क्योंकि अनंत है हमारी प्यास, अनन्त है हमारा परमात्मा और अनंत को सिर्फ अनंत ही भर सकता है, और कोई नहीं।
*💐💐शिक्षा💐💐*
इसलिए हमें किसी भी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए। बस मालिक के आगे यही विनती करनी चाहिए कि मालिक जो तूने दिया है, उस के लिए तेरा शुक्र है। और उस का उपयोग मालिक के उन दुखी दीन बंधुओं के लिए करना चाहिए। अपना दिल बड़ा रखते हुए सब की मदद करें। तभी हम उस परमात्मा की खुशी हासिल कर पाएंगे। हर एक की सुनो, और हर एक से सीखो क्योंकि हर कोई, सब कुछ नही जानता। लेकिन हर एक कुछ ना कुछ जरुर जानता हैं! स्वभाव रखना है तो उस दीपक की तरह रखिये। जो सम्राट के महल में भी उतनी ही रोशनी देता है। जितनी की किसी गरीब की झोपड़ी में….।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 212 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐सेवा💐💐*
https://chat.whatsapp.com/JSFae8RvNs0JbZL4aBjXrR
एक बार एक पक्षी समुंदर में से चोंच से पानी बाहर निकाल रहा था।
दूसरे ने पूछा भाई ये क्या कर रहा है...
पहला बोला समुंदर ने मेरे बच्चे डुबा दिए हैं , अब तो इसे सुखा कर ही रहूँगा।
यह सुन दूसरा बोला भाई तेरे से क्या समुंदर सूखेगा। तू छोटा सा और समुंदर इतना विशाल। तेरा पूरा जीवन भी लग जायेगा तो भी तु समुद्र का कुछ नहीं बिगाड़ सकता है ।
पहला बोला देना है तो साथ दे,सलाह नहीं चाहिए।
यह सुन दूसरा पक्षी भी साथ लग लिया। ऐसे हज़ारों पक्षी आते गए और दूसरे को कहते गए सलाह नहीं,साथ चाहिए।
यह देख भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी भी इस काम के लिए जाने लगे।
भगवान बोले तू कहाँ जा रहा है। तू गया तो मेरा काम रुक जाएगा। तुम पक्षियों से समुंदर सूखना भी नहीं है।
गरुड़ बोला...भगवन सलाह नहीं, साथ चाहिए। फिर क्या ऐसा सुन भगवान विष्णु जी भी समुंदर सुखाने आ गये।
भगवान जी के आते ही समुंदर डर गया और उस पक्षी के बच्चे लौटा दिए।
आज इस संकट के समय में भी देश को हमारी सलाह नहीं साथ चाहिए। आज सरकार को कोसने वाले नहीं, समाज के साथ खड़े हो कर सेवा करने वाले लोगों की आवश्यकता है। सेवा चाहे चोंच भर हो.. हर नागरिक ये संकल्प करले की इस संकट के समय प्रतिदिन सेवा का एक काम जरूर करुंगा। तो दृश्य बदलेगा....
इसलिए सलाह नहीं,साथ दें।
जो साथ दे दे हर इंसान, तो फिर से मुस्कुरायेगा हिन्दुस्तान....
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 213 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐पिता की ताकत💐💐*
https://chat.whatsapp.com/JSFae8RvNs0JbZL4aBjXrR
इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया ....क्लास मैं हमेशा से अव्वल आता रहा है !
पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया !
बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया की पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है वो अभी इस साल काम दे सकते हैं!
अपने जूतों की बजाये उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा !
मैंने सोचा बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रहा है !
खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा.....दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली ...डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी.....फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा !!!!
मैंने बेटे से कहा :बेटा ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है तो फिर और लम्बी क्यों ?
बेटे ने कहा :पिता जी मुझे शर्ट निक्कर के अंदर ही डालनी होती है इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा.......लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी ......पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रहा !
मैं खामोश रहा !!
घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा :तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है बेटा ?
बेटे ने कहा: पिता जी मैं अक्सर देखता था कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ो पर पूरे पैसे खर्च कर दिया करते हैं !
गली- मोहल्ले में सब लोग कहते हैं के आप बहुत ईमानदार आदमी हैं और हमारे साथ वाले राजू के पापा को सब लोग चोर, कुत्ता, बे-ईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते हैं,जबकि आप दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं.....
जब सब लोग आपकी तारीफ करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है.....मम्मी और दादा जी भी आपकी तारीफ करते हैं !
पिता जी मैं चाहता हूँ कि मुझे कभी जीवन में नए कपडे, नए जूते मिले या न मिले
लेकिन कोई आपको चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर या कुत्ता न कहे !!!!!
मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ पिता जी, आपकी कमजोरी नहीं !
बेटे की बात सुनकर मैं निरुतर था! आज मुझे पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!
आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 214 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐श्रम अथवा अर्थ दान💐💐*
किसी नगर में एक वैद्य रहते थे। उनका व्यवहार बेहद कुशल और विनम्र था, इसीलिए वे उस पूरे इलाके में बहुत इज्जत भी पाता था। वे अपने चिकित्सा आश्रम में ही रोगियों का इलाज़ करते थे।
https://chat.whatsapp.com/JSFae8RvNs0JbZL4aBjXrR
एक बार एक सेठ अपने बच्चे को दिखाने उस वैद्य के पास पहुंचा। बच्चे को देखने के बाद वैद्य ने एक पुड़िया दवा दी और पुर्जे पर आगे चलनेवाली दवा लिख दी।
सेठ ने वैद्य से पूछा, क्या फीस देनी होगी? वैद्य ने कहा, आप मुझे 100 सोने की अशर्फी दे दीजिये। यह बात पास बैठा दूसरा मरीज सुन रहा था, जो बेहद गरीब था। उसने सोचा कि इतनी फीस मैं कैसे दे पाऊँगा? यह सोच कर वह चुपचाप उठ कर जाने लगा। वैद्य ने उससे पूछा तो उसने सारी बात बता दी। वैद्य ने कहा, तुम यही बैठो, तुम्हारा इलाज़ मुफ्त में होगा, जब तुम ठीक हो जाओ तब आश्रम आकार दूसरों की सेवा कर देना।
यह बात सुन कर सेठ मन ही मन क्रोधित हो गया और वैद्य को बोला, वैद्य जी, आप तो बहुत घटिया इंसान हैं, मेरा पैसा देख कर आपको लालच आ गया और मुझसे इतनी बड़ी रकम मांग बैठे, जबकि इसका इलाज़ आपने मुफ्त में ही कर दिया, मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।
वैद्य मुस्कुराते हुए बोले, नहीं सेठ जी, ऐसी बात नहीं है, दरअसल, मेरे आश्रम को चलाने के लिए मुझे दो चीजों की आवश्यकता होती है – धन और सेवा, जिस व्यक्ति के पास जो चीज़ होती है, मैं वही मांगता हूँ।
आपके पास धन है तो मैं आपसे धन लूँगा और इस व्यक्ति के पास धन नहीं है, इसीलिए ठीक होकर यह मेरे आश्रम में अपनी सेवा प्रदान करेगा, सेठ जी वैद्य जी की बात सुन कर सन्न रह गए।
उन्होने वैद्य से कहा, मुझे माफ कर दीजिये वैद्य जी, मैं बगैर आपका भावार्थ समझे हुए ही किसी गलत निष्कर्ष पर पहुँच गया था। मैं यह भूल गया था कि आप जैसा व्यक्त यदि कुछ कर रह है, तो निश्चित ही उसका कोई विशेष कारण होगा।
यह कहते हुए सेठ ने वैद्य जी की हथेली पर 100 स्वर्ण अशर्फी रखी और मुस्कुराते हुए अपने घर की ओर चल पड़ा।
💐💐दान-अर्थ तथा श्रम न हो तो💐💐
एक बूढ़ा व्यक्ति प्रातः काल से ही घास काटने में लग गया । दिन ढलने तक वह इतनी घास काट चुका था कि कटी घास को घोड़े पर लाद कर बाजार में बेंच सके।
एक सुशिक्षित व्यक्ति बड़ी देर से उस वृद्ध के प्रयास को निहार रहा था। उसने वृद्ध से प्रश्न किया-आप दिन भरके परिश्रम से जो भी कमा सकोगे ,उससे कैसे आपका खर्च चलेगा? क्या आप घर में अकेले ही रहते हो?
वृद्ध ने हंसते हुए कहा--मेरे परिवार में कई लोग हैं। जितने की घास बिकती है,उतने से ही हम लोग व्यवस्था बनाते व काम चला लेतें हैं।
उस पढे लिखे युवक को आश्चर्यचकित देख वृद्ध ने पूछा-- लगता है कि तुमने अपनी कमाई से बढ़चढ़ कर महत्वाकांक्षाएँ संजो रखी है।इसीसे तुम्हं गरीबी में गुजारे पर आश्चर्य होता है।
युवक से और तो कुछ कहते न बन पड़ा पर अपनी झेंप मिटाने के लिए कहने लगा- गुजारा कर लेना ही सब कुछ नहीं हैं दान-पुण्य के लिए भी तो पैसा चाहिए।
बुड्ढा हंसा और बोला---
मेरी घास से तो बच्चों का पेट ही भर पाता है,पर मैंने पड़ोसियों से मांग मांगकर एक कुंवा बनवा दिया है,जिससे सारा गाँव पानी भरता व् पीता है। क्या दानपुण्य
के लिए अपने पास कुछ न होने
पर दूसरें समर्थ लोगों से मांगकर
कुछ भलाई का काम कर सकना
बुरा है?
युवक चल दिया। वह रात भर सोचता रहा की महत्वाकांक्षाएं संजोने व् उन्हीं की पूर्ति में जीवन लगा देना ही क्या एकमात्र जीवन जीने का तरीका है। धन(अर्थ) न भी हो तो भी सेवाभाव से यथासम्भव दान किया जा सकता है।
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏
💮 प्रेरणादायक कहानियां prernadayak kahaniyan 215 💮
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*
*💐💐चालाक मछली💐💐*
https://chat.whatsapp.com/JSFae8RvNs0JbZL4aBjXrR
एक बार की बात है, एक मछुआरा था। वह रोज़ तालाब में जाकर मछली पकड़ता था। जिसे बेचकर वह अपना गुजारा करता था। कभी उसके जाल में बहुत सारी मछली आती थी और कभी कम। एक दिन वह तालाब पर मछली पकड़ने के लिए गया। वह अपना जाल लगाकर कुछ देर बैठ गया। कुछ देर के बाद जब उसने अपना जाल निकाला तो उसके जाल में बहुत सारी मछली थी। वह बहुत खुश हुआ। उसने वह सारी मछली बाज़ार ले जाकर बेच दी। जिससे उसको अच्छे पैसे मिले। अगले दिन वह उसी उम्मीद से तालाब गया।
उसने अपना जाल तालाब में डाला और कुछ देर इंतज़ार किया। कुछ देर के बाद उसके जाल में कुछ सरसराहट सी होने लगी। जब उसने अपना जाल खींचा तो उसमें एक छोटी सी मछली थी। जब वह उस मछली को निकालने लगा तो वह मछली मछुआरे से बोली तुम मुझे छोड़ दो नहीं तो पानी के बिना मैं मर जाउंगी। उसकी इस बात को मछुआरे ने अनसुना कर दिया। मछली मछुआरे से बोली अगर तुम मुझको छोड़ दोगे तो मैं अपने सभी साथी मछलियों को कल तुम्हारे लिए बुलाकर लाऊंगी जिससे तुम बहुत सारी मछली पकड़ सकते हो।
मछुआरे को मछली की बात फ़ायदेमन्द लगी। उसने सोचा अगर मुझे एक छोटी सी मछली के बदले बहुत सारी मछली मिलती है तो यह अच्छा है। यह सोचकर उसने उस छोटी मछली को छोड़ दिया। मछली मछुआरे के जाल से छूट कर बहुत खुश हुई और बहुत दूर चली गयी। अगले दिन मछुआरा बहुत सारी मछली मिलने की उम्मीद से आया। लेकिन उस दिन भी उसको कोई मछली नहीं मिली। इस तरह मछली ने चालाकी से अपनी जान बचा ली।
*💐शिक्षा:-💐*
मित्रों, हमें मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए बल्कि होशियारी से काम करना चाहिए..!!
*कहानी ग्रुप में जुड़ने के लिए व्हाट्सएप मैसेज करें👇*
*8058708000 (शिक्षक नवनीत चौधरी)*
*💐💐टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ने के लिए लिंक को टच करें💐💐*
https://t.me/joinchat/QI-b20XE2vYhy6Ke_XBHGw
*कुटुंब app पर जुड़ने के लिए👇*
https://kutumb.app/ek-khoobsurat-si-kahani?slug=da61c33d5516&ref=RVWS5
*💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी,झुंझुनूं,राजस्थान💐💐*
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏